CG विधानसभा बजट सत्र 2026: महिला विधायक पूरे सत्र गायब, ओपी का थीम आधारित बजट जारी, विपक्ष से अधिक धारदार रहे सत्तापक्ष के विधायक, भूपेश और उमेश का उम्दा प्रदर्शन
CG Assembly Budget Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र कई मायनों में खास रहा। नवा रायपुर में पहली बार विधानसभा का सत्र चला और समय से पहले सत्र खत्म होने के अटकलों को भी खारिज कर दिया। सत्र अपनी पूरी अवधि तक चला। बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण सूचनाओं में सत्तापक्ष के ही विधायक अधिक सक्रिय दिखे। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने थीम आधारित बजट पेश करने की परंपरा बनाए रखी तो सदन के नेता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विभाग की अनुदान मांगों का जवाब कड़े तेवर के साथ दिया।

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रायपुर। 20 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजटसत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह केवल पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण होने पर उपस्थित रहे। उसके बाद स्वास्थ्यगत कारणों से वे अनुपस्थित रहे। उनकी गैरमौजूदगी विधायकों को खलती रही, मगर पुराने अनुभव के आधार पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने बेहतरीन तरीके से मोर्चा संभाल कर रखा। सभापति तालिका में शामिल श्री कौशिक के साथ धर्मजीत सिंह, प्रबोध मिंज ने भी आसंदी संभाली। लगभग हर दिन प्रश्नकाल की जिम्मेदारी श्री कौशिक ने उठाई।
प्रश्नकाल ही ऐसा काल खंड होता है जब विधानसभा में आसंदी को प्रश्नकर्ता विधायकों और मंत्रियों के बीच सामंजस्य बनाने का कठिन काम करना होता है। इस बजट सत्र की विशेषता कह सकते हैं कि प्रश्नकाल में विपक्षी विधायकों की तुलना में सत्ता पक्ष के विधायकों ने अच्छे विषय उठाए और मंत्रियों से तीखे सवाल किए। पूर्व मंत्रियों अजय चंद्राकर, राजेश मूणत के साथ कुछ विधायकों ने अपने सवालों से मंत्रियों को परेशान किया और उन्हें जांच की घोषणा के लिए बाध्य किया। सांसद से विधायक बने सुनील सोनी ने भी राजधानी की समस्या, चाहे वह कानून व्यवस्था का मामला हो अथवा शिक्षा विभाग के मसले हों, बखूबी दस्तावेजों के साथ मंत्री से जवाब मांगा। जबकि विपक्ष इस बार केवल मुद्दे उठाने और बहिगर्मन, बहिष्कार तक सीमित रहा। कोई ऐसा काल खंड नहीं दिखा जब विपक्ष के सवालों के आगे मंत्री बेबस दिखाई दिया हो। हालांकि विपक्षी सदस्यों ने धान खरीदी में अनियमितता, अफीम की खेती जैसे कुछ विषय प्रभावी तरीक से उठाए, लेकिन विपक्ष का उद्देश्य बहिगर्मन तक सीमित रहा। कुछ स्थगन प्रस्ताव नामंजूर होने पर गर्भ गृह में जाने से विपक्षी विधायकों के निलंबन की परंपरा भी जारी रही। विपक्ष की ओर से पूर्व सीएम भूपेश बघेल अच्छे हमलावर के रूप में दिखे और विधायक उमेश पटेल ने अपने अनुभव के आधार पर मुद्दों को रखने का प्रयास किया।
विपक्ष से महिला विधायक चातुरी नंद ने बेहद अच्छे विषय उठाए और पूरी परिपक्वता के साथ अपनी बात रखी। उनके बात रखने के तरीके के कारण ही आसंदी को उन्हें बोलने के लिए पर्याप्त समय देना भी पड़ा। मंत्रियों में चाहें केदार कश्यप हों या गजेंद्र यादव, अपने- अपने विभागों के मामलों में फंसे दिखाई पड़े। जबकि उप मुख्यमंत्री अरुण साव बीते सत्र की तुलना में इस बार विधायकों से कम परेशान हुए। महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को अनुभव की कमी के कारण परेशानी हुई और उन्हें जवाब देने की कुशलता में उन्हें निखार लानी होगी।
सीएम का हमलावर रूप
विपक्ष ने इस बार अफसरों को भी निशाना बनाया। एक मौका ऐसा आया जब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के बीच दीर्घा खाली देख कर विपक्षी सदस्यों ने अफसरों की गैरहाजिरी पर जमकर निशाना साधा और कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। दूसरी ओर सदन के नेता सीएम विष्णु देव साय अपने विभाग की अनुदान मांगों की चर्चा का जवाब देते हुए पहली बार कांग्रेस पर बेहद आक्रामक नजर आए। यह भी संयोग था कि उस दिन कांग्रेस विधायकों ने कार्यवाही का बहिष्कार कर रखा था और यही कारण था कि सीएम ने बजट के जनहित विषयों पर अपनी बात रखने के साथ तत्कालीन कांग्रेस सरकार को निशाना बना दिया। उन्होंने आबकारी घोटाला, व्यापमं घोटाला सहित कांग्रेस कार्यकाल में किसी तरह का विकास नहीं होने का जिक्र किया। करीब ढाई साल पहले भाजपा ने जिन मुद्दों पर विधानसभा चुनाव जीता था, लगभग वे सारे मुद्दे एक बार फिर विधानसभा में गूंजे।
ओपी का संकल्प
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने लगातार तीसरा बजट पेश करते हुए भाजपा सरकार की थीम आधारित बजट का पालन किया। इससे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने अपने कार्यकाल में कृषि, महिला और युवा थीम पर बजट दिया था। चौधरी ने गति के बाद संकल्प का बजट पेश कर राज्य की दूरगामी विकास योजनाओं को फोकस में रखा। साथ ही डिजिटल बजट में हर सेक्टर के लिए तैयार प्लान को उन्होंने साझा किया। संभवतः इस सत्र में पेश उनका बजट भाषण अब तक का सबसे लंबा भाषण था।
रेणुका सिंह की चर्चा
विधानसभा के पूरे सत्र में भाजपा विधायक रेणुका सिंह गैरहाजिर रहीं। हालांकि उन्होंने अपनी गैरहाजिरी की सूचना विधानसभा को पहले ही दे दी थी। इसी सत्र में राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम चुनीं गईं। यह प्रक्रिया होली के दूसरे दिन हुई, इस कारण यह चुनाव भी विधायकों को हमेशा याद रहेगा।
