MP बजट 2026: लाड़ली बहना से रोजगार तक… किन सेक्टरों पर बरसेगा पैसा, किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
यह बजट 4.70 लाख करोड़ का हो सकता है। इस बार का बजट कई मायनों में खास होगा, क्योंकि सरकार पहली बार “रोलिंग बजट” पेश कर रही है। बजट महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों को ध्यान में रखकर पेश किया जाएगा, यह एक बेहतर और उन्नत बजट होगा.
मध्य प्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा आज वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगे। यह बजट 4.70 लाख करोड़ का हो सकता है। इस बार का बजट कई मायनों में खास होगा, क्योंकि सरकार पहली बार “रोलिंग बजट” पेश कर रही है। यानी केवल एक साल नहीं, बल्कि अगले तीन वर्षों का वित्तीय खाका पेश किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार युवाओं, किसानों, कर्मचारियों और मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर कई अहम घोषणाएं कर सकती है। राज्य में लगभग 50 हजार रिक्त सरकारी पदों को भरने का ऐलान संभव है। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए परीक्षा प्रणाली में बदलाव की भी घोषणा हो सकती है।
मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि CM मोहन यादव के नतृत्व में बजट पेश किया जाएगा. यह बजट जनता के लिए है और पूरी तरह से जनता को समर्पित है. बजट महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों को ध्यान में रखकर पेश किया जाएगा, यह एक बेहतर और उन्नत बजट होगा. इस बजट में ‘सीएम केयर' योजना से सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार, स्टेट कार्डियक सेंटर, अंग प्रत्यारोपण संस्थान, मेडिकल कॉलेजों में कैंसर और हार्ट सुपर, 1.40 करोड़ बच्चों को मिलेगा टेट्रा पैक दूध, युवाओं के लिए 50 हजार नई भर्तियों की तैयारी में हैं.
मोहन सरकार को तीसरा पूर्ण बजट
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा मोहन सरकार का तीसरा पूर्ण बजट पेश करेंगे। बता दें नीमच जिले के रामपुरा गांव में जन्मे 66 वर्षीय देवड़ा इससे पहले शिवराज सिंह चौहान सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं। देवड़ा विधि स्नातक हैं और उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से एमए तथा एलएलबी की डिग्री प्राप्त की है। देवड़ा छह बार विधायक चुने जा चुके हैं और पहली बार 1990 में विधानसभा पहुंचे।
कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना
कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लाए जाने की चर्चा है। प्रस्तावित योजना के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 35 लाख रुपए तक का कैशलेस कवर मिल सकता है। सामान्य बीमारियों के लिए अलग से सीमा तय की जा सकती है। इस योजना का लाभ कर्मचारियों के परिवार को भी मिल सकता है। वर्ष 2026 को सरकार कृषि वर्ष के रूप में मना रही है। ऐसे में कृषि क्षेत्र को भी बजट में प्राथमिकता मिलने के संकेत हैं। हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना पर काम हो सकता है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके। सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए जल संसाधन और नर्मदा घाटी परियोजनाओं में अतिरिक्त निवेश का प्रावधान किया जा सकता है। फसल बीमा, शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण और किसान कल्याण योजनाओं को जारी रखने की संभावना है।
सार्वजनिक परिवहन सेवा की शुरुआत
शहरी क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था सुधारने के लिए सहकारी मॉडल पर आधारित “सहकार टैक्सी सेवा” शुरू करने का प्रस्ताव भी सामने आ सकता है। इसे निजी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सेवा की अप्रैल में शुरुआत होने जा रही है। बजट में इसके लिए प्रावधान किया जा सकता है। साथ ही सिंहस्थ के लिए भी सरकार बजट में राशि आवंटित कर सकती है।
सड़क समेत बुनियादी ढांचे बढ़ाने पर जोर
वित्तीय मोर्चे पर सरकार के सामने वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, सामाजिक योजनाओं और सब्सिडी का बड़ा खर्च है। ऐसे में राजस्व बढ़ाने और पूंजीगत व्यय को मजबूत करने पर जोर रहने की संभावना है। सड़कों, पुलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी ढांचे पर बड़े निवेश की तैयारी है, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले। शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में भी नई घोषणाएं संभव हैं। नए स्कूलों की स्थापना, संस्थानों के उन्नयन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।
सिंहस्थ के लिए भी बजट
वर्ष 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ का भी आयोजन होना है. इसके लिए सरकार बजट में अलग से धनराशि का प्रावधान कर सकती है. पिछले बजट में सरकार 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, इस बार यह राशि बढ़ सकती है.
