CBSE Board Update: CBSE का 7 दिन का अल्टीमेटम, कक्षा 6 से पढ़नी होगी तीसरी भाषा, जानें क्या है R3 का नया नियम?

CBSE Class 6 Update: CBSE ने सेशन 2026-27 से कक्षा 6 के लिए तीसरी भाषा (R3) पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। NCFSE 2023 के तहत स्कूलों को यह नियम लागू करने के लिए मात्र 7 दिन का अल्टीमेटम मिला है।

Update: 2026-04-09 12:51 GMT

CBSE R3 Formula: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा (R3) पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। बोर्ड ने सभी एफिलिएटेड स्कूलों को इस नए नियम को लागू करने के लिए 7 दिन का सख्त अल्टीमेटम दिया है। नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCFSE 2023) के तहत लागू इस बड़े फैसले का सबसे बड़ा गोल बच्चों को शुरुआती उम्र से ही बहुभाषी (Multilingual) बनाना और उन्हें भाषाई दक्षता देना है।

7 दिन का अल्टीमेटम और OASIS पोर्टल अपडेट

CBSE ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि R3 रूल लागू करने में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन स्कूलों ने अब तक यह सिस्टम शुरू नहीं किया है उन्हें एक हफ्ते के भीतर अपनी कार्ययोजना क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) को भेजनी होगी। इसके साथ ही स्कूलों को OASIS पोर्टल पर भी अपने भाषा चयन का पूरा डेटा अपडेट करना अनिवार्य है। क्षेत्रीय अधिकारी खुद इस पूरी प्रोसेस की सख्त मॉनिटरिंग करेंगे।

बिना बुक्स के तुरंत शुरू करनी होगी पढ़ाई

नई व्यवस्था के तहत तीसरी भाषा की किताबों की उपलब्धता में थोड़ा समय लग सकता है। लेकिन बोर्ड ने कहा है कि स्कूलों को बुक्स का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। वे स्थानीय स्तर पर मौजूद स्टडी मटेरियल (Study Material) या NCFSE 2023 के मानकों वाली गाइड का इस्तेमाल करके तुरंत अपनी क्लासेज शुरू कर सकते हैं।

स्टूडेंट्स कौन सी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं?

R3 फॉर्मूले के तहत स्टूडेंट्स को अपनी मातृभाषा और अंग्रेजी के अलावा एक और भारतीय भाषा में माहिर बनाने का गोल सेट किया गया है। इसके लिए स्कूलों को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) में शामिल भाषाओं में से किसी एक को चुनना होगा। इन भाषाओं में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, पंजाबी और बंगाली प्रमुख रूप से शामिल हैं। यह पहल बच्चों को भारत की सांस्कृतिक विविधता से जोड़ने का काम करेगी।

कक्षा 9 और 10 के बोर्ड एग्जाम पर पड़ेगा असर

CBSE का यह नया तीसरी भाषा (R3) नियम सिर्फ छठी कक्षा तक लिमिट नहीं रहेगा बल्कि इसका सीधा असर सीनियर क्लासेज पर भी पड़ेगा। स्कूल आज 6th क्लास में जिस भाषा को शुरू करेंगे भविष्य में कक्षा 9 और 10 के स्टूडेंट्स के लिए वही भाषा मेन ऑप्शन के रूप में उपलब्ध होगी। इसलिए स्कूलों को लैंग्वेज सिलेक्शन में लॉन्ग टर्म प्लानिंग करनी होगी ताकि स्टूडेंट्स को आगे चलकर 9वीं क्लास में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।

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