सप्तपर्णी और बेशरम पर उलझा रहा सदन: सप्तपर्णी के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने से पहले, विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों से लेंगे रिपोर्ट...
CG Vidhansabha Budget Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान सप्तपर्णी जिसे छातिम भी कहते हैं, कटाई को लेकर सदन उलझा रहा। राजधानी रायपुर में हजारों की संख्या में सप्तपर्णी का पेड़ लगा हुआ है, एक गंभीर सवाल आया है, छातिम जानलेवा है और आदमी के लिए घातक भी है। विधायक सुनील सोनी ने मंत्री से पूछा....

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रायपुर।20 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान सप्तपर्णी जिसे छातिम भी कहते हैं, कटाई को लेकर सदन उलझा रहा। राजधानी रायपुर में हजारों की संख्या में सप्तपर्णी का पेड़ लगा हुआ है, एक गंभीर सवाल आया है, छातिम जानलेवा है और आदमी के लिए घातक भी है। विधायक सुनील सोनी ने मंत्री से पूछा, लोगों की जानमाल की सुरक्षा के मद्देनजर सरकार इन पेड़ों की कटाई कराएगी क्या। इस सवाल पर उलझन की स्थिति बनी। मंत्री ने कहा, पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने से पहले वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों से रिपोर्ट मंगाएंगे। मंत्री ने कोनोकार्पस पर प्रदेश में बैन लगाने की सदन में घोषणा की।
विधायक सुनील सोनी ने मध्य प्रदेश,आंध्रप्रदेश व अन्य प्रांतीय सरकार के निर्णय का हवाला देते हुए मंत्री ओपी चौधरी से कहा, मेरा सवाल गंभीर और आम लोगों के स्वास्थ्य से सीधेतौर पर जुड़ा हुआ है। सप्तपर्णी के पेड़ों से अस्थमा व सांस की बीमारी और एलर्जी हो रही है। लगातार शिकायतें मिल रही है। छातिम के पेड़ काे स्वास्थ्य के नजरिए से बेहद हानिकारक माना गया है। विधाक ने कहा, एक पेड़ मां के नाम अभियान देशभर में चला, मध्य प्रदेश सरकार ने छातिम के जो पड़े लगे थे, तत्काल हटाने का आदेश जारी किया। जो पेड़ स्वास्थ्य को खराब कर रहे हैं उसे नहीं हटाएंगे क्या। विधायक सोनी ने बताया, छातिम के पेड़ जल स्रोत को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इसलिए ये गर्मी में भी हरा भरा दिखाई देता है।
विधायक सुनील सोनी के सवाल पर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा, छातिम के बारे में वैज्ञानिकों की ओर से अभी भी पुष्ट जानकारी नहीं आई है। इस संबंध में विभाग के अधिकारी यह बता पाने की स्थिति में नहीं है, छातिम कितना नुकसान दायक है। मंत्री ने कहा, कोनोकार्पस के बारे में जानकारी मिली है वह आम लोगों के लिए नुकसानदेह है। कोनोकार्पस को बैन करने का काम करेंगे। सप्तपर्णी के बारे में कहा, जो पेड़ लगे हैं और वृक्ष बन गए हैं उसे काटने से पहले वैज्ञानिकों की टीम से अध्ययन कराएंगे उसके बाद निर्णय लेंगे। भविष्य में सप्तपर्णी का पौधा ना रोपा जाए इस पर प्रतिबंध लगा देंगे।
मंत्री के जवाब के बाद पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सभापित से अनुरोध किया और कहा, विधायक सुनील सोनी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन का आदेश दीजिए, अगले सत्र में सदन में रिपोर्ट पेश हो जाएगी,इसके बाद सरकार आगे की कार्रवाई करे। विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा, हरा भरा वृक्ष जिंदा इंसान को ठूंठ बना देंगे। उसे कटवा दीजिए। इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा, ना मैं साइंटिस्ट हूं और ना ही सदस्य, वैज्ञानिकों की टीम बना देंगे, रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। इस बीच नेता प्रतिपक्ष डा चरण दास महंत ने मंत्री से कहा,बेशरम के झाड़ के बारे में जानते हैं। गांव में गरीब तबके के लोग चूल्हा जलाने में इसका उपयोग करते हैं। लोग बताते हैं,इसके धुंए से खतरनाक टीबी की बीमारी होती है। वैज्ञानिक जब सप्तपर्णी का अध्ययन करें तो बेशरम झाड़ का भी अध्ययन करा लें।
सुनील कुमार सोनी के सवाल
क्या यह सत्य है कि देश के विभिन्न राज्यों में सप्तपर्णी (छातिम) वृक्ष के स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को देखते हुए इनके रोपण पर रोक लगाई गई है? (ख) छ.ग. में पर्यावरण विभाग सप्तपर्णी (छातिम)) द्वारा स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को दृष्टिगत रखते हुए जनहित में इनके रोपण पर प्रतिबंध लगाने एवं पूर्व से रोपित किए गए सप्तपर्णी वृक्षों को हटाकर उन्हें अन्य स्थानीय वृक्षों से प्रतिस्थापित किया जाना प्रस्तावित है? पर्यावरण विभाग द्वारा छातिम के दुष्प्रभावों से जनमानस को बचाने हेतु क्या कार्ययोजना है?
वित्त मंत्री ओपी. चौधरी का लिखत जवाब
वन विभाग या पर्यावरण विभाग द्वारा रोक नहीं लगाई गई है। (ख) कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक से प्राप्त जानकारी अनुसार वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वर्तमान में अभी ऐसा कोई प्रस्ताव/कार्ययोजना नहीं है। पर्यावरण विभाग द्वारा सप्तपर्णी (छातिम) वृक्षों को हटाकर उन्हें अन्य स्थानीय वृक्षों से प्रतिस्थापित किया जाना प्रस्तावित नहीं है, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
जानिए सप्तपर्णी के बारे में
छातिम का वृक्ष, सप्तपर्णी एक लंबा, सदाबहार पेड़ है, जो अपनी घनी छाया और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। यह अक्टूबर में फूलता है और इससे निकलने वाली तेज गंध और परागकण के कारण यह एलर्जी, अस्थमा और सांस संबंधी समस्याओं का कारण बनता है। इसके जहरीले दूधिया रस के कारण इसे डेविल ट्री भी कहा जाता है।
ये है नुकसान
एलर्जी और अस्थमा- इसके फूलों से निकलने वाली तीखी गंध और परागकण सांस लेने में कठिनाई, अस्थमा, दमा और एलर्जी का कारण बनते हैं। जहरीला- इसके पत्ते और छाल से निकलने वाला दूधिया पदार्थ जहरीला होता है, जो मनुष्यों और पशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है। इन पेड़ों के कारण भूजल स्तर में गिरावट भी देखी गई है। स्वास्थ्य संबंधी नकारात्मक प्रभावों के कारण, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में इसके रोपण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
औषधीय गुण
आयुर्वेद में इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी छाल का उपयोग मलेरिया, दस्त, त्वचा रोगों और सांप के काटने के उपचार के रूप में किया जाता है। इसे त्वचा के संक्रमण और पेट की बीमारियों के इलाज में भी इस्तेमाल किया जाता है।
