RTE की सीटों में भारी कटौती, सरकार और निजी स्कूलों की मनमानी पर हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी, सरकार से मांगा जवाब

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार RTE के तहत आरक्षित सीटों में भारी कटौती और प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को लेकर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताई है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को अगली सुनवाई तक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

Update: 2026-03-27 08:56 GMT

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बिलासपुर। 27 मार्च 2026|छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार RTE के तहत आरक्षित सीटों में भारी कटौती और प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को लेकर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताई है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को अगली सुनवाई तक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। बता दें, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव आईएएस सिद्धार्थ कोमल सिंह परेदशी को केंद्र सरकार ने विधानसभा चुनाव के लिए आब्जर्वर बना दिया है।

RTE सीटों का गणित: 28 हजार से ज्यादा सीटें गायब!

जनहित याचिका की ​सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया, शैक्षणिक सत्र 2021-22 में प्रदेश में RTE के तहत 83,006 सीटें उपलब्ध थीं, जो सत्र 2023-24 में घटकर 55,266 रह गईं। याचिकाकर्ता भगवंत राव के अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने अदालत को बताया, केवल एक वर्ष में 28,583 सीटों की कटौती कर दी है, इसके चलते हजारों बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए विधि अधिकारी ने कहा, अब प्री-प्राइमरी स्तर पर RTE प्रवेश नहीं दिए जा रहे हैं ,क्योंकि अधिनियम 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए है, लेकिन कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को पिछले रिकॉर्ड के मुकाबले विरोधाभासी पाया है।

बता दें, पिछली सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने अंतिम तिथि 11 मार्च 2026 को राज्य सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था, जब आरटीई के तहत 85,000 आरक्षित सीटें थीं, तो 30,000 आरक्षित सीटों की कमी क्यों की गई थी और छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस संबंध में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।

पढ़िए उप महाधिवक्ता ने क्या जवाब दिया?

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए उप महाधिवक्ता ने बताया, उपरोक्त निर्देश के अनुपालन में स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा 21 मार्च 2026 को एक हलफनामा दाखिल किया गया है। उन्होंने निवेदन किया कि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पर्यवेक्षक के रूप में चुनाव ड्यूटी पर लगाया गया है और उन्हें असम राज्य में पर्यवेक्षक के रूप में अपने निर्धारित पद पर रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है, इसलिए वे स्वयं हलफनामा दाखिल नहीं कर सके और इसके स्थान पर संयुक्त सचिव ने हलफनामा दाखिल किया है, जिसे अभिलेख में शामिल किया जाए। कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को जवाब पेश करने के लिए छूट देते हुए संयुक्त सचिव द्वारा दायर हलफनामे को रिकॉर्ड में लेने का निर्देश दिया।

हलफनामा में दी इस प्रकार की जानकारी

  • कृष्णा पब्लिक स्कूल से संबंधित शिकायतों के संदर्भ में, दुर्ग के जिला शिक्षा अधिकारी ने 20 फरवरी 2026 के पत्र के माध्यम से सूचित किया है कि कृष्णा एजुकेशन सोसाइटी दुर्ग जिले में 4 स्कूल संचालित कर रही है, और ये सभी स्कूल आवश्यक अनुमतियां और मान्यता प्राप्त करने के बाद संचालित हो रहे हैं। 20 फरवरी 2026 के पत्र की प्रति संलग्नक के रूप में संलग्न है।
  • बिलासपुर जिले में कृष्णा पब्लिक स्कूल द्वारा संचालित विद्यालयों के संबंध में, जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर ने 16 मार्च 2026 के पत्र द्वारा सूचित किया है कि बिलासपुर में कृष्णा पब्लिक स्कूल द्वारा संचालित 3 विद्यालय हैं और वे विभाग द्वारा विधिवत मान्यता प्राप्त हैं, जिनमें से कृष्णा पब्लिक स्कूल, कोनी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, दिल्ली से संबद्ध है।
  • ड्रीम लैंड हायर सेकेंडरी स्कूल के संबंध में, उनके खिलाफ जांच चल रही है, जिसके विरुद्ध उन्होंने माननीय न्यायालय में याचिका दायर की है, जहां मामला विचाराधीन है और उनकी मान्यता का नवीनीकरण नहीं किया गया है।
  • नारायण ई टेक्नो स्कूल के संबंध में, इस संस्था के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त हुई हैं और जांच के बाद उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे उक्त विद्यालय द्वारा जमा कर दिया गया है और उसके बाद उक्त विद्यालय को मान्यता प्रदान की गई है।
  • रायपुर जिले में संचालित कृष्णा पब्लिक स्कूल के विद्यालयों के संबंध में, रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इसकी जांच की गई थी और जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर द्वारा 18 मार्च 2026 के पत्र के माध्यम से सूचित किया गया है कि, 6 विद्यालय हैं।
  • रायपुर जिले में कृष्णा ग्रुप द्वारा संचालित स्कूलों में से, जिनमें से 4 स्कूल कृष्णा किड्स एकेडमी सुंदर नगर, कृष्णा किड्स एकेडमी न्यू राजेंद्र नगर, कृष्णा किड्स एकेडमी कचाना और कृष्णा किड्स एकेडमी शैलेंद्र नगर, जो नर्सरी से के.जी. II तक की कक्षाएं संचालित करते हैं, मान्यता प्राप्त नहीं हैं। हालांकि, मान्यता के लिए उनके आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में उपलब्ध हैं। 18 मार्च 2026 के पत्र की प्रति संलग्नक-सी/3 के रूप में संलग्न है।

