छत्तीसगढ़ में बड़ी कंपनियों के डायरेक्टर भी खा रहे सरकारी राशन, पढ़िये क्या है मामला

CG News: छत्तीसगढ़ में सरकारी राशन कार्ड के सत्यापन की प्रक्रिया अब भी चल रही है। इस जांच से पता चल रहा है कि हजारों की संख्या में अपात्र परिवार के सदस्य सरकारी राशन खरीद रहे हैं। जांच कर रहे अफसरों ने बताया कि बड़ी कंपनियों के डायरेक्टरों के नाम तक आ रहे हैं, जो सरकारी राशन कार्ड से अनाज ले रहे हैं। जबकि पात्र आय सीमा से अधिक वाले परिवारों की संख्या हजारों में आ रही है।

Update: 2026-03-10 13:32 GMT

रायपुर।10 मार्च 2026| राज्य सरकार ने केवल पात्र परिवारों को ही राशन कार्ड का लाभ देने के उद्देश्य से प्रदेशभर में राशन कार्ड के सत्यापन की मुहिम छेड़ दी है। जिले वार अफसरों को लगातार यह काम करने को कहा गया है। राशन कार्ड के सत्यापन के बाद हजारों की संख्या में राशन कार्ड निरस्त होने का अनुमान है। अभी तक 70 हजार से अधिक राशन कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं। अंतिम रिपोर्ट में इसका आंकड़ा बढ़ सकता है।

जांच में यह खुलासा हो रहा है कि बड़ी कंपनियों के भागीदार और 25-30 लाख सालाना आय वाले परिवारों के नाम से भी राशन कार्ड बन गया है। इसमें से ज्यादातर राशन कार्ड से अनाज का उठाव भी दिख रहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि अमीर आदमी भी सरकारी राशन खाकर डकार रहा है। खाद्य विभाग के अफसरों ने आधार नंबर और दस्तावेजों की जांच शुरू की है। इसका सत्यापन करने पर चौंकाने वाली सूचना आ रही है और ऐसे राशन कार्ड को तत्काल ही सूची से हटाया जा रहा है। नियम यह है कि राशन कार्ड में दर्ज एक भी नाम यदि अपात्र की श्रेणी में आ गया तो फिर उस पूरे परिवार को सरकारी राशन का लाभ नहीं मिलेगा। प्रदेश में 65 हजार से अधिक ऐसे नाम सामने आ गए हैं, जिनकी सालाना आय छह लाख रुपये से अधिक है। करीब छह हजार नाम कंपनियों के डायरेक्टर के रूप में दर्ज पाए गए हैं, जिनका मिलान आधार लिंकिंग से किया गया है। इस तरह अलग- अलग मापदंड पर हजारों की संख्या में राशन कार्ड अपात्र लोगों को मिलना पाया जा रहा है। ऐसे परिवारों की सरकारी अनाज की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से रोकी जा रही है। बिलासपुर जिले की भी जानकारी अब सामने आयी है। उससे पता चला है कि अब तक एक हजार से अधिक अपात्र परिवारों की तलाश की जा चुकी है, जो राशन कार्ड से सरकारी अनाज खरीद कर ले जा रहे हैं। इसके अलावा राशन कार्ड में दर्ज नामों का भी मिलान किया जा रहा है, क्योंकि कहीं- कहीं पर एक ही परिवार में दो- दो राशन कार्ड बनावा लिया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक अपात्र नामों को हटा दिया जाए, जिससे पात्र और जरुरतमंद परिवारों की मदद की जा सके।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि प्रदेशभर में डुप्लीकेट राशन कार्ड के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे संदिग्ध राशन कार्ड की बारीकी से जांच की जा रही है। अकेले बिलासपुर में ढाई हजार से अधिक राशन कार्ड को संदेह के दायरे में रखा गया है। देश के अन्य राज्यों में दर्ज नामों से भी मिलान कर सत्यापित करने की कोशिश की जा रही है। इससे वे मामले सामने आ जाएंगे, जो एक से अधिक राज्य में राशन कार्ड बना कर सरकारी राशन खा रहे हैं।

रायपुर सबसे आगे

सूत्रों ने बताया कि रायपुर में एक साल के भीतर जांच में 19 हजार से अधिक फर्जी और संदिग्ध राशनकार्ड धारी पकड़े जा चुके हैं। इनमें से ज्यादातर के डुप्लीकेट होने का संदेह है। इसके बाद दुर्ग में 18 हजार के करीब मामले सामने आए हैं। तीसरे नंबर पर जांजगीर चांपा और राजनांदगांव जिले हैं, जहां 17 हजार से अधिक प्रकरण जांच कर पकड़े जा चुके हैं। कोरबा में 16 हजार राशन कार्ड को डुप्लीकेट मान कर जांच की गई है। आदिवासी इलाके जशपुर तक में 9 हजार और गरियाबंद, कांकेर, बेमेतरा और बालोद में 7-8 हजार केस की जांच की गई है।

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