बड़ी खबर: उज्जैन सेवा धाम आश्रम में 17 बच्चों की मौत से हड़कंप! हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा, 2 हफ्ते में मांगा जवाब
उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में 86 में से 17 बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त। पीआईएल दर्ज, दो हफ्ते में जवाब तलब। विभागीय जांच जारी।
Sevadham Ashram Case: उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में पिछले 1 साल के भीतर 17 बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए पीआईएल दर्ज करने और 2 सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं. बेहतर देखभाल के नाम पर एक आश्रम से दूसरे आश्रम भेजे गए 86 विशेष बच्चों में से 17 की मौत यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सिस्टम पर खड़े होते तीखे सवाल हैं। अंबोदिया गांव स्थित सेवाधाम आश्रम में बीते एक साल के भीतर हुई इन मौतों ने प्रदेश की सेवा-आश्रय व्यवस्था की परतें खोल दी हैं। मामला सुर्खियों में आया तो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (PIL) दर्ज करने के निर्देश दिए और दो सप्ताह में जवाब तलब कर लिया।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
दिसंबर 2024 में इंदौर के युगपुरुष धाम को बंद कर दिया गया था। इससे पहले जून-जुलाई 2024 में वहां हैजे से 10 बच्चों की मौत हुई थी। आश्रम बंद होने के बाद वहां रह रहे 86 दिव्यांग और बहुदिव्यांग बच्चों—34 लड़के और 52 लड़कियां—को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम शिफ्ट किया गया। इनकी उम्र 5 से 23 वर्ष के बीच थी।
लेकिन शिफ्टिंग के महज एक महीने बाद, 23 जनवरी 2025 से मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। जिला अस्पताल और विद्युत शवदाह गृह के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 17 बच्चों की मौत दर्ज हो चुकी है। अधिकांश मामलों में कारण “सांस लेने में तकलीफ” बताया गया है।
1200 लोगों का आश्रय, निगरानी कितनी मजबूत?
सेवाधाम आश्रम में करीब 1200 निराश्रित, बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांगजन रहते हैं। इतने बड़े संस्थान में मेडिकल मॉनिटरिंग, नियमित जांच और आपात उपचार की व्यवस्था कितनी मजबूत है—यह अब जांच का विषय बन चुका है। लगातार एक जैसे कारण से हो रही मौतों ने स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
इंदौर बेंच ने मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त, कलेक्टर उज्जैन, एसपी उज्जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 12 मार्च को प्रस्तावित है। कोर्ट की सख्ती से प्रशासनिक हलकों में हलचल है।
विभाग की जांच, पर आंकड़ों पर असमंजस
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने कहा कि अंतर-विभागीय समिति जांच कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर “सुधारात्मक कदम” उठाए जाएंगे। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह रही कि मौतों की सटीक संख्या और कारणों पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
संचालक का पक्ष
आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि युगपुरुष धाम से लाए गए बच्चे पहले से ही गंभीर और संक्रमित थे। उनके मुताबिक, यदि सेवाधाम उन्हें स्वीकार नहीं करता तो “आधे से ज्यादा बच्चों की मौत संभव थी।”
गौरतलब है की उज्जैन का यह मामला केवल एक आश्रम तक सीमित नहीं है। यह प्रदेश भर में संचालित सेवा-आश्रयों की निगरानी, स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की असली तस्वीर सामने ला रहा है। अब निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।