तेजस्वी यादव ने बदला छात्र राजद का नाम, कैंपस राजनीति में पकड़ मजबूत करने की तैयारी, जानिए राजद नेता ने क्या कुछ कहा

Tejashwi Yadav News : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में हार के बाद राजद अपने छात्र संगठन को मजबूत करने में जुटा है। इसी क्रम में पार्टी ने छात्र संगठन का नाम और लोगो बदल दिया है।

Update: 2026-04-13 09:55 GMT

New Name Of Chhatra RJD: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की स्थापना के तीन दशक बाद पार्टी ने अपने छात्र संगठन में बड़ा बदलाव किया है। आज छात्र राजद का नाम बदला गया। राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने पार्टी कार्यालय में छात्र राजद के नए नाम की घोषणा की। नए लोगो का अनावरण किया। तेजस्वी यादव ने कहा कि हमने छात्र राजद (CRJD) को भंग कर दिया है। अपनी पार्टी के नए छात्र संगठन का नाम सोशलिस्ट स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SSAI) रखा है।

इस दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में जो मुख्यमंत्री बनेगा, उसके पास जनता का जनादेश नहीं होगा। बिहार की सरकार गुजरात से चलेगी। जदयू अब बीजेपी का संगठन बन चुकी है। आप देखेंगे कि दो महीने बाद कोई भी नीतीश कुमार की परवाह नहीं करेगा।

छात्र राजनीति में पकड़ मजबूत करना चाह रहा राजद

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा, जब राजद छात्र राजनीति में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहता है। राजद सुप्रीमो लालू यादव ने 6 मार्च को छात्र राजद की बिहार इकाई को भंग किया था। उसके बाद से छात्र राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नवल किशोर यादव नए नाम और लोगो को अंतिम रूप देने में जुटे हुए थे। कल लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने उस पर अंतिम मुहर लगा दी।

कैंपस में दबदबा बढ़ाने की कवायद

राजद की रणनीति बिल्कुल स्पष्ट है कि वह अन्य राजनीतिक दलों की तरह विश्वविद्यालय परिसरों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है। भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी, सीपीआई के एआईएसएफ, सीपीएम के एसएफआई, माले के आईसा की तरह राजद भी अपने छात्र संगठन को प्रभावी बनाना चाहता है। इसके माध्यम से पार्टी उत्तर प्रदेश, दिल्ली एवं अन्य हिंदी भाषी राज्यों में अपने संगठन का विस्तार करना चाहती है।

एमवाई समीकरण से आगे निकलने का प्रयास

राजद अब अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव(MY) वोट बैंक से आगे निकलकर अन्य वर्गों को भी जोड़ने की कोशिश में जुटा है। दल का मानना है कि छात्र संगठन के माध्यम से नए सामाजिक समूहों को जोड़ा जा सकता है। भविष्य के नए नेतृत्व को तैयार किया जा सकता है।

तेजप्रताप का असर खत्म

साल 2011 से लेकर 2025 तक छात्र राजद की कमान अनौपचारिक रूप से लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के हाथों में थी। इस दौरान छात्र संगठन में उनका वर्चस्व रहा। कोई हस्तक्षेप नहीं करता था। इस मुद्दे को लेकर उनकी तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से तनातनी हुई थी। 

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