Bhopal Crime: 3 बेटों का हत्यारा बना 'हैवान',18 साल जेल काटने के बाद बाहर आया, फिर जिसने दिया सहारा उसी का कर दिया मर्डर

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 18 साल पहले अपनी तीन बेटियों की निर्मम हत्या के दोष में सजा काटकर लौटे एक व्यक्ति ने जिसने उसे शरण दी उसी की हत्या कर दी फिर खुद आत्महत्या कर ली.

Update: 2026-02-19 10:44 GMT

सोर्स- इंटरनेट, एडिट- npg.news

मध्यप्रदेश से लगातार हत्या की वारदातों के बीच एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 18 साल पहले अपनी तीन बच्चों की निर्मम हत्या के दोष में सजा काटकर लौटे एक व्यक्ति ने जिसने उसे शरण दी उसी की हत्या कर दी फिर खुद आत्महत्या कर ली. मालूम हो की हत्या की सजा काटकर लौटने के कारण उस व्यक्ति को कोई अपने घर में शरण नहीं दे रहा था तब उसकी मुंहबोली बहन ने उसे अपने घर में जगह दी लेकिन अहसान फरामोश हत्यारे भाई ने अपनी बहन की ही हत्या कर दी. इस घटना ने जहां पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है, वहीँ विश्वास और भाई बहन के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

मामला ऐसा है की भोपाल के गौतम नगर थाना क्षेत्र स्थित श्रीनगर कॉलोनी में 18  साल पहले अपनी तीन बेटों की निर्मम हत्या के दोष में सजा काटकर लौटा एक व्यक्ति, जिसने शरण देने वाली अपनी मुंहबोली बहन की बेरहमी से हत्या कर दी और इसके बाद ट्रेन से कटकर खुद भी आत्महत्या कर ली। पुलिस ने हत्या और आत्महत्या के दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानें घटना की पूरी कहानी 

पुलिस के मुताबिक, 50 वर्षीय दुर्गा कुशवाहा मूल रूप से नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा की रहने वाली थीं और भोपाल के श्रीनगर कॉलोनी में परिवार के साथ रहती थीं। उनके पति डालचंद कुशवाहा भोपाल-नागपुर रूट पर बस चलाते हैं। दो बेटे अरुण और रवि करोंद क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स का कारोबार करते हैं, जबकि बेटी आरती पढ़ाई कर रही है। तेंदूखेड़ा में दुर्गा का पड़ोसी प्रीतम कुशवाहा बचपन से उसका मुंहबोला भाई था। 18 साल पहले प्रीतम ने अपनी तीन बेटियों की गला रेतकर हत्या कर दी थी और पत्नी व बेटे पर भी जानलेवा हमला किया था। पत्नी और बेटा किसी तरह बच निकले थे। इस जघन्य अपराध में उसे 15 साल की सजा हुई थी। पिछले वर्ष 26 जनवरी को सजा पूरी करने के बाद वह रिहा हुआ था। इस बीच उसकी पत्नी की मौत हो चुकी थी और बेटा रायसेन में मामा के पास रह रहा था। रिहाई के बाद परिवार ने उसे गांव से भगा दिया। ऐसे में वह सहारा तलाशते हुए भोपाल पहुंचा और दुर्गा के पास रहने लगा। परिवार के विरोध के बावजूद दुर्गा ने उसे मकान की पहली मंजिल पर कमरा दे दिया और भोजन की व्यवस्था भी की। प्रीतम सब्जी का ठेला लगाकर गुजारा कर रहा था। प्रीतम के आपराधिक अतीत के चलते दुर्गा का परिवार उससे भयभीत रहता था। वे लगातार दुर्गा पर दबाव बना रहे थे कि वह उससे कमरा खाली कराए। जब यह बात प्रीतम को पता चली तो वह आक्रामक हो गया।

व्रत के बाद दिया इस खौफनाक वारदात को अंजाम 

सोमवार को महाशिवरात्रि व्रत का पारण करने के बाद सुबह करीब 11 बजे दुर्गा नए निर्माणाधीन मकान पर गई थीं। उसी दौरान प्रीतम भी वहां पहुंचा। दोपहर 12 बजे तक जब दुर्गा घर नहीं लौटीं तो परिजनों ने तलाश शुरू की। निर्माणाधीन मकान पर ताला लगा मिला। दूसरी चाबी से दरवाजा खोलकर देखा गया तो रसोई में दुर्गा का खून से सना शव पड़ा था। हत्या के बाद प्रीतम मौके से फरार हो गया और बाद में ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। 

पुलिस के अनुसार, हमले के दौरान आरोपी ने दुर्गा के शरीर पर 13 बार चाकू चलाया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, 9 घाव सीने पर, 3 पेट पर और 1 वार गर्दन पर किया गया था। इस नृशंस हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी सीधा रेलवे ट्रैक पर पहुँचा और ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

पुलिस जांच में जुटी

घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने हत्या और आत्महत्या के मामलों में अलग-अलग केस दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आपसी विवाद और घर खाली कराने के दबाव को हत्या की वजह माना जा रहा है।


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