CG News: करंट में भ्रष्टाचार: 9 एई ने बिजली कंपनी को लगा दिया 4 करोड़ का चूना, गैर BPL उपभोक्ताओं को बता दिया गरीब

CG News: छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी में भ्रष्टाचार का बड़ा खेला हो गया है। नौ सहायक अभियंताओं ने अपनी मर्जी से उपभोक्ताओं की श्रेणी बदल दी और इससे कंपनी को चार करोड़ 41 लाख रुपये की चपत लग गई है। इस बड़े खेल में बिजली कंपनी को तो नुकसान हुआ है, मगर इस खेल के बदले उपभोक्ताओं से वसूली से इनकार नहीं किया जा सकता।

Update: 2026-04-13 03:07 GMT

इमेज- इंटरनेट 

CG News: रायपुर। छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी मुख्यालय ने बड़ा बिजली घोटाला फोड़ दिया है। अधिकारियों ने ऑनलाइन सिस्टम का फायदा उठा कर गैरकानूनी तरीके से गैरबीपीएल उपभोक्ताओं को कंपनी की रियायत का लाभ दिला दिया है। जो लाभ बीपीएल उपभोक्ताओं को मिलता है, वही लाभ गैरबीपीएल उपभोक्ताओं को दिला दिया गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि 2758 गैरबीपीएल उपभोक्तओं को श्रेणी बदल कर बीपीएल श्रेणी का बिजली बिल भेज दिया गया। लगातार फायदे के बाद इन उपभोक्ताओं को फिर वापस गैरबीपीएल उपभोक्ता की श्रेणी में डाल दिया गया। साफ है, अधिकारियों की जानकारी में उपभोक्ताओं की मर्जी से श्रेणी बदली गई और भारी लाभ के बाद मूल श्रेणी में ला दिया गया। इसमें बड़ी रकम का लेन- देन होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

बिजली कंपनी के सूत्रों के अनुसार पूरा मामला बिलासपुर का है। इसकी शिकायत मुख्यालय आने के बाद दो वरिष्ठ अधिकारियों को भेज कर जांच कराई गई है। जांच रिपोर्ट भी मुख्यालय आ चुकी है, जिसमें भ्रष्टाचार की पूरी पुष्टि हो चुकी है। जबकि दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, केवल खानापूर्ति कर दोषियों को बचाने की कोशिश जारी है। दूसरी ओर उपभोक्ताओं को बकाया राशि बता कर दोबारा वसूली की प्रक्रिया की जा रही है। कायदे से अधिकारियों और उपभोक्ताओं पर एफआईआर भी होनी चाहिए।

जांच रिपोर्ट में यह सब

जांच रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि उपभोक्ता श्रेणी में छेड़छाड़ करने के लिए कुल 95 आईडी का उपयोग किया गया है। बताया गया है कि इस घोटाले की शिकायत बिजली कंपनी के अध्यक्ष और एमडी से लिखित में की गई थी, साथ ही दस्तावेजी प्रमाण भी दिए गए थे। इसके बाद रायपुर से दो अधिकारियों कार्यपालन निदेशक जेएस नेताम और अतिरिक्त मुख्य अभियंता वीआर मौर्या को जांच करने के लिए बिलासपुर भेजा गया। दोनों अफसरों ने जांच पूरी होने क बाद अपनी रिपोर्ट बिजली कंपनी को सौंप दी है। इसके बाद मुख्यालय ने बिलासपुर बिजली संभाग को पत्र भेज कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने को कहा है।

बड़ा स्कैम, सरकारी खजाने को चार करोड़ 41 लाख रुपये का नुकसान

सूत्रों ने बताया कि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट जिक्र है कि उन उपभोक्ताओं को बीपीएल श्रेणी में लाया गया, जो कभी इस सूची में थे ही नहीं। इतना ही नहीं, बीपीएल श्रेणी में लाने के बाद फिर उन्हें मूल श्रेणी में कर दिया गया, जिससे किसी को संदेह न हो। गैरबीपीएल उपभोक्ताओं को बीपीएल श्रेणी में डाल कर लंबे समय तक बीपीएल श्रेणी का बिजली बिल दिया जाता रहा। जांच कमेटी ने 49 पेज की रिपोर्ट तैयार करने के साथ ही सैकड़ों पेज का दस्तावेज भी संलग्न किया है, जिसमें भ्रष्टाचार की कहानी लिखी हुई है। इन दस्तावेजों से साबित हुआ है कि गैरबीपीएल उपभोक्ताओं को बीपीएल बता कर 80 हजार रुपये तक की छूट दी गई है। जांच टीम ने हिसाब लगाया तो पता चला कि चार करोड़ 41 लाख रुपये बिजली कंपनी के खाते में आने थे, इसका मतलब इतने का नुकसान हो चुका है।

