Supreme Court: पश्चिम बंगाल में SIR की डेडलाइन बढ़ाने सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ECI को दिया ये निर्देश, कोर्ट की दो टूक...

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR की डेडलाइन बढ़ाने का चुनाव आयोग को निर्देश जारी किया है।

Update: 2026-02-09 14:04 GMT

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दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR की डेडलाइन बढ़ाने का चुनाव आयोग को निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश जारी किया, ECI को SIR ड्यूटी के लिए ग्रुप बी के अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं, जो ECI द्वारा तैनात माइक्रो-ऑब्जर्वर की जगह ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, दावा-आपत्ति पर अंतिम आदेश इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर ERO ही पारित कर सकते हैं, माइक्रो-ऑब्जर्वर केवल उनकी मदद कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी को SIR अधिकारियों के खिलाफ धमकियों और हिंसा को रोकने में विफलता के संबंध में ECI द्वारा उठाए गए चिंताओं पर जवाब देने के लिए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद दस्तावेजों और आपत्तियों की जांच की समय सीमा को 14 फरवरी, अंतिम सूची के प्रकाशन की निर्धारित तारीख से कम से कम एक सप्ताह के लिए बढ़ाने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान, पश्चिम बंगाल राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि लगभग 8500 ग्रुप B अधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई, जो सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी के रूप में काम कर सकते हैं।

ECI की ओर से सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि इनमें से ज़्यादातर अधिकारियों को अर्ध-न्यायिक आदेश पारित करने का अनुभव नहीं है। राज्य का दावा है कि उन्हें चुनाव ड्यूटी का अनुभव है, लेकिन SIR ड्यूटी के लिए, अधिकारियों को दावों और आपत्तियों पर आदेश पारित करने होते हैं। इन अधिकारियों को SIR ड्यूटी के लिए नियुक्त करने से पहले प्रशिक्षित करने की ज़रूरत है। यह देखते हुए कि अंतिम सूची के प्रकाशन की आखिरी तारीख 14 फरवरी है, उन्होंने राज्य की सूची से अधिकारियों को नियुक्त करने की व्यावहारिकता पर संदेह व्यक्त किया।

ममता बनर्जी की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि माइक्रो-ऑब्ज़र्वर को एक "अतिरिक्त-कानूनी भूमिका" दी गई, जिन्हें ECI ने अन्य राज्यों और केंद्रीय PSU से नियुक्त किया। दीवान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ERO को आदेश पारित करने के लिए अंतिम अथॉरिटी होना चाहिए। नायडू ने ज़ोर देकर कहा कि यह कोई मुद्दा नहीं है, क्योंकि आदेश ERO द्वारा ही पारित किए जाते हैं। सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा कि गुमनाम लोगों द्वारा "आपत्तियों का पुलिंदा" दायर किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सुनवाई के समय आपत्ति करने वालों की उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सीनियर एडवोकेट वी गिरि सनातन संघ द्वारा दायर एक PIL में पेश हुए और तर्क दिया कि राज्य ECI के साथ असहयोगी था। ECI अधिकारियों के खिलाफ हिंसा हुई थी। ECI ने इस याचिका में एक हलफनामा दायर किया, जिसमें कहा गया कि उसे राज्य में दुश्मनी और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अनुरोध किया कि अदालत को ECI के हलफनामे में "चौंकाने वाले विवरण" का संज्ञान लेना चाहिए और उचित आदेश पारित करना चाहिए।0 पीठ ने जारी किया ये दिशा निर्देश

0 राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि सभी 8550 ग्रुप B अधिकारी, जिनकी सूची आज सौंपी गई, कल शाम 5 बजे तक जिला कलेक्टर, ERO को ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करें। ECI को मौजूदा ERO,AERO को बदलने और अब उनकी सेवा में रखे गए अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग करने का विवेक होगा, बशर्ते वे उपयुक्त हों।

0 8500 की सूची में से ECI, उनके बायो-डेटा और कार्य अनुभव की जांच करने के बाद पूर्व में कार्यरत माइक्रो-ऑब्जर्वर की संख्या के बराबर इन अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट कर सकता है।

0 माइक्रो-ऑब्जर्वर को पहले से सौंपी गई जिम्मेदारी केवल DEO/ERO की सहायता करना होगा। दावा-आपत्ति के संबंध में अंतिम निर्णय केवल ERO द्वारा ही लिया जाएगा।

0 प्रभावित लोगों द्वारा जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स की जांच प्रक्रिया में ज़्यादा समय लगने की संभावना है। जैसा कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुझाव दिया, लिहाजा DEO/ERO को 14 फरवरी के बाद डॉक्यूमेंट्स की जांच पूरी करने और उचित फैसला लेने के लिए कम से कम एक हफ़्ते का और समय दिया जाए।

0 पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए बयानों पर उनके व्यक्तिगत हलफनामे के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब देने का निर्देश दिया है।

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