MP Liquor News: 1 अप्रैल से MP में महंगी होगी शराब, नई आबकारी नीति को मिली मंजूरी, एक click में जानिये शराब बिक्री-वितरण के नियम
नई आबकारी नीति (new liquor policy madhya pradesh) को कैबिनेट की मंजूरी के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जो शराब की बिक्री और वितरण में बड़े बदलाव लाएगा.
1 अप्रैल से मध्य प्रदेश में शराब महंगी हो जायेगी. साथ ही बिक्री और वितरण के नियम भी बदल जायेंगे। गौरतलब है की मोहन सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति (new liquor policy madhya pradesh) को कैबिनेट की मंजूरी के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जो शराब की बिक्री और वितरण में बड़े बदलाव लाएगा. यह नीति सामाजिक संवेदनशीलता, पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है.
यह होंगे प्रमुख बदलाव
- कोई नई मदिरा दुकान नहीं खोली जाएगी और मौजूदा 3553 दुकानों का नवीनीकरण भी समाप्त कर दिया गया है. सरकार ने ई-टेंडर और ई-ऑक्शन को अनिवार्य बनाया है, जिससे ठेकेदारों की मोनोपॉली खत्म होगी और अधिकतम पांच दुकानों का एक समूह बनेगा.
- नर्मदा तट से 5 किमी और पवित्र नगरों में प्रतिबंध यथावत रहेगा, जबकि अहाते (शराब पीने के स्थान) बंद रहेंगे.
यह नीति 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में नीति के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि यह बदलाव राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ जालसाजी रोकने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हैं. विशेष रूप से, अन्य राज्यों की हेरिटेज या विशेष मदिरा को ड्यूटी फ्री करने का प्रावधान आदिवासी समूहों के महुआ उत्पाद को लाभ पहुंचाएगा. शराब की कीमतों में औसतन 20% तक वृद्धि की उम्मीद है, क्योंकि आरक्षित मूल्य में बढ़ोतरी की गई है. यह नीति 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी और प्रदेश में शराब नीति को अधिक नियंत्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
सरकार का राजस्व लक्ष्य 19 हजार करोड़ तक पहुंच सकेगा!
यह नई आबकारी नीति एमपी में शराब व्यापार को डिजिटल और प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास है, जहां पुरानी व्यवस्था में नवीनीकरण से जुड़े विवाद और एकाधिकार की शिकायतें आम थीं. अब सभी दुकानों का आवंटन बैच-आधारित ई-प्रक्रिया से होगा, जिसमें प्रतिभूति के लिए केवल ई-चालान या ई-बैंक गारंटी मान्य होगी, जिससे फर्जी दस्तावेजों का खतरा कम होगा. विनिर्माताओं को उत्पाद मूल्य घोषणा में आसानी दी गई है, जहां आयुक्त की पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं रहेगी. निर्यात को प्रोत्साहन के लिए लेबल पंजीयन सरलीकृत किया गया है. नीति में सामाजिक पहलू मजबूत है, जैसे धार्मिक स्थलों पर सख्ती और नई दुकानों पर रोक, जो जनता की भावनाओं का सम्मान करती है. हालांकि, शराब प्रेमियों के लिए यह दोहरी मार साबित हो सकती है क्योंकि कीमतें बढ़ेंगी और उपलब्धता सीमित रहेगी.
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सरकार का राजस्व लक्ष्य 19 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है. विपक्ष ने इसे महंगाई का बोझ बताया है, लेकिन सरकार इसे संतुलित और पारदर्शी बताती है.