Liquer Scam, Supreme Court News: अनिल टूटेजा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, एफआईआर पर रोक की मांग को किया खारिज, हाई कोर्ट जाने की दी सलाह...

Liquer Scam, Supreme Court News: छत्तीसगढ़ के पूर्व आईएएस अनिल टूटेजा को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। नए मामले में एफआईआर पर रोक की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पूर्व आईएएस को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है।

Update: 2026-03-10 15:26 GMT

Liquer Scam, Supreme Court News: दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व आईएएस अनिल टूटेजा को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। नए मामले में एफआईआर पर रोक की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पूर्व आईएएस को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है।

छत्तीसगढ़ में 2000 करोड़ के शराब घोटाले में जांच का सामना कर रहे पूर्व IAS अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शराब घोटाले सहित अन्य मामलों में जांच का सामना कर रहे पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ भविष्य में किसी भी नए मामले में FIR दर्ज करने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। पूर्व आईएएस टूटेजा की याचिका पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, किसी भी जांच एजेंसी को जांच के लिए पहले से रोक लगाने का आदेश नहीं दे सकते। डिवीजन बेंच ने कहा, यदि किसी व्यक्ति की भूमिका किसी मामले में सामने आती है तो संबंधित जांच एजेंसियों को जांच और कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये कहा, याचिकाकर्ता को दी ये छूट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कोर्ट यह निर्देश नहीं दे सकता, भविष्य में किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई नया केस दर्ज ही न हो। यह जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र का विषय है। डिवीजन बेंच ने यह भी कहा, यदि याचिकाकर्ता को किसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका है तो वे संबंधित अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

पढ़िए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने क्या कहा?

याचिकाकर्ता पूर्व आईएएस की ओर से पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट शोएब आलम ने दलील दी, वे बीते तकरीबन 20 महीनों से जेल में हैं। जैसे ही किसी मामले में उन्हें जमानत मिलती है, किसी दूसरे केस में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है।

उनका आरोप था कि जांच एजेंसियां एक पैटर्न के तहत यह कार्रवाई कर रही हैं, जिससे उन्हें लगातार जेल में रखा जा सके।

सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने डिवीजन बेंच को बताया कि संभावित गिरफ्तारी को आधार बनाकर सभी एजेंसियों को नए केस दर्ज करने से रोकना संभव नहीं है।

याचिकाकर्ता को दी हाई कोर्ट जाने की सलाह, हाई कोर्ट को दिया ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पूर्व आईएएस को सलाह दी कि जिन मामलों में उन्हें गिरफ्तारी की आशंका है, उनमें वे छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा, इस तरह की याचिकाओं पर 2 से 4 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।

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