Travel Ban: जंग की दस्तक? 3 महीने से ज्यादा विदेश नहीं जा सकेंगे पुरुष, सरकार ने लागू किया नया नियम, सेना से लेनी होगी इजाजत, जानें क्या है वजह?
Germany Travel Ban: जर्मनी सरकार का बड़ा फैसला। 17 से 45 साल के पुरुषों के 3 महीने से ज्यादा विदेश जाने पर रोक। यात्रा से पहले जर्मन सेना 'बुंडेसवेहर' से लेनी होगी अनुमति। जानें पूरा मामला।
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नई दिल्ली 4 अप्रैल 2026। पश्चिम एशिया और यूरोप में बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव के बीच जर्मन सरकार ने एक बेहद चौंकाने वाला फैसला लिया है। अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने के मकसद से जर्मनी ने 17 से 45 साल के पुरुषों के देश छोड़ने पर पाबंदियां लगा दी हैं। 1 जनवरी 2026 से लागू हुए इस नए नियम के तहत इस आयु वर्ग के किसी भी पुरुष को 3 महीने से अधिक समय के लिए देश से बाहर जाने के लिए जर्मन सेना यानी 'बुंडेसवेहर' (Bundeswehr) से स्पेशल परमिशन लेनी होगी।
क्या है जर्मनी का नया ट्रेवल बैन नियम?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर जर्मनी का कोई पुरुष नागरिक 3 महीने से ज्यादा समय के लिए नौकरी, पढ़ाई या किसी दूसरी वजह से विदेश (Abroad) जाना चाहता है तो उसे अब बुंडेसवेहर के करियर सेंटर से मंजूरी (Clearance) लेना अनिवार्य होगा। पास्ट में यह सख्त नियम सिर्फ युद्ध (War) या राष्ट्रीय आपातकाल (Emergency) के दौरान ही लागू होता था लेकिन इसे अब नार्मल कंडीशंस में भी अनिवार्य कर दिया गया है।
आखिर क्यों पड़ी इस पाबंदी की जरूरत?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि नाटो (NATO) का प्रमुख सदस्य होने के नाते जर्मनी अपनी सुरक्षा नीति (Security Policy) को 'अलर्ट मोड' पर ला रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपनी सेना का विस्तार करना है। वर्तमान में जर्मन सेना में लगभग 1.84 लाख सैनिक हैं, जिसे साल 2035 तक बढ़ाकर 2.55 से 2.70 लाख तक करने की योजना है। इस नए नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जरूरत पड़ने पर योग्य युवाओं का डेटाबेस और उपलब्धता देश के पास रहे।
2008 के बाद जन्मे युवाओं के लिए अनिवार्य फॉर्म
सैन्य विस्तार योजना के तहत सिर्फ विदेश यात्रा पर ही रोक नहीं लगी है बल्कि नई जनरेशन को सेना से जोड़ने की भी तैयारी है। नए प्रावधानों के अनुसार 2008 या उसके बाद जन्मे सभी युवाओं को सेना में अपनी रुचि दर्शाने वाला एक फॉर्म भरना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि महिलाओं के लिए सेना में शामिल होना या फॉर्म भरना अभी भी स्वैच्छिक (Voluntary) रखा गया है।
नागरिक अधिकारों पर छिड़ी बहस
जर्मन सरकार के इस 'डिफेंस फर्स्ट' अप्रोच ने देश के भीतर एक नई बहस छेड़ दी है। कई मानवाधिकार एनालिस्ट का तर्क है कि सामान्य हालात में इस तरह का प्रतिबंध नागरिकों की स्वतंत्रता (Civil Liberties) का हनन है। हालांकि सरकार इसे यूरोप की बदलती सुरक्षा स्थितियों और राष्ट्रीय रक्षा के लिए एक जरूरी और एहतियाती कदम बता रही है।