CMO रहते पिता ने बनाया अनुभव प्रमाण पत्र और बेटे को बनाया था राजस्व अफसर, 13 साल की नौकरी के बाद हाई कोर्ट ने रद्द की नियुक्ति
Bilaspur High Court: रसूख और पद के दुरुपयोग का एक मामला छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट पहुंचा। प्रदेश के एक नगरपालिका में सीएमओ पिता ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए बेटे का अनुभव प्रमाण पत्र बनाया और राजस्व उप निरीक्षक के पद पर पदस्थ कर दिया। बेटा 12 साल से नौकरी कर रहा है। मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा तब कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करते हुए नए सिर से नियुक्ति करने और याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया है।
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बिलासपुर। 13 अप्रैल 2026| रसूख और पद के दुरुपयोग का एक मामला छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट पहुंचा। प्रदेश के एक नगरपालिका में सीएमओ पिता ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए बेटे का अनुभव प्रमाण पत्र बनाया और राजस्व उप निरीक्षक के पद पर पदस्थ कर दिया। बेटा 12 साल से नौकरी कर रहा है। मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा तब कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करते हुए नए सिर से नियुक्ति करने और याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया है। मामला भाटापारा नगर पालिका परिषद का है।
नगर पालिका परिषद भाटापारा, जिला बलौदा बाजार-भाटापारा ने 16 नवंबर 2012 को राजस्व उप निरीक्षक (अनारक्षित) पद हेतु विज्ञापन जारी किया था, जिसमें स्नातक एवं पीजीडीसीए अनिवार्य योग्यता तय की गई थी। भाटापारा निवासी देवेंद्र कुमार साहू ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित आवेदन प्रस्तुत किया। जब पात्र एवं अपात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी हुई, तो उनका नाम किसी भी सूची में शामिल नहीं किया गया।
नगर पालिका निगम भाटापारा ने 23 मार्च 2013 को नियुक्ति आदेश जारी कर सतीश सिंह चौहान की नियुक्ति कर दी। नगर पालिका भाटापारा के निर्णय को चुनौती देते हुए देवेंद्र साहू ने अधिवक्ता मतीन सिद्धीकी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका की सुनवाई जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ईशान सलूजा ने सिंगल बेंच को बताया, सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों से स्पष्ट है, याचिकाकर्ता का आवेदन विधिवत प्राप्त हुआ था, फिर भी उसे चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
CMO रहते पिता ने बनाया बेटे का अनुभव पत्र, नियमों की उड़ाई धज्जियां
अधिवक्ता सलूजा ने कहा, सतीश सिंह चौहान के पिता उस समय नगर पालिका परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी CMO के पद पर पदस्थ थे, जिससे चयन प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सतीश सिंह चौहान का अनुभव प्रमाण पत्र उनके पिता द्वारा ही जारी किया गया, जो प्रथम दृष्टया संदेहास्पद प्रतीत होता है।
हाई कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान दस्तावेजों के परीक्षण में कोर्ट ने पाया, याचिकाकर्ता का आवेदन उपलब्ध होने के बावजूद उसे पात्र/अपात्र सूची में शामिल नहीं करना गंभीर त्रुटि है। कोर्ट ने कहा, किसी अभ्यर्थी की उम्मीदवारी को इस प्रकार समाप्त करना पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित करता है। कोर्ट ने यह भी माना, प्रमुख पक्षकार सतीश सिंह के पक्ष में उसके पिता द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र चयन प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है और इससे मनमाना एवं पक्षपात की संभावना प्रबल है। हाई कोर्ट ने नियुक्ति आदेश को निरस्त कर नए सिरे से निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया पूरी करने व याचिकाकर्ता देवेंद्र कुमार साहू की उम्मीदवारी पर विधिवत विचार कर नया नियुक्ति आदेश जारी करने का निर्देश दिया है।