जनहित याचिका, पीरियड्स लीव कानून: सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया सुनवाई से इंकार, कहा- कानून बना तो महिलाओं....

Supreme Court News: देशभर में मेंस्ट्रुअल लीव को लेकर पॉलिसी बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पीआईएल की सुनवाई से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कुछ इस तरह की टिप्पणी की और फिर सुनवाई से इंकार कर दिया।

Update: 2026-03-14 04:18 GMT

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

दिल्ली। देशभर में मेंस्ट्रुअल लीव के लिए पॉलिसी बनाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। दायर याचिका में पीरिएड्स लीव को लेकर कानून बनाने की मांग की गई थी। जनहित याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कानून बनाकर पीरिएड्स लीव को अनिवार्य किया तो सीधेतौर पर इसका नुकसान महिलाओं को होगा। लोग महिलाओं को नौकरी देने से हिचकेंगे। अदालत ने कहा, ज्यूडिशियल सर्विस में भी सामान्य मामलों की जिम्मेदारी नहीं मिल पाएगी। लीव को लेकर कानून बनाने का मतलब महिलाओं के करियर को खतरे में डालना होगा। इससे उनके करियर को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर विचार का निर्देश दिया। बेंच ने कहा, याचिका का उद्देश्य भले महिलाओं के कल्याण से जुड़ा हो, पर नौकरी के बाजार के व्यावहारिक हालात विपरीत असर पैदा कर सकते हैं। याचिकाकर्ता ने कर्नाटक सरकार व कुछ निजी संस्थानों में पीरियड्स लीव नीति का जिक्र किया। सीजेआई ने कहा, कोई स्वेच्छा से सुविधा दे रहा है तो अच्छी बात है। जस्टिस बागची ने कहा कि मानव संसाधन जितना कम आकर्षक होगा, उसकी भर्ती की संभावना कम होगी।

ऐसे में क्या नियोक्ता अन्य लिंगों की प्रतिस्पर्धा के बीच इसे सहज रूप से स्वीकार करेंगे? शैलेंद्रमणि त्रिपाठी ने जनहित याचिका दायर कर पीरिएड्स लीव के लिए कानून बनाने की मांग की थी। बता दें, पीरिएड्स लीव के लिए कानून बनाने की मांग करते हुए यह यह उनकी तीसरी याचिका थी। इसके पहले त्रिपाठी 2023 और 2024 में याचिकाएं दायर कर चुके हैं। उन पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। शुक्रवार को कोर्ट ने कहा, 'ये याचिकाएं योजनाबद्ध तरीके से दायर की जा रही हैं। इससे युवा महिलाओं में धारणा बनती है कि उनके साथ कोई प्राकृतिक समस्या है और वे पुरुषों के बराबर काम नहीं कर सकतीं। बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता ने महिलाओं के हित में जो करना था, वह कर चुके हैं। उन्हें बार-बार अदालत आने की जरूरत नहीं है।

ये जानना भी जरुरी

बिहार में पीरिएड्स लीव की सुविधा 1992 से

बिहार में सरकारी महिला कर्मियों को हर महीने 2 दिन पीरियड्स लीव मिलती है। 1992 से यह नीति लागू है।

कर्नाटक में हर महीने एक दिन की छुट्टी मिलती है। कर्नाटक में सरकारी व निजी दोनों क्षेत्रों में पीरियड लीव को अनिवार्य कर दिया गया है।

ओडिशा में सरकारी महिला कर्मियों को हर महीने एक दिन छुट्टी मिलती है।

केरल ने 2023 में उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्राओं को हर महीने अवकाश की सुविधा दी जा रही है।

Tags:    

Similar News