अवैध खनन, MLA ने जज को किया प्रभावित, हाई कोर्ट ने शुरू की भाजपा MLA के खिलाफ क्रिमिनल अवमानना की कार्रवाई, इस दिन होगी हाई कोर्ट में सुनवाई

High Court News: अवैध खनन के एक मामले में मध्य प्रदेश भाजपा के एक विधायक पर जज को सीधेतौर पर प्रभावित करने का आरोप लगा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने रजिस्ट्री को निर्देशित किया है, विधायक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए।

Update: 2026-04-03 10:15 GMT

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जबलपुर।3 अप्रैल 2026|अवैध खनन के एक मामले में मध्य प्रदेश भाजपा के एक विधायक पर जज को सीधेतौर पर प्रभावित करने का आरोप लगा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने रजिस्ट्री को निर्देशित किया है, विधायक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने को रजिस्ट्री को निर्देश दिया, भाजपा विधायक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू करे। विधायक पर अवैध खनन से जुड़े एक मामले में मौजूदा जज से अनुचित तरीके से संपर्क करने का आरोप है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने रजिस्ट्री को यह निर्देश जारी किया। निर्देश में कहा, विधायक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना ​​याचिका दर्ज करे और इस आपराधिक अवमानना ​​याचिका को 06 अप्रैल 2026 को कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करे।

पढ़िए क्या है मामला

यह मामला आशुताेष दीक्षित द्वारा दायर याचिका के संदर्भ में सामने आया। दायर याचिका में याचिकाकर्ता दीक्षित ने हाई कोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की थी, एक जज से अनुचित तरीके से संपर्क करने और उन्हें प्रभावित करने की भाजपा विधायक द्वारा की गई कोशिश का न्यायिक संज्ञान ले। याचिकाकर्ता ने सितंबर 2025 की एक घटना का जिक्र किया है, जब विधायक ने एक जज से संपर्क करने की कोशिश की थी, ताकि उनके समक्ष लंबित अवैध खनन मामले पर चर्चा की जा सके।

विधायक द्वारा संपर्क की कोशिश के बाद जस्टिस ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 440 करोड़ रुपये के अवैध लौह अयस्क खनन के इस मामले में GST चोरी के लिए 80 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जिन कंपनियों पर संदेह है, उसमें निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग और पैसिफिक एक्सपोर्ट, कथित तौर पर भाजपा विधायक से संबंध है।

याचिका की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने टिप्प्णी करते हुए कहा, विधायक का आचरण प्रथम दृष्टया, आपराधिक अवमानना ​​की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को अवमानना याचिका के रूप में मामले को रजिस्टर्ड करने का निर्देश दिया है।

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