रेल सुरक्षा सिस्टम होगा मजबूत, रेलवे में यूएवी की उड़ान, भीड़ और सुरक्षा के लिए होगा ये काम..

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन बिलासपुर में भी अब यूएवी का उपयोग शुरू हो चुका है। पहले चरण में इसका उपयोग रायपुर रेल मंडल में शुरू हो चुका है।

Update: 2026-03-16 06:49 GMT

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बिलासपुर।15 मार्च 2026| देशभर में भारतीय रेल सुरक्षा के सिस्टम को लगातार मजबूत कर रहा है। इसे ध्यान में रख कर उत्तर रेलवे जोन ने सबसे पहले ड्रोन का उपयोग किया था। अब यह तकनीक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर पहुंच चुकी है। रेलवे ने पिछले साल ही सभी रेलवे जानों को यूएवी/ड्रोन का उपयोग अधिक से अधिक करने का आदेश दिया था। बजट में भी इसके लिए अतिरिक्त आवंटन किया गया है। तब से लगातार रेलवे जोनों में ड्रोन लाने और रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम चल रहा है।

रेल मंत्रालय ने सभी जोन के ट्रैक, पुलों और सुरक्षा की निगरानी के लिए यूएवी शुरू कर दिया है। चरणबद्ध तरीके से यह सभी जोनों में लागू हो रहा है। बाद में इसे प्लेटफार्म और स्टेशन की भीड़ की निगरानी के काम में भी लगाया जाएगा। अफसरों का मानना है कि इस तकनीक से दूरस्थ और जंगली इलाकों पर निगाह रखना आसान होगा और रेलवे प्रोजेक्ट की प्रगति की रिपोर्ट भी इसके जरिए ली जा सकेगी। बिलासपुर जोन के रायपुर रेल मण्डल में अभी ओएचई की निगरानी ड्रोन से करने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके बाद इससे पटरियों, यार्ड और स्टेशनों की चारों तरफ निगरानी का काम किया जाएगा। रेलवे मंत्रालय का कहना है कि यूएवी के जरिए निर्माण कार्य पर निगाह रख कर समयबद्धता से काम किया जा सकेगा। साथ ही सुरक्षा की गारंटी भी बढ़ सकेगी। संवेदनशील रेलवे जोन में पटरियों की सुरक्षा के लिए यूएवी के गश्त शुरू किए जाएंगे। इसी तरह जोन में नियमित रखरखाव को बेहतर कर तकनीकी दक्षता को मजबूत करने का प्रयास इस तकनीके के जरिए किया जाएगा। खास बात यह है कि सभी ड्रोन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस किया गया है, जिससे अधिक से अधिक नतीजा हासिल किया जा सके। इस काम के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

अत्याधुनिक ड्रोन तैनात

रायपुर मंडल में विद्युत (टीआरडी) विभाग द्वारा ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) संरचनाओं के निरीक्षण के लिए अत्याधुनिक ड्रोन तैनात कर दिया गया है। इस नई तकनीक के जरिए से ऊंचाई से ओएचई संरचनाओं, फिटिंग्स तथा अन्य विद्युत अवसंरचनाओं का विस्तृत और सूक्ष्म निरीक्षण किया जा रहा है। ड्रोन द्वारा ऐसे कई स्थानों की निगरानी संभव हो पा रही है, जहां पारंपरिक मैनुअल निरीक्षण कठिन होता है या जहां छोटे तकनीकी दोषों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण होता है। ड्रोन से प्राप्त उच्च-गुणवत्ता वाले चित्रों और वीडियो का विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स की मदद से तत्काल किया जा रहा है। इससे समस्याओं का समाधान भी तेजी से हो रहा है। समस्या की समय पर पहचान होने से बड़ी तकनीकी खराबियों या ब्रेकडाउन को रोकने में मदद मिलेगी।

आरपीएफ पहले से ड्रोन से लैस

आरपीएफ में रेल यार्ड, स्टेशन परिसर और रेलवे पटरियों के आसपास सुरक्षा निगरानी के लिए ड्रोन को तैनात कर दिया गया है। इस ड्रोन से सटीक समय में वीडियो स्ट्रीमिंग और हवाई निगरानी में मदद मिलती है। इससे भीड़ को मैनेज करने में विशेष रूप से सहायता मिल रही है। जानकारों का कहना है कि एक ड्रोन कैमरा इतने बड़े इलाके को कवर कर सकता है, जितने काम के लिए आरपीएफ को कम से कम 8- 10 जवानों की आवश्यकता पड़ती है। इस तरह मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

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