Bilaspur High Court:नाबालिग अपराधी की जमानत याचिका खारिज, हाई कोर्ट ने कहा- जमानत पर छूटा तो अपराधियों के संपर्क में आने की आशंका..

Bilaspur High Court: हाई कोर्ट के हत्या के प्रयास के आरोप में बाल संरक्षण गृह में अफसरों की अभिरक्षा में रहने वाले नाबालिग अपराधी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है...

Update: 2026-02-11 11:38 GMT

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

11February 2026|बिलासपुर। हाई कोर्ट के हत्या के प्रयास के आरोप में बाल संरक्षण गृह में अफसरों की अभिरक्षा में रहने वाले नाबालिग अपराधी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने आशंका जताई है, अभिरक्षा से बाहर आते ही वह अपराधियों के संपर्क में आएगा, परिवार भी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त है, इन सभी परिस्थितियों का आंकलन करते हुए जमानत देने से इंकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर के पचपेड़ी थाना क्षेत्र का मामला है। 26 नवंबर 2025 की रात करीब 8 बजे शराब को लेकर हुए विवाद में आरोपी कमल कुमार महिलंगे, राकेश और जयेश के साथ मिलकर नाबालिग ने पीड़ित और उसके दोस्तों पर जानलेवा हमला कर दिया था। आरोप है कि जब पीड़ित को बचाने उसके दोस्त राजेंद्र और फूलचंद आगे आए तो नाबालिग ने राजेंद्र के पेट में चाकू घोंप दिया और फूलचंद के सीने पर वार कर जान लेने की कोशिश की।

पुलिस ने इस मामले में BNS की विभित्र धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर नाबालिग को 27 नवंबर को बाल संरक्षण गृह भेज दिया था। बाल संप्रेक्षण में रहने के दौरान नाबालिग ने निचली अदालत में जमानत के लिए आवेदन पेश किया था। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने जमानत आवेदन को खारिज कर दिया था। निचली अदालत से जमानत आवेदन खारिज होने के बाद हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता ने बताया, घटना में प्रयुक्त चाकू नाबालिग से बरामद किया गया है। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि नाबालिग के पिता कमल कुमार के खिलाफ पहले से ही अवैध शराब के मामले दर्ज है। आरोप है कि पिता आरोपी नाबालिग सहित अपने पांचों बेटों के साथ मिलकर शराब का अवैध कारोबार चलाता है और अपराध में बच्चों का इस्तेमाल करता है।

नाबालिग के भविष्य के लिए यह फैसला जरुरी

जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत और किशोर न्याय बोर्ड के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 12 के तहत जमानत देना सामान्य नियम है, लेकिन यदि बच्चे की रिहाई उसे अपराधियों के संपर्क में लाती है या न्याय के उद्देश्यों को विफल करती है तो जमानत रोकी जा सकती है। प्रोबेशन अफसर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, नाबालिग को उचित मार्गदर्शन की कमी है और वह असामाजिक तत्वों के संपर्क में है। ऐसे में उसे संरक्षण गृह में रखना ही उसके व्यवहार और भविष्य के लिए सकारात्मक होगा।

Tags:    

Similar News