शर्मनाक! 36 अस्पतालों ने मरीजों से मांगा नकद पैसा! 18 अस्पताल आयुष्मान से इलाज नहीं करने पर सरकार के राडार पर
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवा को सुधारने की कवायद सरकार लगातार कर रही है, वहीं निजी अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें आनी बंद नहीं हो रही हैं। प्रदेश के 36 निजी अस्पताल ऐसे हैं, जिन पर मरीजों अथवा परिजनों से इलाज के लिए नकद पैसा मांगने का आरोप लगा है। जबकि 18 अस्पताल आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं करने के आरोप से घिर गए हैं।
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रायपुर। 23 मार्च 2026| हाल की बात है...उर्मिला अस्पताल में मरीज की मौत को लेकर बड़ा हंगामा हुआ। आरोप था कि 17 लाख का बिल बनाया और आठ लाख नगद ले लिया। इसके बाद भी मरीज की मौत हो गई। मरीज के परिजनों ने शव ले जाने से इंकार करने पर डॉक्टर बिरादरी की चकरी चली और एक बड़ी जगह के फोन के बाद पुलिस हरकत में आई और उसके हस्तक्षेप के बाद लाश वहां से ले जाया गया। ये सिर्फ उर्मिला का नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ के धरती के भगवानों की यही कहानी है। किसी तरह मरीजों के परिजनों का जेब काट लो। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग ने 57 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की थी। उसे भी ले देकर रफा-दफा कर दिया गया।
आयुष्मान योजना के चलते ही छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में कुकुरमुत्ते जैसे अस्पताल खुल गए हैं। किराना दुकान चलाने वाला नॉन मेडिकल फील्ड के लोग भी इन दिनों छत्तीसगढ़ में अस्पताल चला रहे हैं। एक नेता ने दो-दो अस्पताल खोल लिया है। डॉक्टरों को ईमान-धरम से कोई मतलब नहीं, उन्हें सिर्फ पैसा चाहिए। इसलिए, ये भी नहीं देखते कि वे किसके यहां सर्विस देने जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के डॉक्टर पैसा के लिए कुछ भी कर सकते हैं। गांव-गांव में खुले अस्पतालों में इलाज के दौरान आए दिन मौतें हो रही हैं। पर कोई सुध लेने वाला नहीं। जिले में सीएमओ होता है। मगर उससे महीने में लिफाफा पहुंच जाए, इससे अधिक किसी बात से वास्ता नहीं होता। यही हाल शहरों के अस्पतालों का भी है।
राज्य सरकार ने आयुषमान कार्ड से इलाज करने के नियमों में सख्ती की है, ताकि अस्पतालों में गड़बड़ी न की जा सके। इसके नियम या शर्त का उल्लंघन करने पर इस योजना से अस्पताल को निलंबित करने अथवा पंजीयन ही निरस्त करने तक की कार्रवाई की जाती है। फिर भी निजी अस्पतालों से शिकायतें मिलने का सिलसिला जारी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कुछ मामले जांच में निराधार भी पाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार इलाज के नाम पर पैसे मांगने की शिकायतों की जांच की गई है, वहीं कुछ मामलों की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। राजधानी के नामी अस्पतालों का नाम भी इस शिकायत में शामिल है। एनएच एमएमआई नारायणा को पांच शिकायतों पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसकी जांच जारी है, जबकि एक शिकायत में आरोप साबित नहीं हो सका है। मेडिशइन अस्पताल को भी तीन शिकायतों पर कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया है, एक केस में मरीज का पैसा वापस दिलाया गया है और दो शिकायत जांच में प्रमाणित नहीं हो सकी। बाल गोपाल अस्पताल में एक मरीज का पैसा वापस करा दिया गया और एक शिकायत निराधार पायी गई है। एचएम मल्टी स्पेशियाल्टि अस्पताल, नवकार और वेदेही अस्पताल में तीन मरीजों की रकम वापस कराई गई है। बालको अस्पताल और कालडा बर्न एंड प्लास्टिक सेंटर में की गई जांच में शिकायत सही नहीं मिली है। जबकि श्री नारायणा अस्पताल के दो, एकता चिल्ड्रन अस्पताल, मेडिलाइफ, बीसीआर अस्पताल जोरा और श्रीनिवास अस्पताल के खिलाफ जांच जारी है। वात्सल्य अस्पताल के विरुद्ध की गई शिकायत सही नहीं मिली।
महासमुंद के सोहन अस्पताल में शिकायत सही मिलने पर एक वर्ष के लिए पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। जबकि दुर्ग के सुराज अस्पताल और धमतरी के नंदा अस्पताल में मरीज से ली गई रकम वापस कराई गई। महासमुंद के महानदी अस्पताल में एक शिकायत वापस ले ली गई है, जबकि दूसरी शिकायत की जांच जारी है। रिपोर्ट के अनुसार श्री कृष्णा अस्पताल राजनांदगांव, न्यू आयुष्मान अस्पताल बेमेतरा, एके मल्टीस्पेशियालिटी अस्पताल बेमेतरा, केएनएच अस्पताल कोंडागांव, डीएनए क्रिटिकल केयर राजनांदगांव और दयानिधि अस्पताल अंबिकापुर को चेतावनी पत्र जारी कर दिया गया है। मित्तल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस रायपुर और दयानिधि अस्पताल अंबिकापुर के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच जारी है। इसी तरह स्पर्श चिल्ड्रन अस्पताल राजनांदगांव, ग्लोबल स्टार अस्पताल रायपुर, श्री अरबिंदो मेडिकल रिसर्च सेंटर रायपुर, समदा सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल राजनांदगांव, जीवांश अस्पताल कटघोरा और बाजपेयी नर्सिंग होम बलौदाबाजार के विरुद्ध की गई शिकायत जांच में सिद्ध नहीं हो सकी।