ये CG का वन विभाग है, यहां RTI में इस तरह की नहीं देते जानकारी, विधानसभा में दी गई जानकारी को आरटीआई में मांगी तब सूचना अधिकारी ने बता दिया गोपनीय

CG Wildlife News: छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की मौत का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है, ऐसा इसलिए, जिन जानकारियों को विधायक ने विधानसभा से मांगी थी, वन विभाग ने पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी थी। उसी जानकारी को जब एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने मांगी तब वन विभाग के सूचना अधिकारी ने गोपनीय बताते हुए सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया।

Update: 2026-04-10 10:57 GMT

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रायपुर। 10 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की मौत का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है, ऐसा इसलिए, जिन जानकारियों को विधायक ने विधानसभा से मांगी थी, वन विभाग ने पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी थी। उसी जानकारी को जब एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने मांगी तब वन विभाग के सूचना अधिकारी ने गोपनीय बताते हुए सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया।

छत्तीसगढ़ विधानसभ बजट सत्र के दौरान विधायक शेषराज हरवंश द्वारा पूछे गए प्रश्न क्रमांक 1641 के उत्तर में वन मंत्री ने दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच 9 बाघ, 38 हाथी सहित कुल 562 वन्यजीवों की “अस्वाभाविक मौत” होने की जानकारी मय दस्तावेज सदन में सार्वजनिक रूप से दी थी । नागरिक द्वारा विधानसभा को वन्यजीवों की मौत से संबंधित दिए गए दस्तावेज मांगने पर वन विभाग ने सूचना का अधिकार की धारा 8(1)(क) का हवाला देकर दस्तावेज देने से यह कहकर मना कर दिया कि यह दस्तावेज प्रदान करना वन्यप्राणियों की सुरक्षा एवं वन्यप्राणी प्रबंधन रणनीति, गोपनीयता तथा शासन हित में नहीं है।

मौतों के आंकड़ो में अंतर इसलिए मांगी जानकारी

रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने बताया कि विधानसभा में बताया गया कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच 38 हाथियों की मौत हुई, जबकि उन्हें सूचना का अधिकार में इसी अवधि के लिए बताया गया कि 36 हाथियों की मौतें हुईं। इसी प्रकार, इसी अवधि में विधानसभा को बताया गया कि 9 बाघ मरे और 562 वन्यप्राणियों की अस्वाभाविक मौत हुई, जबकि उन्हें सूचना का अधिकार के तहत दिए गए एंटी-पोचिंग डेटा, जिसमें अवैध शिकार और तस्करी की जानकारी रहती है, के अनुसार केवल 2 बाघ और 39 वन्यप्राणियों के अवैध शिकार और तस्करी की जानकारी दी गई।

सिंघवी ने बताया कि वे जानना चाहते थे कि बाकी के हाथी, बाघ और सैकड़ों जानवर अस्वाभाविक रूप से (अर्थात प्राकृतिक रूप से नहीं), कब मरे, कहां मरे, और कैसे मरे — विद्युत करंट से, शिकार से या अन्य अस्वाभाविक कारणों से। यह सारी जानकारी विधानसभा को दी जा चुकी है, परंतु वन विभाग मुख्यालय ने सूचना देने से मना कर दिया और हवाला सूचना का अधिकार की धारा 8(1)(क) का दिया।

कैसे उड़ाई नियमों की धज्जियां

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(क) के अनुसार वह सूचना नहीं दी जानी है, जिससे (अ) भारत की प्रभुता और अखंडता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़े, (ब) देश सहित सभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े, (स) जिससे राज्य की रणनीति, वैज्ञानिक या आर्थिक हित तथा विदेश संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े, या (द) अपराध करने को उकसावा या प्रोत्साहन मिले। परंतु विभाग ने, चूंकि जानकारी नहीं देनी थी, इसलिए यह धारा लगाकर सूचना देने से मना कर दिया। विभाग ने यह भी नहीं बताया, वन्यजीवों की मौत की जानकारी, जो विधानसभा को देकर सार्वजनिक कर दी गई है, आरटीआई के तहत देने से छत्तीसगढ़ की सुरक्षा, रणनीति, वैज्ञानिक या आर्थिक हित तथा विदेश संबंधों पर कैसे प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा या कैसे अपराध करने को उकसावा या प्रोत्साहन मिलेगा।

विधानसभा में दी गई सार्वजनिक जानकारी, गोपनीय कैसे हो गई?

सिंघवी ने पूरे मामले पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, जो जानकारी विधानसभा में सार्वजनिक रूप से दी जा चुकी है, वही जानकारी RTI में अचानक “गोपनीय” कैसे हो गई? सिंघवी ने कहा, अन्य वन्यजीवों को छोड़ दें, तो 16 मार्च से 4 अप्रैल के बीच, सिर्फ 18 दिनों में 6 तेंदुओं की खाल जब्त की गई है। तेंदुआ मारा गया तभी तो खाल मिली। आशंका व्यक्त की जा रही है, इनका शिकार हाल ही में हुआ है (कवर्धा-2, बलरामपुर-2, फरसगांव-1, दंतेवाड़ा-1)। दंतेवाड़ा में एक बाघ की खाल जब्त की गई, जिसका शिकार जनवरी 2026 में किया गया था।

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