इस तरह हुआ खेल

सहायक अभियंताओं के पास एक आईडी होती है, जिससे वे बिजली उपभोक्ताओं की श्रेणी या अन्य ब्यौरे में शिकायत या मांग के अनुरूप सुधार कर सकते हैं। इसी आईडी का लाभ उठा कर नौ सहायक अभियंताओं ने उपभोक्ताओं की श्रेणी बदल दी। जांच में कुछ उपभोक्ताओं के बीपी नंबर ऐसे मिले हैं, जिसकी श्रेणी बार- बार बदली गई है। बीपीएल श्रेणी में जाते ही उपभोक्ता के लिए बिजली सस्ती हो जाती है, क्योंकि सरकारी योजना के तहत एक सीमा तक छूट मिलती है और बाकी पर बिल भी कम बनता है। बीपीएल श्रेणी में आने वाले उपभोक्ताओं को गरीबी रेखा की सूची में होना अनिवार्य है। इसके बिना बीपीएल सूची में नाम नहीं जोड़ा जा सकता।

जानें, कहां पर कितना घोटाला

बिलासपुर में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट ने पूरी सूची बना दी है। इसमें बताया गया है कि सबसे ज्यादा नुकसान मुंगेली उपसंभाग में हुआ है, मुंगेली ग्रामीण में 819 उपभोक्ताओं को एक करोड़ 41 लाख 97,044 रुपये का सीधा लाभ दे दिया गयाहै। बिल्हा में 73 लाख 91,900 रुपये के बिजली बिल कम बनाए गए और इसके लिए 11 आईडी का उपयोग कर 516 उपभोक्ताओं को गैरकानूनी तरीके से लाभ पहुंचा दिया गया है। इसी तरह लोरमी में 57,76,053 रुपये का गलत लाभ 398 उपभोक्ताओं को दिया गया। वहां छह आईडी से यह खेल खेला गया। तिफरा जोन में 62 उपभोक्ताओं से 7 लाख 26981, खमतराई में 105 उपभोक्ताओं से 8 लाख 20933 रुपये का नुकसान हुआ है। जबकि सहायक अभियंता ग्रामीण में केवल एक आईडी से दो उपभोक्ताओं को 44,634 रुपये लाभ पहुंचा दिया गया है। मस्तूरी में चार उपभोक्ताओं को 39,831 रुपये, तिफरा में 169 उपभोक्ताओं को 15 लाख 92,599 रुपये, सकरी में 60 उपभोक्ताओं से दस लाख 4,014 रुपये, तखतपुर में 220 उपभोक्ताओं से 37 लाख 73,527 रुपये का नुकसान बिजली कंपनी को हुआ है। पथरिया उपसंीााग में 85 उपभोक्ताओं को 13 लाख 19,617 रुपये, पेंड्रारोड में 124 उपभोक्ताओं को आठ लाख 38,468 रुपये, करगीरोड कोटा में तीन उपभोक्ताओं को 37,765 और मरवाही में आठ उपभोक्ताओं को 48,460 रुपये का गैरकानूनी लाभ दिया गया है। इस पूरे खेल में सहायक अभियंताओं ने 95 बार आईडी का उपयोग किया है।

दोषियों को वेतनवृद्धि रोक कर जीवनदान

विभागीय सूत्रों ने बताया कि बिलासपुर में स्थानीय स्तर पर अब तक दोषियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। जांच रिपोर्ट नवंबर 2025 में ही दे दी गई थी, पर अब तक पूरा मामला गोपनीय बना कर रखा गया। पांच माह में नौ सहायक अभियंताओं को केवल नोटिस जारी कर जवाब मांगा गयाहै। साथ ही एक- एक वेतन वृद्धि रोकने की सिफारिश की गई है। इसकी पुष्टि कार्यपालन निदेशक एके अंबस्ट ने की है। सूत्रों ने बताया कि उपभोक्ताओं से बकाया वसूली कर बिजली कंपनी का हिसाब दुरुस्त करने की कवायद की जा रही है। संबंधित उपभोक्ताओं को बकाया का बिल भेजा जा रहा है।

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