VIDEO : अब गार्गल कर पता लगा सकेंगे कोरोना है या नहीं…..बेहद सरल तकनीक को किया गया इजाद…. ICMR ने टेस्ट को दी मंजूरी
मुंबई 29 मई 2021। कोरोना महामारी के बढ़ते मामले के बीच कोरोना जांच की एक नया ‘सलाइन गार्गल आरटी-पीसीआर ‘ तरीका पेश किया गया है। इससे तीन घंटे में कोरोना संक्रमण की जांच का पता लगाया जा सकेगा। इस मेथड को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) से मंजूरी मिल गई है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के तहत नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) के वैज्ञानिकों ने अपने में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है।
#United2fightCorona@CSIR_NEERI has developed ‘Saline Gargle #RTPCR Method’ for testing #COVID19 samples; you can get the result within 3 hours
Watch Dr. Krishna Khairnar, Senior Scientist, Environmental Virology Cell, NEERI explaining how to use👇@IndiaDST@CSIR_IND pic.twitter.com/mxpYTlt7lC
— PIB in Maharashtra 🇮🇳 (@PIBMumbai) May 28, 2021
देशभर के लैब में ट्रेनिंग देगी टीम
आईसीएमआर ने NEERI को अपनी टीमों को देश भर में लैब को नई पद्धति में ट्रेनिंग देने के लिए भेजने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। मेथड के अनुसार, एक रोगी को खारा घोल से गरारे करने के बाद एक सामान्य कलेक्शन ट्यूब में थूकने की आवश्यकता होती है। कलेक्शन ट्यूब में यह सैंपल तब एक लैब में ले जाया जाता है। वहां इसे कमरे के तापमान पर नीरी की तरफ से तैयार एक विशेष बफर सॉल्यूशन में रखा जाता है। जब इस सॉल्यूशन को गर्म किया जाता है तो एक आरएनए टेम्पलेट तैयार होता है। सॉल्यूशन को आगे रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) के लिए प्रोसेस्ड किया जाता है।
सैंपल कलेक्ट करना और प्रोसेस करना आसान
नीरी के पर्यावरण वायरोलॉजी सेल के सीनियर साइंटिस्ट डॉ कृष्णा खैरनार ने कहा कि इस नए तरीके से सैंपल कलेक्ट करने और प्रोसेस्ड करना काफी सस्ता पड़ता है। लोग खुद से भी कोरोना संक्रमण का टेस्ट कर सकते हैं क्योंकि यह विधि सेल्फ सैंपलिंग की अनुमति देती है। इसके लिए कलेक्शन सेंटर पर लाइन में लगने या भीड़ लगाने की जरूरत नहीं होती है। इस प्रकार बहुत समय की बचत होती है। साथ ही इससे संक्रमण का खतरा कम होता है। यहां तक कि इस पद्धति में कचरा भी कम से कम होता है।