World osteoporosis day 20 October: भारत में हर तीन में से एक महिला को ऑस्टियोपोरोसिस, आपकी भी पीठ आगे की ओर झुक तो नहीं रही? हो जाइए सावधान

Update: 2022-10-21 07:51 GMT

NPG DESK

ऑस्टियोपोरोसिस को दुनिया भर में एक 'साइलेंट महामारी' के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसके शरीर पर पकड़ बनाने का शुरुआती दौर में प्रायः पता ही नहीं चलता। जब फ्रेक्चर ही होने लग जाएं या बाॅडी पोस्चर बदलने लग जाए तब इसकी गंभीरता का अहसास होता है। लेकिन यह बहुत आगे की स्थिति होती है। दरअसल ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमे हड्डियां अन्दर से खोखली हो जाती हैं और टूटने लगती हैं। आज वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे है। WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रत्येक 3 में से 1 महिला और पुरुषों में 8 में से 1 पुरुष को ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी अवश्य होती है। आइये जानते है ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में और इसका इलाज किस प्रकार किया जा सकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है

हमारे शरीर में हड्डियों के बहुत सारे कार्य होते हैं, ये हमारे शरीर को आकर प्रदान करने के साथ साथ हमारे आंतरिक अंगों को समर्थन और सुरक्षा भी प्रदान करती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर होने लगती है। उनके टूटने और फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी अक्सर 50 की उम्र के बाद होती है जिसमे मनुष्य का बॉडी मॉस लगातार घटने लगता है।

हमारे शरीर में बोन टिश्यू लगातार बनते रहते हैं, और नई हड्डी पुरानी, ​​क्षतिग्रस्त हड्डी की जगह ले लेती है।किसी भी व्यक्ति में उसकी बोन डेंसिटी उसकी 20 की उम्र के करीब चोटी पर होता है और 35 की उम्र के बाद हड्डी कमजोर होने लगती है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हड्डियाँ कमजोर होकर टूटने लगती हैं। यदि यह परिस्थिति अत्यधिक बढ़ जाती है, तो वह व्यक्ति ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार हो जाता है।

ये लक्षण दुर्लभ हैं, पर यदि हों तो सतर्क हो जाएं

शुरुआत में ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण नज़र नहीं आते। पर कुछ दुर्लभ मामलों में इसके लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे-

असहनीय पीठ दर्द- पीठ दर्द आमतौर पर रीढ़ के फ्रैक्चर के कारण होता है। इसमें काफी तेज दर्द होता है। इसका कारण यह है कि पीठ के टूटे हुए वर्टेब्रा रीढ़ की हड्डी से फैली नसों को चुभते हैं। जो बेहद तकलीफदेह होता है।

बोन फ्रैक्चर- ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाली सबसे कॉमन लक्षणों में से एक है बोन फ्रैक्चर। इसमें हड्डियां इतनी कमजोर या भुरभुरी हो जाती हैं कि फ्रैक्चर होने का रिस्क काफी बढ़ जाता है।

झुका हुआ पोस्चर (Stooped posture)कुछ मामलों में, ऑस्टियोपोरोसिस से रीढ़ की हड्डी में हुए फ्रैक्चर के कारण पीठ का ऊपरी हिस्सा आगे की तरफ झुक जाता है, जिससे लंबाई कम लगने लगती है।

कौन-कौन ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार हो सकता है

1.50-60 वर्ष की आयु के बाद आप ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार हो सकते हैं

विशेषकर महिलायें मेनोपॉज़ या रजोनिवृत्ति के बाद ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार हो जाती हैं।

2.यदि आपके परिवार में किसी को ऑस्टियोपोरोसिस रोग है तो आप भी इसके जोखिम में हैं।

3.यदि भोजन में कैल्सियम नहीं लेते हैं तब भी ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार हो सकते हैं।

4.यदि आप विभिन्न प्रकार के व्यसन जैसे – सिगरेट शराब इत्यादि का सेवन करते हैं

भरपूर मात्रा में पोषण न लेने पर भी ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार हो सकते हैं।

5.किसी बीमारी के कारण यदि आप स्टेराइड व हार्मोन की दवाइयां ले रहे हैं तब भी आप ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार हो सकते हैं।

6.क्रियाशील न होने या आलस्य के कारण भी बहुत बार आप ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार हो सकते हैं।

7. पुरुषों को हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन दोनों हार्मोन की आवश्यकता होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पुरुष टेस्टोस्टेरोन को हड्डियों के संरक्षण वाले एस्ट्रोजन में बदल देते हैं। इसकी कमी होने पर पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है।

8.हार्मोन असंतुलन के शिकार लोग।

9.थायराइड हार्मोन का उच्च स्तर भी लंबे समय में हड्डियों के नुकसान में वृद्धि से जुड़ा हुआ है।

* ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के उपाय

कुछ सामान्य से उपाय कर आप काफी हद तक हड्डी के इस रोग से बचे रह सकते हैं-

-प्रतिदिन एक्सरसाइज करें।

-कैल्शियम का सेवन अधिक करें।

-विटामिन डी के लिए धूप सेकें।

-विटामिन के की कमी ना होने दें।

-अपने आहार में सोया, नट, फलियां, डेयरी और अंडे इत्यादि को शामिल करें

-मोटापा कम करें।

-प्लांट एस्ट्रोजेन्स का चुनाव करें।

-स्मोकिंग और एल्कोहल का सेवन छोड़ दें।

-तनाव दूर करें।

-ऑयल मसाज करें।

-अपनी डायट में तिल शामिल करें।

-गिरने से बचें। इस प्रकार के जूते या चप्पलें पहने जिनमे ज्यादा हील (ऊँची एड़ी) न हो और साथ ही उनसे फिसलने का डर न हो। घर के कमरों को अच्छे से रौशन रखें।

-रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाएं।

प्रायः ऑस्टियोपोरोसिस होने पर हार्मोन थेरेपी की सलाह दी जाती है लेकिन इसके कुछ संभावित दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर्स भी यह सलाह देते हैं की इन हार्मोन की खुराक का उपयोग कम समय के लिए ही करें। आजकल सर्जरी में 'बोन सीमेंट' का उपयोग होने लगा है जिसे क्षतिग्रस्त रीढ़ की हड्डियों (Vertebrae) में इंजेक्ट किया जाता है, ताकि उन्हें अधिक घना और मजबूत बनाया जा सके। लेकिन इस अधिक तकलीफदेह हालत में पहुंचने से बेहतर है कि समय रहते स्थिति को काबू में करने की भरसक कोशिश की जाए।

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