मालदा घटना पर SC सख्त: HC के चीफ जस्टिस का फोन क्यों नहीं उठाया? माफी मांगें, मुख्य सचिव को कड़ी लगाई फटकार, बंगाल पुलिस से छीनी जांच, अब NIA करेगी पूछताछ
Supreme Court Malda Case: पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त। जांच NIA को सौंपी गई। चीफ सेक्रेटरी को माफी मांगने का आदेश।
West Bengal News: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हुए हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी घटना की जांच राज्य पुलिस से छीनकर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन कॉल इग्नोर करने पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाते हुए माफी मांगने का आदेश दिया है।
चीफ सेक्रेटरी को फोन न उठाने पर फटकार
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव ने घटना वाले दिन 1 अप्रैल को कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन नहीं उठाया। अदालत ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही और जिला प्रशासन की बड़ी विफलता करार देते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से बिना शर्त माफी मांगें।
पश्चिम बंगाल पुलिस पर भरोसा नहीं, NIA करेगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकार आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए मालदा घटना से जुड़े सभी मामलों की जांच एनआईए को सौंप दी है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी 26 आरोपियों से अब एनआईए की टीम पूछताछ करेगी। अदालत ने पश्चिम बंगाल पुलिस को आदेश दिया है कि वे इस केस से जुड़े सभी दस्तावेज तुरंत एनआईए को हैंडओवर करें।
नौकरशाही में हावी हो रही राजनीति
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने राज्य की नौकरशाही पर तीखी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल प्रशासन की विश्वसनीयता लगातार कमजोर हो रही है और राजनीति अब सीधे सचिवालय व सरकारी दफ्तरों में घुसपैठ कर रही है। अदालत ने इस घटना को पूरी तरह से पूर्व नियोजित और प्रेरित बताया, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया था।
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और न्यायाधिकरण को निर्देश
दरअस मालदा में 60 लाख से अधिक मतदाताओं की आपत्तियों और दावों का निपटारा करने के लिए एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड से करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब राज्य में मतदाता सूची अपडेट करने के लिए एक दिन की समयसीमा तय कर दी है। इसके साथ ही एसआईआर न्यायाधिकरणों को आदेश दिया है कि वे पूरी दस्तावेजी प्रक्रिया को फिर से देखें और सभी पक्षकारों को निष्पक्ष सुनवाई का मौका दें ताकि किसी भी तरह का शक बाकी न रहे।