Supreme Court News: कर्मचारियों की खबर: कांट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, पढ़िए फैसला...

Supreme Court: कांटैक्ट कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। एक कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा...

Update: 2026-02-02 09:14 GMT

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Supreme Court News: दिल्ली। कांटैक्ट कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। एक कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, स्वीकृत पद पर लंबे समय से काम कर रहे कांट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति देने के लिए सरकार मना नहीं कर सकती।

भोलानाथ की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राज्य सरकार कांट्रैक्ट कर्मचारियों को सिर्फ इस आधार पर नियमित नियुक्ति देने से इंकार नहीं कर सकती, उसे कांट्रैक्ट आधार पर नियुक्ति दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिन कर्मचारियों को उनके काम के आधार पर लगातार सेवावृद्धि मिलती रही है, ऐसे कर्मचारी नियमितिकरण की मांग कर सकते हैं। वे इस तरह की मांग करने के हकदार हैं। डिवीजन बेंच ने कहा कि राज्य सरकार ने चयन प्रक्रिया के बाद एक दशक से भी अधिक समय से स्वीकृत पदों पर याचिकाकओं की सेवा का लाभ लिया है। संतोषजनक कामकाज के आधार पर उनको सेवावृद्धि भी दी जाती रही है। राज्य सरकर स्पष्ट फैसले के अभाव में औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट क्लॉज का सहारा लेकर अचानक ऐसी नियुक्ति को खत्म नहीं कर सकती। ऐसा कदम साफ तौर पर मनमाना है साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत जांच में खरा नहीं उतरता है। सुप्रीम कोर्ट ने उन कांट्रैक्ट कर्मचारियों की याचिका को स्वीकार कर लिया है जिनका कार्यकाल 10 साल के लिए बढ़ाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कांट्रैक्ट कर्मचारियों को एक दशक से अधिक समय तक स्वीकृत खाली पदों पर बिना किसी ठोस कारण के जारी रखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को याचिकाकर्ताओं के नियमितिकरण का आदेश दिया है।

यह है मामला

याचिकाकर्ताओं को 2012 में राज्य के भूमि संरक्षण निदेशालय में 22 स्वीकृत पदों के मुकाबले जूनियर इंजीनियर (कृषि) के रूप में सार्वजनिक विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के बाद कांट्रैक्ट आधार पर नियुक्त किया गया। प्रारंभ में एक साल के लिए नियुक्ति दी गई। अच्छे कामकाज के आधार पर इंजीनियरों को 10 साल से अधिक समय तक बार-बार सेवावृद्धि दी गई। 2023 में राज्य सरकार ने मौजूदा सेवावृद्धि को आखिरी घोषित कर दिया और उनकी सेवाएं खत्म कर दी। राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए इंजीनियरों ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट के फैसले को इंजीनियरों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इंजीनियरों की याचिका को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के इस निर्णय पर टिप्पणी करते हुए कहा, राज्य को अपने कर्मचारियों का शोषण करने या उनकी कमज़ोरी, लाचारी या असमान मोलभाव की स्थिति का फायदा उठाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि केवल कांट्रैक्ट के आधार पर बिना कोई ठोस कारण बताए या कोई आदेश पारित किए, इतनी लंबी सेवा को अचानक बंद करना स्पष्ट रूप से मनमाना है और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

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