Supreme Court News: कर्मचारियों के लिए राहत वाली खबर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, EPF वेतन सीमा के दायरे में बदलाव पर विचार जरुरी....
Supreme Court News: एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, EPF वेतन सीमा के दायरे में बदलाव पर विचार करना जरुरी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस पर निर्णय लेने की बात कही। इसके लिए चार महीने की डेडलाइन सुप्रीम कोर्ट ने तय कर दी है।
Supreme Court News: दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार अगर सकारात्मक निर्णय लेती है कि देशभर के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत वाली खबर होगी। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, EPF वेतन सीमा के दायरे में बदलाव पर विचार करना जरुरी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस पर निर्णय लेने की बात कही। इसके लिए चार महीने की डेडलाइन सुप्रीम कोर्ट ने तय कर दी है।
नवीन प्रकाश नौटियाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कर्मचारी भविष्य निधि योाजना EPFO के तहत वेतन सीमा के दायरे में दबलाव की मांग की है। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस महत्वपूर्ण मसले पर चार महीने के भीतर निर्णय लेने की बात कही है। डिवीजन बेंच ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों और की गई मांगों व शिकायतों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार को गंभीरता के साथ विचार करने की जरुरत है।
इसलिए दायर की जनहित याचिका
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बताया कि EPFO ने बीते 11 सालों से वेतन सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है। याचिका के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा तय न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये प्रति महीने की वेतन सीमा लिमिट से ज़्यादा था। इसके चलते अधिकांश श्रमिक EPFO योजना के तहत मिलने वाले कल्याणकारी लाभों से वंचित हो गए हैं।
याचिका के अनुसार EPFO, कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का संचालन करता है। वर्तमान में उन कर्मियों को कवरेज से बाहर रखता है, जिनका वेतन प्रति महीने 15,000 रुपये से ज़्यादा है। EPFO की कवरेज बढ़ाने और संबंधित मुकदमों के प्रबंधन पर उप-समिति' ने 2022 में एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें कवरेज की सीमा कम करने, वेतन सीमा बढ़ाने और सभी कर्मचारियों को वेतन सीमा तक EPF सदस्य के रूप में नामांकित करने की सिफारिश की गई थी।
इन सिफारिशों को जुलाई 2022 में केंद्रीय बोर्ड EPF द्वारा मंज़ूरी दी गई, लेकिन केंद्र सरकार के पास फाइल विचार के लिए लंबित हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बताया कि पिछले कुछ सालों में वेतन सीमा की लिमिट में हुए बदलावों का एनालिसिस करने पर पता चलेगा कि यह सिस्टम शुरुआती 30 सालों में एक समावेशी फ्रेमवर्क से पिछले 3 दशकों में एक एक्सक्लूसिव फ्रेमवर्क में बदल गया।
ये बदलाव इनमें से किसी भी मेट्रिक के हिसाब से लगातार नहीं थे
. केंद्र सरकार के कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन, इनकम टैक्स छूट की सीमा, प्रति व्यक्ति नेट नेशनल इनकम में सालाना ग्रोथ रेट, न्यूनतम मजदूरी व सालाना महंगाई दर।