कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला, कहा-
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कर्मचारियों को राहत देने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, सीधी भर्ती वाले कर्मचारियों की वरिष्ठता की गिनती नियुक्ति तिथि से मानी जाएगी, प्रोबेशन पूरा होने के बाद नहीं। पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का विस्तारित आदेश।
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दिल्ली।13 मार्च 2026| सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कर्मचारियों को राहत देने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, सीधी भर्ती वाले कर्मचारियों की वरिष्ठता की गिनती नियुक्ति तिथि से मानी जाएगी, प्रोबेशन पूरा होने के बाद नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, तमिलनाडु बिजली बोर्ड TNEB में सीधी भर्ती से नियुक्त असिस्टेंट इंजीनियरों की वरिष्ठता उनकी शुरुआती नियुक्ति की तिथि से गिनी जानी चाहिए। इस फैसले के साथ ही जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच के फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें कर्मचारी की वरिष्ठता प्रोबेशन पूरा होने के बाद सेवा में शामिल होने की तारीख से गणना करने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, सीधी भर्ती वाले कर्मचारियों की वरिष्ठता उसके शामिल होने की पहली तिथि से गिनी जाएगी, जिसके बाद उसे ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। इसके लिए अवधि का कोई महत्व नहीं है। यह समय-समय पर बदल सकती है।" यह विवाद तमिलनाडु बिजली बोर्ड में 2000-2002 के आसपास असिस्टेंट इंजीनियर के पदों पर भर्ती से जुड़ा था। सीधी भर्ती वाले उम्मीदवारों का चयन दिसंबर, 2000 और मार्च, 2001 में हुआ था, जबकि बोर्ड में पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को बाद में 2002 में आंतरिक चयन के माध्यम से पदोन्नत किया गया।
नियुक्ति के समय सीधी भर्ती वालों को असिस्टेंट इंजीनियर (ट्रेनी) के रूप में नामित किया गया और उन्हें नियमित वेतनमान में प्रोबेशन पर रखे जाने से पहले ट्रेनिंग की अवधि पूरी करना आवश्यक था। इस बीच, आंतरिक उम्मीदवारों ने बोर्ड द्वारा शुरू की गई भर्ती की शर्तों को चुनौती दी, जिससे उनकी अपनी चयन प्रक्रिया में देरी हुई। आंतरिक रूप से चयनित उम्मीदवारों ने तर्क दिया कि सीधी भर्ती वालों को ट्रेनिंग पूरी करने और प्रोबेशन शुरू करने के बाद ही कैडर का हिस्सा माना जा सकता है। इस तर्क के आधार पर उन्होंने सभी उम्मीदवारों को 2002 से एक ही वरिष्ठता ब्लॉक में रखने की मांग की।
मामले की सुनवाई के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज किया और सीधी भर्ती वालों की सीनियरिटी को उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से ही सही ठहराया। हालांकि, डिवीज़न बेंच ने उस फैसले को पलट दिया और बोर्ड को सीनियरिटी सूची फिर से बनाने का निर्देश दिया था। डिवीजन बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने वरिष्ठता निर्धारित करते समय शुरुआती नियुक्ति की तारीख को बाहर करके गलती की थी।
कोर्ट ने आगे कहा कि प्रोबेशन पूरा होने के बाद शामिल होने की तारीख से सीनियरिटी की गणना करने से अनिश्चितता पैदा होगी, क्योंकि अलग-अलग उम्मीदवार अलग-अलग तिथियों पर प्रोबेशन पूरा करके शामिल हो सकते हैं।
कोर्ट ने टिप्पणी की, “चूंकि चयन के बाद दो साल की प्रोबेशन (परिवीक्षा) अवधि का प्रावधान किया गया। इसलिए अलग-अलग उम्मीदवार जॉइन करने के लिए तय समय के दौरान, अलग-अलग तारीखों पर जॉइन कर सकते हैं। उन्हें जिस प्रोबेशन अवधि से गुज़रना होगा, वह उनके ड्यूटी जॉइन करने की तारीख से दो साल की ही रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, वरिष्ठता की गणना शुरुआती नियुक्ति की तिथि से की जाएगी, यानी उस तारीख से जब उम्मीदवार को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सेवा नियम), 1967 का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रोबेशन शुरू होने की तिथि से सीनियरिटी तय नहीं होती है।