Supreme Court News: स्टूडेंट्स की आत्म हत्या को सुप्रीम कोर्ट ने लिया गंभीरता से: देशभर के सेंट्रल यूनिवर्सिटी व उच्च शिक्षण संस्थानों का जारी किया ये निर्देश

Supreme Court News: उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत स्टूडेंट्स की आत्म हत्या के मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। देशभर के सेंट्रल यूनिवर्सिटी व उच्च शिक्षण संस्थाओं को इस संबंध में केंद्र सरकार को सीधे रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ये यह भी निर्देश दिया कि स्कॉलरशीप मिलने में विलंब के कारण किसी भी स्टूडेंट्स को क्लास या परीक्षा में बैठने से रोका नहीं जाना चहिए।

Update: 2026-01-17 10:11 GMT

Supreme Court News: दिल्ली। उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत स्टूडेंट्स की आत्म हत्या के मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। देशभर के सेंट्रल यूनिवर्सिटी व उच्च शिक्षण संस्थाओं को इस संबंध में केंद्र सरकार को सीधे रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ये यह भी निर्देश दिया कि स्कॉलरशीप मिलने में विलंब के कारण किसी भी स्टूडेंट्स को क्लास या परीक्षा में बैठने से रोका नहीं जाना चहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या की बढ़ती दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं पर गहरा दुख और चिंता जाहिर की है। इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रोकने के लिए अंतरिम निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को आत्महत्या की घटनाओं की रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि स्टूडेंट्स चाहे हॉस्टल में हो, पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन में हो या किसी ऑनलाइन स्टूडेंट्स के साथ हो और उन्हें 24 घंटे योग्य मेडिकल मदद मिलनी चाहिए।

शीर्ष अदालत से साफ कहा, स्कॉलरशीप में विलंब की वजह से स्टूडेंट़स फीस जमा नहीं कर पा रहा है तो ऐसी स्थिति में कोई भी संस्थान किसी स्टूडेंट्स को परीक्षा में बैठने से नहीं रोक सकता, या उसे क्लास में आने से मना नहीं कर सकता, या उसके दस्तावेज़ नहीं रोक सकता। कोर्ट ने सख्ती से निर्देश दिया कि सभी लंबित स्कॉलरशिप का भुगतान संबंधित केंद्र या राज्य अधिकारियों द्वारा चार महीने के भीतर किया जाना चाहिए।

IIT दिल्ली के दो स्टूडेंट्स के माता-पिता द्वारा दायर याचिका में दिए गए निर्देशों के अनुसार, जिन्होंने जाति-आधारित भेदभाव और शैक्षणिक दबाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। कोर्ट ने कहा, किसी संस्थान को कैंपस में आत्महत्या की घटना होने पर तुरंत और अनिवार्य रूप से पहली सूचना रिपोर्ट दर्ज करनी होगी।

प्रशासनिक पदों पर रिक्तियों को चार महीने के भीतर पूरा करें

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शैक्षणिक संस्थानों में रिक्त प्रशासनिक पदों को चार महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा, वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और अन्य प्रमुख संस्थागत, प्रशासनिक पदों की नियुक्तियां और रिक्तियों को भी चार महीने के अंदर भरा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, चूंकि रिटायरमेंट की तिथि काफी पहले से पता होती है, इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रियाएं काफी पहले शुरू की जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने साफ कहा, ऐसे पद एक महीने से ज़्यादा खाली न रहे। स

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