CG Congress: बदल जाएगा कांग्रेस संगठन का नक्शा, इस जिले की सरहद में होगा बदलाव
CG Congress: छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जरिए प्रदेश के एक जिले के संगठन का नक्शा जल्द ही बदल जाएगा। करीब छह साल से लंबित प्रस्ताव पर जल्द ही मुहर लगने की संभावना है। इसके बाद इस जिले के शहरी और ग्रामीण इलाके की सरहद बदल जाएगी। प्रस्ताव छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के पास लंबित है।
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रायपुर। 28 फरवरी 2026|कांग्रेस में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आदेश पर निचले स्तर से ऊपर तक सृजन कार्यक्रम के तहत संगठनात्मक चुनाव लगभग समाप्त होने को है। जिलों में नए अध्यक्ष और कार्यकारिणी का गठन हो चुका है। अब केवल बूथ स्तर की कमेटियों के गठन की प्रक्रिया जिला अध्यक्षों के जरिए चल रही है। इसके अतिरिक्त कांग्रेस में पहली बार ग्राम पंचायतों में कांग्रेस पंचायत अध्यक्ष का चुनाव किया जाना है। इस पद पर नियुक्ति के लिए कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को अधिकार दे दिए गए हैं। उन्हें कहा गया है कि बूथ स्तर की कमेटी के साथ ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायत अध्यक्ष के मनोनयन का काम भी यथाशीघ्र समाप्त कर लिया जाए। जिला अध्यक्षों से भेजी गई सूची को ही छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस द्वारा अनुमोदित कर दिया जाएगा।
संगठनात्मक ढांचा खड़ा होने के बाद कांग्रेस अब जिलों की संगठन सीमाओं की भी समीक्षा करने जा रही है। ज्यादातर जिलों में नए प्रशासनिक जिलों के हिसाब से नए संगठन जिलों का गठन कर दिया गया है और उसी हिसाब से ताजा नियुक्तियां की गई हैं। इस समीक्षा के बीच बिलासपुर जिले का मामला सामने आया है, जो करीब पांच- छह वर्ष से लंबित है। बिलासपुर जिले में शहरी और ग्रामीण कांग्रेस के अधिकार क्षेत्र में विसंगति पायी गई है। इसके सुधारने के लिए जिले से प्रस्ताव भेजा जा चुका था, पर फैसला नहीं हो सका। फैसला अटकने के पीछे जिले की सियासत को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। आमतौर पर जिन जिलों में शहर और ग्रामीण कांग्रेस का गठन किया गया है, वहां पर शहरी व देहात इलाके स्पष्ट तौर पर विभाजित कर दिए गए हैं। बिलासपुर में यह काम नहीं हो सका है। इसके कारण शहर जिला अध्यक्ष को काम करने में दिक्कत आ रही है, वहीं ग्रामीण जिला अध्यक्ष को शहरी इलाकों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के वक्त यही विसंगति पार्टी प्रत्याशी के लिए चुनौती खड़ी कर देती है।
कट जाएंगे 35 शहरी वार्ड
बिलासपुर जिले में शहर कांग्रेस के पास नगर निगम के 70 वार्ड में से करीब आधे ही हैं। बाकी वार्ड ग्रामीण अध्यक्ष के पास चले गए हैं। इसका कारण यह है कि नगर निगम की सीमा 40 वार्ड से बढ़ा कर 70 कर दी गई थी, लेकिन कांग्रेस ने इसके हिसाब से संगठन जिले का पुनर्गठन नहीं किया। अभी देखा जाए तो केवल मस्तूरी और पचपेड़ी इलाके को ही ग्रामीण में रखा जा सकता है। बेलतरा विधानसभा के 15 वार्ड सहित करीब 35 वार्ड ग्रामीण अध्यक्ष से हटा कर शहर अध्यक्ष के हवाले कर दिए जाएंगे। अभी बिलासपुर शहर जिले में कांग्रेस के चार ही ब्लॉक हैं। पुनर्गठन के बाद दो ब्लॉक सकरी और तिफरा को शामिल किया जाएगा। जबकि कुछ ग्रामीण वार्ड कांग्रेस के पुराने ब्लॉक का हिस्सा बना दिया जाएगा। जाहिर है, इससे ब्लॉक की परिधि बढ़ेगी। इसके विपरीत ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष का कार्यभार हल्का हो जाएगा। अभी ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष को ग्राम पंचायतों को संभालना है, इस लिहाज से शहरी इलाकों को हटाना सही रहेगा। ग्रामीण इलाकों में पंचायत अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
पुराने अध्यक्ष की बेलतरा सीट में शहरी इलाके
चुनाव से पहले बिलासपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष की कमान विजय केशरवानी के पास थी। वे निगम के एक वार्ड से पार्षद भी रहे। बेलतरा विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उन्होंने किस्मत आजमाया था। उन्हें भाजपा के विधायक सुशांत शुक्ला ने हरा दिया। पार्टी नेताओं का मानना है कि केशरवानी खुद ही ग्रामीण व शहरी इलाके को ग्रामीण जिला अध्यक्ष के रूप में संभालते रहे, इस कारण उन्होंने कभी संगठन की सीमा बदलने पर जोर नहीं दिया। अब बेलतरा विधानसभा का करीब 15 वार्ड शहर अध्यक्ष के पास चला जाएगा।