सुप्रीम गाइडलाइन: अब 6 महीने के भीतर मामलों की सुनवाई करनी होगी पूरी, डिक्री के प्रकरणों के फैसले के लिए डेडलाइन तय

Bilaspur High Court: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट के लिए जरूरी निर्देश जारी किया है। बिलासपुर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में प्रदेश की अदालतों के लिए निर्देश जारी किया है। डिक्री के नए मामलों की सुनवाई अब 6 महीने में पूरे करने होंगे।

Update: 2026-02-26 04:33 GMT

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बिलासपुर 26 फरवरी 2026, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट के लिए जरूरी निर्देश जारी किया है। बिलासपुर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में प्रदेश की अदालतों के लिए निर्देश जारी किया है। डिक्री के नए मामलों की सुनवाई अब 6 महीने में पूरे करने होंगे।

बिलासपुर हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में प्रदेश की सभी जिला अदालतों के लिए नई प्रैक्टिस गाइडलाइन जारी की है। जारी गाइडलाइन के अनुसार अब निष्पादन के नए मामलों को फाइल होने की तिथि से 6 महीने के भीतर निपटाना जरूरी होगा। सभी अदालतों को निष्पादन के प्रकरणों को प्राथमिकता में रखना होगा, ताकि डिक्री-धारकों को उनके कानूनी अधिकार बिना किसी देरी के मिल सकें। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज हर महीने जिला नाजिर से रिपोर्ट लेंगे और वारंट की तामीली की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे।

प्रदेश की निचली अदालतों में सालों से लंबित पड़े डिक्री के निष्पादन के मामलों को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने राज्य की सभी जिला अदालतों के लिए नए प्रैक्टिस डायरेक्शन जारी किए हैं, जिसके तहत अब नए मामलों का निपटारा अधिकतम 6 महीने के भीतर करना अनिवार्य होगा।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पेरियम्मल विरुद्ध वी. राजामणि मामले में देशभर के हाई कोर्ट को आदेश जारी किया था। सुप्रीम के आदेश के परिपालन में यह आदेशजारी किया गया है। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव द्वारा जारी इस आदेश में कहा है कि डिक्री धारकों को उनके कानूनी अधिकारों का लाभ बिना किसी देरी के मिलना चाहिए। लिहाजा कोर्ट में पेश होने वाले एक्जीक्यूशन के नए मामलों को 6 महीने के भीतर निपटाना होगा। कोर्ट में लंबित सभी पुराने मामलों की पहचान कर उनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

हर माह होगी समीक्षा, प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को मिली जिम्मेदारी

जिले के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज हर महीने लंबित मामलों और उनकी प्रगति की समीक्षा करेंगे। कुर्की और कब्जे के वारंट की तामीली में होने वाली देरी को रोकने के लिए जिला नाजिर से हर महीने रिपोर्ट मांगी जाएगी। कोर्ट स्टाफ के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वारंट की तामीली और नीलामी जैसी प्रक्रियाएं पूरी हो सकें।

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