बड़ी खबर: दिव्यांगजनों को धारा 34 के तहत आरक्षण देने राज्य सरकार ने गजट में किया प्रकाशन, देखें राजपत्र
CG News: समाज कल्याण विभाग ने दिव्यांगजनों को धारा 34 के तहत् आरक्षण प्रदान करने के संबंध में राजपत्र प्रकाशन किया है। राजपत्र में लिखा है, राज्य सरकार के सभी विभागों, कार्यालयों, सार्वजनिक, उपक्रमों, निगमों, आयोगों, बोर्डो के सभी प्रकार के सेवाओं के समस्त प्रवर्ग श्रेणी के समस्त पदों पर चिन्हांकन हेतु प्रस्ताव मंगाए गए।
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रायपुर। 28 फरवरी 2026| समाज कल्याण विभाग ने दिव्यांगजनों को धारा 34 के तहत् आरक्षण प्रदान करने के संबंध में राजपत्र प्रकाशन किया है। राजपत्र में लिखा है, राज्य सरकार के सभी विभागों, कार्यालयों, सार्वजनिक, उपक्रमों, निगमों, आयोगों, बोर्डो के सभी प्रकार के सेवाओं के समस्त प्रवर्ग श्रेणी के समस्त पदों पर चिन्हांकन हेतु प्रस्ताव मंगाए गए। समिति द्वारा 23 मार्च 2026 को दिव्यांगता के उपयुक्त श्रेणी श्रेणियों हेतु पदों के चिन्हांकन का परीक्षण किया गया एवं प्रवर्ग श्रेणी (प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी) के दिव्यांगता के पदों के चिन्हांकन की सूची की अनुशंसा की गई।
राजपत्र में लिखा है, सामान्य प्रशासन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, के आदेश क्रमांक एफ 13-2/2018/आ.प्र./1-3, 27 मार्च 2025 द्वारा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 33 की उपधारा (I & II) में विहित प्रावधान के तहत् सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, समाज कल्याण विभाग, की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। उपरोक्त समिति द्वारा 23 मार्च 2026 को दिव्यांगता के उपयुक्त श्रेणी श्रेणियों हेतु पदों के चिन्हांकन का परीक्षण किया गया एवं प्रवर्ग श्रेणी (प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी) के दिव्यांगता के पदों के चिन्हांकन की सूची की अनुशंसा की गई।
सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक एफ GEN/14902/2025-GAD, 22 अक्टूबर 2025 द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष 24 फरवरी 026 को विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई अनुशंसाओं को प्रस्तुत कर अनुमोदन प्राप्त किया गया है। विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं एवं राज्य शासन के निर्णय अनुसार विभिन्न विभागों के पदों का संदर्भित दिव्यांगजनों के लिए चिन्हांकन संलग्न परिशिष्ट "क" अनुरुप है। अतः समूह "प्रथम", "द्वितीय", "तृत्तीय" एवं "चतुर्थ" श्रेणी में संदर्भित दिव्यांगजनों के लिए चिन्हांकित किए गए पदों की सूची सर्वसंबंधितों को अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रेषित हैं यह सूची निग्न प्रावधानों के साथ लागू होगीः-
पोषक वर्ग (Feeder Cadre) का पद संदर्भित दिव्यांगजन के लिए चिन्हांकित है, तो उसका पदोन्नत पद भी उसी अनुसार संदर्भित दिव्यांगजन के लिए स्वमेव चिन्हांकित माना जावेगा।
किसी भी पहचाने गए पद के संदर्भ में शासकीय सेवा में नियुक्ति के समय राज्य मेडिकल बोर्ड द्वारा शारीरिक दक्षता जांच एवं दिव्यांगता प्रमाण पत्र के प्रमाणिकता की पुष्टि अनिवार्य होगी तत्पश्चात् उम्मीदवार की उपयुक्तता की जांच संबंधित विभाग द्वारा किया जाना आवश्यक होगा।
प्रत्येक सरकारी स्थापन में सीधी भर्ती के प्रक्रम में भरे जाने वाले पदों में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण का लाभसक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र धारी बैंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्ति को ही दिया जाएगा।