स्वास्थ्य के लिए भी बजट देगी सरकार
मध्य प्रदेश सरकार इस बार स्वास्थ्य को लेकर भी अच्छा-खासा खर्च करने की तैयारी में है. ‘सीएम केयर’ योजना - स्टेट कार्डियक सेंटर, अंग प्रत्यारोपण संस्थान, मेडिकल कॉलेजों में कैंसर और हार्ट सुपर-स्पेशियलिटी विभाग 5 साल में ₹2,000 करोड़ खर्च करने का अनुमान जताया जा रहा है.
सरकार 12 वेलनेस, आस्था टूरिज्म हब बनाने की योजना बना रही है. उज्जैन से खजुराहो तक 12 वेलनेस स्थल विकसित होंगे. आयुष वीजा से जुड़कर MP देश का दूसरा बड़ा वेलनेस डेस्टिनेशन बन सकता है.
1.40 करोड़ बच्चों को टेट्रा पैक दूध की व्यवस्था
मध्य प्रदेश में 1.40 करोड़ बच्चों को टेट्रा पैक दूध देने की व्यवस्था की जा सकती है. सरकार मिड-डे मील और आंगनवाड़ी में UHT तकनीक वाला दूध पोषण सुधार पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है.
19 हजार 287 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश
इससे पहले मंगलवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने चालू वित्तीय वर्ष का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। यह 19 हजार 287 करोड़ 32 लाख रुपए का है, जिस पर 23 फरवरी को चर्चा होगी। इसके साथ ही सदन में आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश किया गया। बता दें कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 6 मार्च तक चलेगा। इसमें कुल 3478 प्रश्नों की सूचनाएं, 236 ध्यानाकर्षण, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प पेश होंगे। शून्य काल में विधानसभा में 83 सवाल होंगे।
मध्य प्रदेश सरकार के पिछले दो बजट
मोहन सरकार ने अपना पहला बजट (2024-25) 3 लाख 65 हजार 67 करोड़ का पेश किया था। दूसरा बजट (2025-26) 4,21,032 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। अब तीसरा बजट (2026-27) 18 फरवरी को पेश किया जाएगा। एमपी की भाजपा सरकार ने विकसित एमपी 2047 को देखते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था को 2 ट्रिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। पिछली साल मध्य प्रदेश का बजट सत्र 10 मार्च से शुरू हुआ था और 24 मार्च (15 दिन) तक चला था।
सीएम बोले- अनूठा नवाचार करने जा रहे
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्य प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य होगा, जो अनूठा नवाचार करने जा रहा है। हमारे इस बजट में अगले 3 साल का खाका होगा, जिसमें इस वर्ष के विस्तृत बजट के साथ अगले 2 साल की विकास योजनाओं की आउटलाइन भी शामिल रहेगी।
नेता प्रतिपक्ष बोले- यह सरकार कर्ज लेकर घी पी रही है
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- बजट में प्रदेश को नई सौगात नहीं मिलने वाली। बेहतर बजट वो होता है, जो आम जनता को लाभ पहुंचाए। यह जमीनी हकीकत से दूर का बजट है। बीजेपी की सपने दिखाने की आदत है। बजट एससी-एसटी, किसान, ओबीसी किसी के पक्ष में नहीं है। जो पुरानी योजनाएं चल रही हैं, उन्हीं को नए आंकड़ों के साथ लाएंगे। किसान की आय दोगुनी नहीं कर सकते। किसान को काम नहीं देना चाहते और किसानों का वर्ष मना रहे हैं। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “यह सरकार कर्ज लेकर घी पी रही है। यह जनता की तिजोरी है, जनता के लिए है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के पैसों का दुरुपयोग कर रही है और वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं कर रही।
जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि केंद्र ने मध्य प्रदेश के 60 हजार करोड़ रुपये बकाया नहीं दिए हैं। उनका कहना है कि इस राशि के नहीं मिलने से प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है और आर्थिक स्थिति पर दबाव बना हुआ है।