इसलिए सीटों में हुई कटौती

आरक्षित सीटों में कमी के संबंध में, आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पूर्व-प्राथमिक स्तर पर शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रवेश नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम केवल 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों पर लागू होता है (बच्चों के निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के उद्देश्यों एवं कारणों के विवरण का संदर्भ दिया जाता है)। परिणामस्वरूप, पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में के.जी. द्वितीय में प्रवेश पाने वाले 35,335 बच्चे आगामी शैक्षणिक सत्र में कक्षा प्रथम में प्रवेश लेंगे। इसके अतिरिक्त, आगामी शैक्षणिक सत्र में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रवेश के लिए आरक्षित कुल 19540 सीटें कक्षा प्रथम में प्रवेश लेंगी। अतः, शिक्षा के अधिकार अधिनियम के कोटे के अंतर्गत कुल 54875 बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। इसलिए, यह बात सही नहीं है कि 30,000 सीटों की कमी होगी, जैसा कि याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई की अंतिम तिथि पर प्रस्तुत किया था।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने ये कहा

याचिकाकर्ता के विद्वान अधिवक्ता देवर्षी ठाकुर ने इस न्यायालय का ध्यान राज्य द्वारा 10 जून 2024 को पारित आदेश के अनुपालन में 20 जून 2024 को दायर हलफनामे की ओर आकर्षित किया है। यह हलफनामा रायपुर के अतिरिक्त निदेशक, लोक शिक्षा विभाग के जेपी. रथ द्वारा शपथपूर्वक दिया गया था। उक्त हलफनामे के साथ एक चार्ट संलग्न किया गया है, जिसमें शैक्षणिक सत्र 2021-2022, 2022-2023 और 2023-2024 के लिए अल्पसंख्यक वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के छात्रों को प्रवेश हेतु आवंटित सीटों की जिलावार कुल संख्या दर्शाई गई है। आरटीई के तहत उपलब्ध सीटों की तुलना करने पर, सत्र 2021-2022 के लिए 83,006 सीटें थीं, जबकि सत्र 2023-24 के लिए आरटीई के तहत उपलब्ध कुल सीटें 55,266 हैं। इस प्रकार, राज्य द्वारा उपरोक्त दायर हलफनामा विरोधाभासी प्रतीत होता है। अधिवक्ता ठाकुर ने बताया कि उपरोक्त हलफनामे के जवाब में उन्होंने 28. जून 2024 को एक प्रतिउत्तर दाखिल किया था। प्रतिउत्तर के पैराग्राफ 22 में कहा गया है कि एक ही वर्ष में आरक्षित सीटें 83,849 से घटकर 55,266 हो गईं, यानी 28,583 सीटें कम हो गईं, जिसका अर्थ है कि स्कूलों में लगभग 1,37,215 बच्चे कम हो गए हैं।

अधिवक्ता देवर्षि ने बड़ी गड़बड़ी की ओर कोर्ट का दिलाया ध्यान

अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने राज्य द्वारा 10 जुलाई 2025 को दायर हलफनामे की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसमें विभिन्न जिलों के निजी विद्यालयों के विरुद्ध शिकायत के संबंध में, श्री शंकर विद्यालया, सेक्टर-10, भिलाई के विरुद्ध मान्यता को लेकर शिकायत दर्ज की गई थी। उक्त शिकायत लंबित बताई गई है, जबकि शिकायत यह थी कि राज्य ने विद्यालय की मान्यता इस तथ्य पर ध्यान दिए बिना प्रदान की कि विद्यालय का कोई भवन अस्तित्व में ही नहीं था और यह केवल कागजों पर ही थी। जब भवन अस्तित्व में ही नहीं था, तो राज्य किसी विद्यालय को मान्यता कैसे दे सकता है? राज्य का आचरण दर्शाता है कि राज्य ऐसे विद्यालयों को अवैध गतिविधियों में सहयोग दे रहा है।

पढ़िए डिवीजन बेंच ने क्या दिया निर्देश

जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को अगली सुनवाई की तारीख से पहले शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 8 अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

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