Dharma Swatantrya Bill 2026: धर्मांतरण कर की शादी... तो पैदा हुए बच्चे का धर्म क्या होगा? सरकार के नए कानून में बड़ा खुलासा
Maharashtra Anti Conversion Bill: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने पेश किया 'धर्म स्वातंत्र्य बिल 2026'। अवैध धर्मांतरण वाली शादी से पैदा बच्चा मानेगा मां का धर्म। चमत्कार और प्रलोभन पर 10 साल की जेल।
फोटो: AI जेनरेटेड
Maharashtra Anti Conversion Law: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने राज्य विधानसभा में 'धर्म स्वातंत्र्य बिल 2026' पेश कर दिया है। इस नए कानून के तहत लालच, धोखाधड़ी या दबाव से कराए गए धर्मांतरण को अब बेहद गंभीर अपराध माना जाएगा। इस बिल का सबसे अहम और चर्चा वाला नियम यह है कि गैर-कानूनी धर्मांतरण से हुई शादी से पैदा होने वाला बच्चा अपनी मां के मूल धर्म का ही माना जाएगा।
अवैध धर्मांतरण वाली शादी और बच्चे की धार्मिक पहचान
महाराष्ट्र सरकार के इस नए बिल में एक ऐसा सख्त प्रावधान किया गया है जो इसे अन्य राज्यों के कानूनों से बिल्कुल अलग बनाता है। अगर किसी कपल ने गैर-कानूनी तरीके से धर्म बदलकर शादी की है तो उस रिश्ते से पैदा होने वाले बच्चे की धार्मिक पहचान पूरी तरह से उसकी मां के आधार पर तय होगी। कानून के मुताबिक ऐसा बच्चा उसी धर्म का माना जाएगा जिसका पालन उसकी मां शादी से पहले करती थी। हरियाणा जैसे कुछ राज्य ऐसे बच्चों के विरासत अधिकारों को मान्यता देते हैं लेकिन महाराष्ट्र का यह नया बिल स्पष्ट रूप से बच्चे के धर्म को मां के मूल धर्म से जोड़कर एक नई कानूनी लकीर खींचता है।
नौकरी का लालच पड़ा भारी तो 10 साल की जेल
देवेंद्र फडणवीस सरकार ने इस बिल में प्रलोभन और जबरन धर्मांतरण की परिभाषा को बहुत डिटेल और सख्त कर दिया है। अब पैसा, मुफ्त शिक्षा, नौकरी, शादी का वादा और यहां तक कि चमत्कारी इलाज के दावों को भी लालच की कैटेगरी में रखा गया है। इसके अलावा सामाजिक बहिष्कार का डर या दैवीय अप्रसन्नता का साइकोलॉजिकल दबाव डालना भी अपराध माना जाएगा। सजा के तौर पर सामान्य मामलों में 3 से 7 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है। अगर मामला महिलाओं, नाबालिगों या अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़ा है तो सजा सीधे 10 साल तक हो सकती है।
धर्म बदलने से 60 दिन पहले डीएम को नोटिस अनिवार्य
नए एडमिनिस्ट्रेटिव ढांचे के तहत अपनी मर्जी से धर्मांतरण करने वालों या ऐसा कराने वाली संस्थाओं के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। अब धर्म बदलने से ठीक 60 दिन पहले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट यानी डीएम को लिखित नोटिस देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बाद एक आधिकारिक घोषणा पत्र भी जमा करना होगा। इस नियम को तोड़ने पर 7 साल की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। अगर यही गलती दोबारा की गई तो सजा 10 साल और जुर्माना 7 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा। अगर यह साबित होता है कि विवाह सिर्फ धर्मांतरण के इरादे से किया गया था तो कोर्ट उसे तुरंत अवैध घोषित कर सकती है और यह साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी संस्था पर होगी।
एंटी-कनवर्जन कानून लागू करने वाला 10वां राज्य बनेगा महाराष्ट्र
विधानसभा से इस बिल के पास होते ही महाराष्ट्र देश का 10वां ऐसा राज्य बन जाएगा जहां धर्म परिवर्तन को रेगुलेट करने वाला सख्त कानून लागू है। इससे पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, हरियाणा, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सरकारें ऐसे कानून लागू कर चुकी हैं। स्टेट गवर्नमेंट का मानना है कि महाराष्ट्र का यह प्रस्तावित विधेयक अन्य राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस और क्लियर प्रावधानों वाला है क्योंकि इसमें 'चमत्कारी इलाज' जैसी लूपहोल्स को भी पूरी तरह से कवर कर लिया गया है।