रायपुर के इस भीड़भाड़ वाले इलाके में छिपी है 500 साल पुरानी बावड़ी, जानकर रह जाएंगे हैरान

Jaitusav Math Bawdi: छत्तीसगढ़ के पुरानी बस्ती के जैतूसाव मठ में 500 साल पुरानी बावड़ी स्थित है. जिसमे से भगवान हनुमान की चार मुतिययाँ निकली है. 500 साल पहले जब पानी के लिए बावड़ी की खुदाई की जा रही थी तो तब इसमें से तीन मूर्तियां निकली थी. एक मूर्ति बावड़ी में, दूसरी मूर्ति दूधाधारी मठ में और तीसरी मूर्ति गुढ़ियारी के मच्छी तालाब के दक्षिणामुखी हनुमान मंदिर में हैं.

Update: 2026-02-20 04:05 GMT

फोटो सोर्स- इंटरनेट 

Jaitusav Math Bawdi: रायपुर, छत्तीसगढ़ की धरती प्राकृतिक सुंदरता के लिए तो जानी ही जाती हैं साथ ही यह ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए भी यह विशेष महत्व रखता है. यहाँ कई प्राचीन और ऐतिहासिक इमारतें मंदिर हैं जिनकी अपनी अनोखी कहानी और मान्यता है. ऐसी ही प्राचीन बावड़ी राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित जैतूसाव मठ में है. यह करीब 500 साल पुरानी है. बावड़ी में हनुमान जी की प्रतिमा है. इसे बावड़ी वाले हनुमान जी भी कहा जाता है. बावड़ी से अबतक हनुमान जी चार मूर्ति निकली है. इस बावड़ी से जुड़ी और भी कई मान्यताएं और रोचक जानकारी हैं जो आपको दंग कर देगी.

रायपुर में कहाँ स्थित है बावड़ी

यह बावड़ी पुरानी बस्ती के जैतूसाव मठ में स्थित है. जैतूसाव मठ की स्थापना साल 1887 में उमा बाई ने किया गया था. राजस्थान के कारीगरों ने इसे सात साल में बनाया था. इसकी काफी ऐतिहासिक महत्व है. इस मठ में राम, लक्ष्मण, जानकी, राधा-कृष्ण की पूजा होती है.  इसी मठ में 500 साल पुरानी बावड़ी भी है. जिसमे से भगवान हनुमान की चार मुतिययाँ निकली है. 

कितनी मूर्ति बावड़ी से निकली 

रायपुर के पुरानी बस्ती की बावड़ी को लेकर स्थानीय लोगों की कई मान्यताएं हैं. कहा जा जाता है 500 साल पहले जब पानी के लिए बावड़ी की खुदाई की जा रही थी तो बजरंगबली की तीन प्रतिमा निकली थी. जिसके बाद ग्रामीण बजरंगबली और प्रभु राम का चमत्कार बताया.

 बावड़ी से निकली मूर्ति कहाँ कहाँ हैं

लोगों ने बजरंग बली की तीनों प्रतिमाएं अलग अलग इलाके स्थापित कर दी. एक प्रतिमा बावड़ी के बगल में ही स्थापित किया गया है. बावड़ी में स्थापित हनुमान जी को बावड़ी वाले हनुमान जी कहा जाता है. दूसरी मूर्ति रायपुर के ही प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल दूधाधारी मठ में रखी गयी है. यह मठ 500 साल पुराना है. मान्यता है दूधाधारी मठ में हनुमान जी की स्वंयम्भू मूर्ति है. इस मूर्ति का आकार हर साल बढ़ता जाए रहा है. तीसरी मूर्ति गुढ़ियारी के मच्छी तालाब के दक्षिणामुखी हनुमान मंदिर में हैं. यह दक्षिणमुखी हनुमान के नाम से प्रसिद्ध है. तीनों प्रतिमाओं से लोगों की श्रद्धा जुडी है. हर साल हजारों भक्त यहाँ पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं.

बावड़ी से चौथी मूर्ति कब निकली 

साल 2023 में इस बावड़ी से एक प्रतिमा निकली. स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले 100-150 सालों से बावली की सफाई नहीं हुई थी. साल 2023 में बावड़ी की सफाई कराई गयी. जब बावड़ी की सफाई की जा रही थी तो दीवार पर हनुमान जी की आकृति नजर आयी. जिसके बाद से यहाँ भक्तों का तांता लगने लगा. 




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