National Human Rights Commission: इलाज में लापरवाही,आदिवासी महिला की मौत: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने परिजन को 5 लाख मुआवजा देने राज्य सरकार को दिया निर्देश....
National Human Rights Commission: उत्तर छत्तीसगढ़ में एक आदिवासी महिला की इलाज में लापरवाही से मौत को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने मृतक महिला के परिजन को बतौर क्षतिपूर्ति पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। आयोग ने राज्य सरकार को कुछ इस तरह की छूट भी दी है।
National Human Rights Commission: सरगुजा। उत्तर छत्तीसगढ़ में एक आदिवासी महिला की इलाज में लापरवाही से मौत को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने मृतक महिला के परिजन को बतौर क्षतिपूर्ति पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। मुआवजा राशि वितरण के बाद रिपोर्ट पेश करने कहा है। रिकवरी राशि के संबंध में आयोग ने राज्य शासन काे छूट दी है कि चाहे तो इलाज में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी व कर्मचारियों से राशि की वसूली कर सकते हैं। बता दें कि पार्षद आलोक दुबे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर मामले की जांच करने और दोषी अधिकारियों व स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शिकायतकर्ता पार्षद ने मृतक के परिजन को मुआवजा की मांग भी की थी।
आदिवासी महिला की मौत के मामले में प्रशासनिक स्तर पर की गई कार्रवाई से आयोग संतुष्ट नहीं हुआ। सरगुजा जिले का या पहला प्रकरण हैं जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने का आदेश दिया गया है।
क्या है मामला
28 जुलाई 2024 को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दरीपारा अंबिकापुर निवासी शांति मरावी की मौत हो गई थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। मृत्यु से दो दिन पहले से वे मरीज को परिजन अस्पताल लेकर आए थे। शराब पीने और गर्मी से महिला की तबीयत बिगड़ने की बात कहते हुए चिकित्सकों ने अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया था। तीसरी बार जब परिजन महिला को लेकर अस्पताल आए तो देर हो चुकी थी। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण महिला की मौत हो गई। अंबिकापुर नगर निगम के पार्षद आलोक दुबे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत करते हुए जांच कर दोषी अधिकारियों व स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करने व मृतक के परिजन को मुआवजा देने की मांग की थी।
पार्षद आलोक दुबे की शिकायत पर हुई सुनवाई, लापरवाही बरतने वाले अफसरों को लगाई फटकार
आलोक दुबे, निवासी अंबिकापुर, जिला सरगुजा, छत्तीसगढ़ ने 01 अगस्त 2024 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर आदिवासी महिला की इलाज में लापरवाही के चलते हुई मौत का मुद्दा उठाते हुए जांच की मांग की थी। शिकायतकर्ता आलोक दुबे ने लिखा था कि शांति मरावी, आयु 55 वर्ष, की मृत्यु 28 जुलाई 2024 को मेडिकल कॉलेज अस्पताल-अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही के कारण हुई। पीड़िता को गंभीर चिकित्सा स्थिति में भी उचित उपचार प्रदान नहीं किया गया। उनकी नाजुक स्थिति के बावजूद, डॉक्टरों ने उन्हें उचित उपचार दिए बिना दो बार घर भेज दिया।
आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट व एसपी से मांगी थी रिपोर्ट
शिकायत को संज्ञान में लेते हुए आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक, जिला सरगुजा, छत्तीसगढ़ से कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्दश दिया था। कलेक्टर और डीएम, सरगुजा, अंबिकापुर ने 15 जनवरी 2025 को रिपोर्ट प्रस्तुत की। आयोग ने अपने निर्णय में लिखा है कि रिपोर्ट से यह प्रतीत होता है कि मृतक शांति मरावी के उपचार के संबंध में लापरवाही बरतने के लिए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्स के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, जैसा कि सीएमओ, अंबिकापुर द्वारा 13 नवंबर 2024 को रिपोर्ट किया गया है।
आलोक ने मृतक के परिजन को मुआवजा देने की मांग की थी
आयोग ने रिपोर्ट की प्रति भेजी शिकायतकर्ता आलोक दुबे को भेजी और उनका जवाब मांगा। आयोग को शिकायतकर्ता से 31 अक्टूबर 2025 को उत्तर प्राप्त हुआ, जिसमें दोषी कर्मचारियों को दी गई सजा की प्रकृति के संबंध में गंभीर आपत्तियां उठाई गईं। आयोग ने शिकायतकर्ता के 31 अक्टूबर 2025 को प्राप्त उत्तर का अवलोकन किया। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि मृतका अनुसूचित जनजाति की महिला थीं, जिनकी मृत्यु सरकारी अस्पताल के चिकित्सा कर्मचारियों की लापरवाही के कारण हुई थी, आयोग इसे एक उपयुक्त मामला मानता है, जिसमें सरकार को मृतका के परिजनों को आर्थिक मुआवजा देना चाहिए।
मृतका के परिजन को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश
रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह शिकायत, उत्तर और मामले से संबंधित सभी दस्तावेजों की प्रति छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को अवलोकन और अभिलेख के लिए अग्रेषित करे। इसके अतिरिक्त, छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया जाता है कि वे मृतक पीड़ित के परिजनों को 5,00,000/- रुपये का मुआवजा अदा करे। भुगतान के प्रमाण की प्रति दो सप्ताह के भीतर आयोग को भेजें। सरकार दोषी संबंधित कर्मचारियों,अधिकारियों से भुगतान की गई राशि को रिकवरी करने के लिए स्वतंत्र होगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 24 जनवरी 2026 तक आदेश के परिपालन के संबंध में रिपोर्ट पेश करने कहा है।
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