Bilaspur Highcourt News: शराब घोटाला: एसीबी–ईओडब्ल्यू को सौम्या के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई ना करने का निर्देश

Bilaspur Highcourt: एसीबी–ईओडब्ल्यू की गिरफ्तारी से बेचने सौम्या ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। तब तक दंडात्मक कार्रवाई ना करने का निर्देश एसीबी–ईओडब्ल्यू को दिया है।

Update: 2026-01-08 16:34 GMT

Bilaspur Highcourt: बिलासपुर। शराब घोटाला मामले में ईडी के बाद एसीबी–ईओडब्ल्यू की संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव रही राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी रहीं सौम्या चौरसिया ने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। इस मामले में आज जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के पश्चात अदालत ने अपना फैसला 13 जनवरी तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। तब तक के लिए एसीबी–ईओडब्ल्यू को सौम्या के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई ना करने का के निर्देश दिया हैं।

बता दे राज्य में शराब नीति बदल कर 3200 करोड रुपए का शराब घोटाला किया गया था इससे शासन के खजाने को 3200 करोड रुपए नुकसान होने का अनुमान है। इस मामले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के सचिव रहे निरंजन दास, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, आबकारी विभाग के ओएसडी रहे अरविंद सिंह को गिरफ्तार किया था। इस मामले को पहले दो हजार करोड़ रुपए का घोटाला माना जा रहा था। पर जैसे जैसे ईडी की जांच आगे बढ़ी घोटाले का आंकड़ा बढ़ता गया।

ईडी द्वारा की गई जांच से पता चला कि वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक हस्तियों से जुड़े एक आपराधिक सिंडिकेट ने छतीसगढ़ आबकारी विभाग को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया था। निरंजन दास (तत्कालीन आबकारी आयुक्त) और अरुणपति त्रिपाठी (तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीएसएमसीएल) ने एक समानांतर आबकारी प्रणाल चलाई, जिसने राज्य के नियंत्रणों को दरकिनार करन हुए भारी मात्रा में अवैध कमाई की।

इस सिंडिकेट ने सरकारी दुकानों के जरिए अवैध, गैर कानूनी देसी शराब बनाने और बेचने की "पार्ट-बी योजना चलाई। इस अवैध शराब का उत्पादन औ बिक्री नकली होलोग्राम और गैर-कानूनी बोतलों क इस्तेमाल करके की जाती थी और इसे सरकारी गोदाम को दरकिनार करते हुए सीधे शराब बनाने की भट्टियों स दुकानों तक पहुंचाया जाता था। यह धोखाधड़ी उत्त उत्पाद शुल्क अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत साजिश से की गई थी।

ईडी ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को भी गिरफ्तार किया था जहां से उन्हें 163 दिनों बाद जमानत मिली। अब ईडी ने इसी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रहीं राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अफसर सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया था। अब इसी मामले में एसीबी– ईओडब्ल्यू भी कार्यवाही करने वाली है। इसलिए संभावित कार्यवाही और गिरफ्तारी से बचने सौम्या ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। मामले में कल 7 जनवरी को सुनवाई हुई थी पर शासन का पूरा जवाब नहीं आने के चलते आज का समय अदालत ने राज्य शासन को दिया था। आज मामले की सुनवाई में शासन और सौम्या के वकीलों ने लंबे समय तक अपना पक्ष रखा दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने मामले को 13 जनवरी के लिए सुरक्षित रख लिया है तब तक के एसीबी और ईओडब्ल्यू को नो कोरेसिव स्टेप के निर्देश दिए हैं।

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