रायगढ़ में अफीम खेती इनसाइड स्टोरी: झारखंड में खेती करना सीखा, फिर रायगढ़ के ससुराल में आकर पिछले 4 माह से कर रहा था खेती, बेचने की फिराक में था, तभी SSP ने दबोचा...

Raigarh Opium Cultivation Inside Story: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अफीम की खेती मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी झारखंड का रहने वाला है और पिछले चार माह से सुसराल में रह कर अफीम की खेती कर रहा था।

Update: 2026-03-20 09:29 GMT

Raigarh Opium Cultivation Inside Story: रायगढ़। छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। दुर्ग, बलरामपुर में अफीम की खेती के बाद अब रायगढ़ में भी अफीम की खेती का भंडाफोड़ हुआ है। जिले के एसएसपी शशि मोहन सिंह ने अवैध अफीम की खेती का खुलासा किया है। जाँच में पता चला कि आरोपी लगभग डेढ़ एकड़ जमीन पर अफीम की खेती कर रहा था। पुलिस ने मामलें में झारखंड के रहने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कई बड़े खुलासे किये।

जानिए, रायगढ़ पुलिस ने कैसे किया खुलासा

दरअसल, जिले के एसएसपी शशि मोहन सिंह को मुखबिर से सूचना मिली थी कि तमनार थाना क्षेत्र के ग्राम आमाघाट नदी के पास आउटर में अफीम की खेती की जा रही है। इस सूचना के बाद एसएसपी शशि मोहन खुद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

मुखबिर के बताए जगह पर जैसे ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीम पहुंची तो नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। आरोपी आमाघाट नदी के पास आउटर में लगभग डेढ़ एकड़ जमीन पर अफीम की खेती कर रहा था। यह इलाका थाना और गांव से काफी दूर है, जिसकी वजह से आसपास के ग्रामीणों को भी इसकी भनक नहीं लग पाई।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खेती करने वाले आरोपी को पकड़ा। आरोपी की पहचान मार्शल सांगा के रूप मे की गई है। पूछताछ में मार्शल सांगा 40 वर्ष ने बताया कि वो झारखंड के खूंटी के ग्राम हडमबनम का रहने वाला है। उसकी शादी रायगढ़, तमनार के ग्राम आमाघाट निवासी सुषमा खलको से हुई है। उसकी पत्नी सुषमा खलको अपने मायके में ही रहती है।

झारखंड से सीखा अफीम की खेती करना

आरोपी मार्शल सांगा ने पुलिस को बताया कि वो जब झारखंड में रहता था, इसी दौरान उसने अफीम की खेती करना सीखा था। उसे पता था कि अफीम की खेती करने से ज्यादा लाभ कमाया जा सकता है।

आरोपी इसी लालच में पिछले चार माह से अपने ससुराल में अफीम की खेती कर रहा था। फसल पकने के बाद उसे वो मार्केट में बेचने की तैयारी में था, इसी बीच रायगढ़ पुलिस ने उसे धर-दबोचा।

एसएसपी समेत जिला प्रशासन की टीम मौके पर हैं और जमीन की नाप-खोज की जा रही है। साथ ही आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई कर अफीम की खेती के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

सबसे पहले दुर्ग में अफीम की खेती का खुलासा

पुलगांव क्षेत्र के जेवरा-सिरसा चौकी के ग्राम समोदा, झेनझरी व सिरसा के बीच एक फार्म हाॅउस में अवैध खेती किए जाने की सूचना दुर्ग पुलिस को मिली थी। इस सूचना पर शुक्रवार 6 मार्च की देर शाम जिला के कलेक्टर, पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पता चला कि 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में अफीम के पौधे लगाए गए थे। पौधों की कीमत कुल 8 करोड़ आंकी गई। पुलिस ने तत्काल इसकी सूचना राजस्व विभाग, तहसीलदार को दी। जांच में ग्राम झेंझरी, तहसील दुर्ग स्थित खसरा नंबर 309 रकबा 80 डिसमिल तथा खसरा नंबर 310 रकबा 9 एकड़ 92 डिसमिल कुल खसरा नंबर 2 रकबा 10 एकड़ 72 डिसमिल भूमि दर्ज पाया गया।

पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि फार्म हाॅउस बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार का है। अफीम की खेती के लिए राजस्थान से मजदूर बुलाकर काम करवाया जा रहा था। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर पुलिस ने विनायक ताम्रकार समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया। साथ ही जब्त किए गए अफीम के पौधों की जुडिशियल मजिस्ट्रेड के समक्ष सैंपलिंग की कार्रवाई की गई।

बलरामपुर में अफीम की खेती का खुलासा

बलरामपुर जिले के कुसमी के त्रिपुरी ग्राम में मिले अफीम की खेती के बाद कोरंधा थाना क्षेत्र के ग्राम तुर्रीपानी में भी पुलिस ने अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया। पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए करोड़ों की अफीम पकड़ी। साथ में दो अरोपियों को भी गिरफ्तार किया। आरोपियों के द्वारा 1.47 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती की जा रही थी।

जानिए पूरा मामला

दरअसल, कोरंधा क्षेत्र के ग्राम तुर्रीपानी खुजुरी में अफीम की खेती करने की सूचना पुलिस को मिली थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी। कलेक्टर राजेन्द्र कटारा और एसपी वैभव बेंकर मौके पर पहुंचे तो करीब 1.47 एकड़ भूमि पर अफीम की खेती मिली। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को भी पकड़ा। दोनों आरोपी पुलिस को आते देखकर भाग रहे थे। इसी दौरान घेराबंदी कर उन्हें पकड़ा गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सहादुर नगेशिया 34 वर्ष और दुईला नगेशिया 40 वर्ष के रूप में हुई। दोनों आरोपी ग्राम खजुरी के ही निवासी है।

पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए 1.47 एकड़ जमीन पर 18 क्विंटल अफीम जब्त किया गया। जब्त अफीम की कीमत दो करोड़ से ज्यादा आंकी गई है। आरोपियों के विरूद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 और 18 के तहत कार्रवाई की गई।

कलेक्टर कटारा ने बताया कि ''मुखबीर से अफीम की खेती की सूचना प्राप्त होन पर राजस्व, पुलिस, वन विभाग और पंचायत की टीम मौके पर पहुंची। टीम द्वारा क्षेत्र का निरीक्षण करने पर जांच के दौरान अफीम की खेती होना पाया गया, जिस पर एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत सभी ऐजेंसियों को सम्मिलित करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कार्यवाही की गई। इस दौरान अफीम के जड़, तना, फूल, पत्ती, फल को जब्त कर तौल किया गया, जिसका वजन 18 क्विंटल 83 किलोग्राम, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये है। जिस पर एनडीपीएस की धारा 8 एवं 18 के तहत कार्यवाही कर एफआईआर दर्ज की गई है और 2 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है।''

कलेक्टर कटारा ने बताया कि ''जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में जंगलों के बीच 1.47 एकड़ के रकबे पर छोटे-छोटे खेतों में अफीम की खेती की जा रही थी, जो झारखण्ड सीमा से लगा हुआ है। जहां बाहरी व्यक्तियों द्वारा अफीम की खेती की जा रही थी। जिस पर पुलिस के द्वारा विस्तृत विवेचना कर एण्ड-टू-एण्ड कार्यवाही कर रही है।''

कलेक्टर ने बताया कि ''जिले के संपूर्ण क्षेत्रों एवं विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में राजस्व एवं वन विभाग की भूमियों तथा लोगों के निजी भूमि व खेतों का राजस्व, पुलिस, वन विभाग एवं पंचायत की संयुक्त टीम के द्वारा सघन निरीक्षण कर जांच किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती, भण्डारण, परिवहन करते पाये जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरूद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाएगी।''

इसके पहले कुसमी के त्रिपुरी ग्राम में मिला था अफीम का खेत

बलरामपुर पुलिस को कुसमी के त्रिपुरी ग्राम में अफीम की खेती करने की जानकारी मिली थी। इस सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो अफीम की बड़ी मात्रा में फसल बरामद हुई।

मामले में तीन संदेहियों को हिरासत में लिया गया है। पकड़े गये लोगों से पूछताछ की जा रही है। जिस क्षेत्र में अफीम की खेती का पता चला है, वो इलाका झारखंड राज्य से सटा हुआ है। जांच में पता चला है कि झारखंड के लोगों के द्वारा त्रिपुरी गांव में आदिवासी की दो एकड़ जमीन को लीज पर लिया गया और उसी में अफीम की खेती की जा रही थी। मौके से बड़ी मात्रा में अफीम की फसल भी बरामद की गई थी।


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