IAS अभिषेक प्रकाश बने सामान्य प्रशासन के सचिव, 5% की रिश्वत लेने के आरोप में हुए थे सस्पेंड, जानिए क्या है पूरी कहानी

IAS Abhishek Prakash Story: आईएएस अभिषेक प्रकाश की स्टोरी फिल्म से कम नहीं है. 'इन्वेस्ट यूपी' के सीईओ रहने के दौरान उनपर सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले 5% कमीशन मांगने का आरोप लगा. जिस वजह से निलंबित भी हो गए वहीँ अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से राहत मिलने के बाद वापस पोस्टिंग मिली है. तो चलिए जानते हैं आईएएस अभिषेक प्रकाश हैं..

Update: 2026-03-16 05:21 GMT

इमेज- इंटरनेट 

16 मार्च 2026, उत्तरप्रदेश के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के चर्चित अधिकारी अभिषेक प्रकाश का निलंबन आखिरकार खत्म हुआ और उनकी फिर से वापसी हो गयी है. साथ ही आईएएस अभिषेक प्रकाश को बड़ी जिम्मेदारी दी गयी है. उन्हें सामान्य प्रशासन का सचिव बनाया गया है. इस सम्बन्ध में नियुक्ति विभाग ने आदेश जारी किया है. 

आईएएस अभिषेक प्रकाश की स्टोरी फिल्म से कम नहीं है. 'इन्वेस्ट यूपी' के सीईओ रहने के दौरान उनपर सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले 5% कमीशन मांगने का आरोप लगा. जिस वजह से निलंबित भी हो गए वहीँ अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से राहत मिलने के बाद वापस पोस्टिंग मिली है. तो चलिए जानते हैं आईएएस अभिषेक प्रकाश हैं..

कौन है आईएएस अभिषेक प्रकाश

नाम: अभिषेक प्रकाश (Abhishek Prakash)

जन्म: 21 दिसंबर 1982, बिहार

शिक्षा: आईआईटी रुड़की से बीटेक, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और पब्लिक पॉलिसी में एमए

बैच: 2006 बैच, यूपी कैडर

पूर्व पद: इन्वेस्ट यूपी के पूर्व सीईओ

कैसे शुरू हुआ आईएएस का सफर

आईएएस अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के अधिकारी हैं. वो बिहार के रहने वाले हैं उनका जन्म 21 दिसंबर 1982 में हुआ था. उन्होंने आईआईटी रुड़की से बीटेक की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और पब्लिक पॉलिसी में एमए किया. उन्होंने 2005 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की. जिसमे उन्होंने ऑल इंडिया आठवीं रैंक हासिल की थी. अभिषेक प्रकाश को उत्तरप्रदेश कैडर मिला.

आईएएस किन किन पदों पर रहे

उत्तरप्रदेश ने उन्होंने कई बड़ी जिम्मेदारी संभाली है. साल 2011-12 में लखीमपुर खीरी जिले में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट रह चुके हैं. वो लखनऊ, हमीरपुर, बरेली और अलीगढ़ जिले में डीएम और कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. वित्त विभाग और स्वास्थ्य विभाग में विशेष सचिव भी रह चुके हैं. 2020 से 25 जुलाई 2021 तक लखनऊ डीएम के साथ ही एलडीए वीसी की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.

आईएएस अभिषेक प्रकाश सस्पेंड क्यों हुए थे

2006 बैच के आईएएस अभिषेक प्रकाश वर्तमान में सचिव औद्योगिक विकास विभाग व इन्वेस्ट यूपी के CEO की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. एक उद्यमी ने सोलर इंडस्ट्री लगाने के लिए इन्वेस्ट यूपी में आवेदन किया था. इसके लिए उनसे एक निकांत जैन नामक बिचौलिए द्वारा उद्यमी से कमीशन मांगा गया.

इसके बाद 20 मार्च को SAEL Solar P6 प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से विश्वजीत दत्ता शिकायत की. शिकायतकर्ता ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश में सोलर सेल, सोलर पैनल व सोलर प्लांट के पुर्जे बनाने की फैक्ट्री लगाना चाहते हैं. इसके लिए इन्वेस्ट यूपी के ऑफिस और ऑनलाइन प्रार्थना पत्र भेजा गया था. इसके संबंध में मूल्यांकन समिति की बैठक हुई थी. इस दौरान इन्वेस्ट यूपी के वरिष्ट अधिकारी ने एक प्राइवेट व्यक्ति निकांत जैन का नंबर दिया. अधिकारी ने कहा अगर जैन जी कहेंगे तो एम्पावर्ड कमेटी और कैबिनेट से तुरंत अनुमोदित हो जाएगा.

आईएएस पर क्या आरोप था 

जब निकांत जैन से बात की गयी तो निकांत जैन ने पूरे मामले के लिए 5% कमिशन की मांग की. इसके लिए हमने मना कर दिया. मगर 5% कमिशन नहीं देने के कारण कमेटी की संस्तुति के बावजूद पत्रावली में प्रकरण टाल दिया गया. कंपनी ने कमीशन नहीं दिया तो 12 मार्च 2025 को हुई बैठक में मूल्यांकन समिति ने कंपनी को Letter of Comfort की संस्तुति भी कर दी, लेकिन अभिषेक प्रकाश ने इसे को Reevaluate करने के लिए कह दिया.

शिकायतकर्ता ने कार्रवाई की मांग की. इस शिकायत का संज्ञान लेकर सीएम योगी ने कार्रवाई की. इस मामले की जांच की गयी और जांच के बाद सचिव औद्योगिक विकास विभाग व इन्वेस्ट यूपी के सीईओ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश सस्पेंड कर दिया और इसके साथ ही कमीशन मांगने वाले निकांत जैन को भी गिरफ्तार किया. साथ ही STF से जांच कराई गयी.

हाईकोर्ट में रद्द हुई केस  

आईएएस अभिषेक प्रकाश को घूसखोरी के आरोप में 20 मार्च 2025 को सस्पेंड किया गया था. इस मामले में बिचौलिए बाबू निकांत जैन ने आईएएस अभिषेक पर आरोप लगाए थे. गिरफ्तारी के खिलाफ निकांत जैन ने लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका लगाई. जिसपर 10 फरवरी को लखनऊ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान बिजनेसमेन अपने बयान से पलट गया. उसने कहा- गलतफहमी में शिकायत दर्ज कराइ. जिसके बाद केस को रद्द कर दिया गया है. अब वापस उनकी बहाली भी हो गयी है. हालांकि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी. 

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