OBC क्रीमी लेयर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा: पिता और मां की सैलेरी से ही क्रीमी लेयर का नहीं किया जा सकता निर्धारण, यह मापदंड गलत..

Supreme Court: अन्य पिछड़ा वर्ग OBC क्रीमी लेयर के निर्धारण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, क्रीमी लेयर का निर्धारण करते वक्त सिर्फ माता-पिता की सैलेरी को ही मापदंड नहीं बनाया जा सकता। पद और उनके सामाजिक-प्रशासनिक दर्जे को भी ध्यान में रखना भी जरुरी है। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत दी है।

Update: 2026-03-13 07:47 GMT

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दिल्ली। 13 मार्च 2026|अन्य पिछड़ा वर्ग OBC क्रीमी लेयर के निर्धारण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, क्रीमी लेयर का निर्धारण करते वक्त सिर्फ माता-पिता की सैलेरी को ही मापदंड नहीं बनाया जा सकता। पद और उनके सामाजिक-प्रशासनिक दर्जे को भी ध्यान में रखना भी जरुरी है। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत दी है।

केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका की सुनवाई जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की डिवीजन बेंच में हुई। मामल की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन UPSC अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद केंद्र सरकार ने क्रीमी लेयर में शामिल करते हुए नियुक्ति से वंचित कर दिया गया था।

पढ़िए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, केवल आय के आधार पर क्रीमी लेयर तय करना कानून के अनुरूप नहीं है। किसी उम्मीदवार के लिए क्रीमी लेयर और नॉन-क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल आय के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।

क्या है मामला?

यह विवाद उन अभ्यर्थियों से जुड़ा था जिन्होंने OBC नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी के तहत आरक्षण का दावा किया था। सत्यापन के दौरान कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने उनके माता-पिता की वेतन आय को आधार बनाकर क्रीमी लेयर में शामिल कर दिया। इनमें से कई अभ्यर्थियों के माता-पिता पीएसयू, बैंकों या अन्य संस्थानों में कर्मचारी थे।

केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2004 के एक स्पष्टीकरण पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि यदि किसी पद की सरकारी पदों से समानता तय नहीं हुई है, तो आय के आधार पर क्रीमी लेयर का निर्धारण किया जा सकता है। इस आधार पर जिन अभ्यर्थियों के माता-पिता की आय तय सीमा से अधिक थी, उन्हें OBC आरक्षण का लाभ देने से मना कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक स्पष्टीकरण पत्र मूल नीति में नया नियम नहीं जोड़ सकता। कोर्ट ने यह भी पाया कि सरकार की व्याख्या से सरकारी कर्मचारियों और पीएसयू/निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बीच असमानता पैदा हो रही थी।

कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देशित किया है, संबंधित अभ्यर्थियों के मामले मेंं इस फैसले के सिद्धांतों के अनुसार दोबारा विचार किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा, यदि आवश्यक हो तो प्रभावित अभ्यर्थियों को समायोजित करने के लिए अतिरिक्त पद बनाए जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के लिए छह महीने का समयावधि तय कर दिया है।

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