अतः राज्य शासन उपरोक्तानुसार शासन के विभिन्न श्रेणी के पदों पर संदर्भित दिव्यांगजनों के लिए चिन्हांकित पदों की सूची जारी करता है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
हाई कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद राज्य सरकार ने किया राजपत्र में प्रकाशन
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2016 से दिव्यांगजनों के अधिकार अधिनियम में बड़ा बदलाव कर दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार इस पर अमल ना करते वर्ष 2014 के नियमों व अधिनियमों के अनुसार दिव्यांगजनों को आरक्षण दे रही है। राज्य सरकार के इस निर्णय को चुनौती देते हुए डॉ. रितेश तिवारी ने अधिवक्ता संदीप दुबे व ज्योति चंद्रवंशी के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई के बाद चौफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता ने ये लगाया था आरोप
संसद द्वारा पारित दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के बजाय राज्य सरकार द्वारा पुराने नियर्मो व अधिनियमों के तहत दिव्यांगजनों को आरक्षण देने के निर्णय को चुनौती देते हुए दोनों पैर से दिव्यांग डॉ. रितेश तिवारी ने अधिवक्ता संदीप दुबे व ज्योति चंद्रवंशी के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस का जवाब देने के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी थी।
इसलिए दायर की थी याचिका
याचिकाकर्ता डॉ रितेश तिवारी आयुर्वेद स्नातक है और छत्तीसगढ़ में बीएल कैटेगरी के तहत नौकरी की पात्रता रखते हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 1995 के अधिनियम के तहत दिव्यांगों को आरक्षण दिया जा रहा है। इस अधिनियम में तीन कैटेगर में पांच प्रकार के दिव्यांगता का उल्लेख है। इसी आधार पर चिन्हांकित तीन कैटेगरी के दिव्यांगों को ही शासकीय सेवा में आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है।
अधिवक्ता संदीप दुबे ने डिवीजन बेंच को दी थी ये जानकारी
याचिकाकर्ता की ओर से डिवीजन बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए अधिवक्ता संदीप दुबे ने बेंच को बताया, वर्ष 2016 में पार्लियामेंट ने दिव्यांगजनों के अधिकार अधिनियम में बड़ा बदलाव कर दिया है। आरक्षण सुविधा के लिए 17 कैटेगरी को शामिल किया है। इसमें बहु विकलांगता, द्वारिज्म, मानसिक विकलांगता, एसिड अटैक विकलांगता, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, ब्लाइंड, बौनापन सहित इस कैटेगरी में शामिल किए गए दिव्यांजनों को आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान है। अधिवक्ता दुबे ने डिवीजन बेंच को बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सभी नियुक्तियों में पूर्व के अधिनियम के अनुसार सिर्फ 5 प्रकार के दिव्यांगता बने ही चिन्हांकित कर आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। यह पार्लियामेंट द्वारा पारित अधिनियम और बनाए गए कानून का सीधेतौर पर उल्लंघन है।
राज्य सरकार के निर्णय से दिव्यांगजनों को हो रहा था नुकसान
अधिवक्ता संदीप दुबे ने डिवीजन बेंच को बताया कि पार्लियामेंट द्वारा पारित अधिनियम का छत्तीसगढ़ में पालन नहीं किया जा रहा है। नए अधिनियम के तहत समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा भर्ती के लिए निकाले जाने वाले विज्ञापन में पदों के अनुसार दिव्यांगजनों को आरक्षण देने के लिए अब तक कमेटी का गठन नहीं किया गया है और ना ही पद चिन्हांकित किया गया है। दिव्यांगजनों को सरकारी नौकरी में आयु सीमा में भी छूट नहीं दी जा रही है। अधिवक्ता दुबे ने बताया कि रिक्त पदों को अगले वर्ष के लिए कैरी फॉरवर्ड भी नहीं किया जा रहा है। दिव्यांगजनों के साथ राज्य में भेदभाव किया जा रहा है। जिस कानून को संसद ने निरस्त कर दिया है उसके तहत छत्तीसगढ़ सरकार नौकरियों में भर्ती कर रही है।