शर्मनाक! शिक्षा का बुरा हाल, शिक्षक हैं नहीं, स्वीपर के भरोसे चल रहा पूरा स्कूल
CG School News: छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर सरकारी स्कूलों का बुरा हाल है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के युक्तियुक्तकरण के दावे के बीच एक ऐसे स्कूल का सच सामने आया है, जो चौंकाने वाला है...
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सारंगढ़-बिलाईगढ़|13 अप्रैल 2026| एक्सक्लूसिव रिपोर्ट- सरसींवा के दूरस्थ जंगल क्षेत्र में स्थित एक सरकारी स्कूल इस वक्त बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा है। राज्य सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति के बाद भी इस स्कूल को कोई फायदा नहीं पहुंचा है। न तो स्कूल का युक्तियुक्तकरण हो सका और न ही स्कूल को शिक्षक मिल सका है। बिना शिक्षक के चल रहे इस स्कूल के बच्चों का भविष्य कैसा होगा, यह समझा जा सकता है। इन्हीं हालातों के बीच स्कूल के बच्चे परीक्षा तक दे रहे हैं और नतीजे वगैरह का तो भगवान ही मालिक है।
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार वन क्षेत्र के रनकोट की सरकारी प्राथमिक शाला प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार हो गई है। यहां कक्षा एक से पांच तक की कक्षाएं चल रही हैं और कुल 43 बच्चे पढ़ रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इन बच्चों को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं हैं।
ग्रामीणों ने किया सनसनीखेज खुलासा
ग्रामीणों ने जानकारी दी है कि रिकॉर्ड में यहां एक प्रधान पाठक पदस्थ बताया जा रहा है, जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है। यहां नियमित सहायक शिक्षक तो हैं ही नहीं, एक प्रधानपाठक ही बच्चों को पढ़ा रहे थे, मगर पक्षाघात के शिकार हो गए हैं। उनके बीमार होने के साथ ही पूरा स्कूल शिक्षकविहीन हो गया है। ऐसा नहीं है कि यहां शिक्षक देने की कोशिश नहीं हुई है। एक शिक्षक की पदस्थापना की गई थी, वह आए भी। इसके बाद गायब हो गए। एक और शिक्षक केवल 15 दिन आए, उसके बाद वे भी नहीं आ रहे हैं। चूंकि स्कूल में कोई शिक्षक नहीं है, इस कारण पूरे स्कूल की जिम्मेदारी स्वीपर तिलक नेताम पर आ गई है। स्कूल की देखरेख के साथ समय निकाल कर तिलक ही बच्चों के लिए शिक्षक का काम कर रहे हैं। जितना हो सकता है, वे बच्चों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
स्कूल भवन का भी बुरा हाल
प्राथमिक स्कूल में शिक्षक तो हैं ही नहीं, साथ ही भवन का बुरा हाल है। बारिश के मौसम में छत से लगातार पानी टपकता है। इससे बच्चों का बैठना मुश्किल हो जाता है। स्कूल परिसर में किचन शेड तक नहीं बना, इस कारण मजबूरी में रसोइया अपने घर से भोजन पका कर स्कूल जाता है। स्कूल का शौचालय इतना जर्जर हो गया है, कि उसका उपयोग नहीं हो रहा है। बच्चों को खुले मैदान में जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल की दशा सुधारने के लिए कलेक्टर को आवेदन दिया जा चुका है, मगर उसका कोई असर अब तक नहीं दिखा है।
बीईओ को पता नहीं, डीईओ ने जांच का विषय बता दिया
ग्रामीणों में स्कूल को लेकर काफी आक्रोश है। पूर्व उपसरपंच विद्याधर भोई ने मीडिया से कहा, यदि यहां शिक्षक की नियुक्ति नहीं की जा सकती तो बेहतर है, सरकार स्कूल को ही बंद कर दे। बीईओ एसएन साहू इस स्कूल की हालत से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। उनका जवाब यही मिला, अब तक स्कूल के बारे में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। जिला शिक्षा अधिकारी जेआर डहरिया ने इस मामले को जांच का विषय बता दिया है। जिले के कलेक्टर संजय कन्नौजे का जरुर कहना है, वे इसकी पूरी जानकारी मंगाएंगे।
शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में ये कहा था, सच्चाई कुछ अलग ही
राज्य सरकार की नीति के अनुरूप स्कूल में 43 बच्चों के लिए दो शिक्षक अवश्य होने चाहिए। जबकि यहां एक भी शिक्षक नहीं है और अब तक सरकार ने स्कूल की दशा सुधारने के लिए कोई पहल नहीं की है। विधानसभा में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब दिया था, कोई भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है, जबकि सच्चाई कुछ और सामने आ रही है।