Bilaspur High Court: ब्रेकिंग: पटवारी से RI पदोन्नति परीक्षा निरस्त: हाई कोर्ट ने पदोन्नति परीक्षा की प्रक्रिया को दूषित और कदाचरण के घेरे में पाया, सरकार को दी ये छूट....

Bilaspur High Court: हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पटवारी से आरआई राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति को निरस्त कर दिया है। 216 पटवारियों को आरआई के पद पर पदोन्नति दी गई थी। पदोन्नति के लिए आयोजित परीक्षा में बरती गई अनियमितता और अपनों को पर्दे के पीछे से आरआई बनाने के इस खेल का NPG.NEWS ने पर्दाफाश किया था। घोटाले को लेकर सिलसिलेवार खबरों का प्रकाशन किया था।

Update: 2026-01-02 13:13 GMT

Bilaspur High Court: बिलासपुर। हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पटवारी से आरआई राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति को निरस्त कर दिया है। 216 पटवारियों को आरआई के पद पर पदोन्नति दी गई थी। पदोन्नति के लिए आयोजित परीक्षा में बरती गई अनियमितता और अपनों को पर्दे के पीछे से आरआई बनाने के इस खेल का NPG.NEWS ने पर्दाफाश किया था। घोटाले को लेकर सिलसिलेवार खबरों का प्रकाशन किया था।

बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में पटवारी से राजस्व निरीक्षक के पद पर आयोजित पदोन्नति परीक्षा को निष्पक्षता के अभाव में निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और पक्षपात के संकेत मिलने की बात कही है। छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग से जुड़ी पदोन्नति प्रक्रिया पर हाई कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाने के साथ ही अपनाई गई प्रक्रिया पर कड़ी टिप्प्णी की है।

पटवारी से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित परीक्षा को हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद 216 पटवारियों को दी गई पदोन्नति स्वतः समाप्त हो जाएगी। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस एनके व्यास ने अपने फैसले में कहा है कि पदोन्नति परीक्षा प्रणाली दूषित थी और चयन प्रक्रिया पारदर्शी व निष्पक्ष नहीं थी। कोर्ट ने माना कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं, जिनसे परीक्षा की विश्वसनीयता और पवित्रता पर सवाल खड़े होते हैं।

कदाचरण और पक्षपात की संभावना से नहीं कर सकते इंकार

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद, कदाचरण और पक्षपात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि परीक्षा न तो समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित थी और न ही यह प्रशासनिक पदोन्नति के मानकों पर खरी उतरती है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राजस्व निरीक्षक का पद एक प्रोफेशनल और जिम्मेदारीपूर्ण पद है, जहां पारदर्शिता और योग्यता सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि पदोन्नति की प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में हो, तो ऐसे चयन को वैध नहीं माना जा सकता।

प्रक्रिया ही दूषित, ट्रेनिंग पर ना भेजने का निर्देश

कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि जब पदोन्नति परीक्षा ही कदाचरण के घेरे में है और दूषित है तब पटवारी से पदोन्नति प्राप्त राजस्व निरीक्षकों को प्रशिक्षण पर भेजने का प्रश्न ही नहीं उठता।

नई परीक्षा कराने की छूट

हाई कोर्ट ने राज्य शासन को छूट दी है कि वह पटवारी से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए नई परीक्षा आयोजित कर सकता है। कोर्ट ने साफ कहा कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी किसी भी चयन प्रक्रिया में परीक्षा की पवित्रता और निष्पक्षता से कोई समझौता न हो। योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिले और किसी भी प्रकार का पक्षपात या अनुचित लाभ न दिया जाए।

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