Bilaspur High Court: कर्मचारियों की खबर: इसलिए सेवानिवृति लाभ से कर्मचारियों को नहीं कर सकते वंचित, हाई कोर्ट का आया महत्वपूर्ण फैसला

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को विभागीय जांच में दंडित किए बिना सेवानिवृति लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता

Update: 2026-03-08 06:05 GMT

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बिलासपुर।8 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को विभागीय जांच में दंडित किए बिना सेवानिवृति लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। रिटायर्ड प्रिंसिपल के मामले में हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने रिटायर्ड प्रिंसिपल के मामले में पेंशन कमेटी के आदेश को रद्द कर समस्त सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने का आदेश दिया है। बता दें कि रिटायर्ड प्रिंसिपल की मृत्यु के बाद पत्नी ने यह मुकदमा लड़ा।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को विभागीय जांच में दंडित किए बिना सेवानिवृति लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। रिटायर्ड प्रिंसिपल के मामले में हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने रिटायर्ड प्रिंसिपल के मामले में पेंशन कमेटी के आदेश को रद्द कर समस्त सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने का आदेश दिया है। बता दें कि रिटायर्ड प्रिंसिपल की मृत्यु के बाद पत्नी ने यह मुकदमा लड़ा।

याचिकाकर्ता मीरा वर्मा के पति जीएस वर्मा जवाहरलाल नेहरु महाविद्यालय सक्ती से प्रिंसिपल के पद से 30 नवंबर 2009 को सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद सेवा लाभ न मिलने पर उन्हाेंने उच्च स्तरीय पेंशन कमेटी के समक्ष अभ्यावेदन पेश किया था। उच्च स्तरीय पेंशन समिति ने सेवानिवृत्ति लाभ हेतु उनका आवेदन खारिज कर दिया।

समिति ने कहा, आवेदक के विरुद्ध ऑडिट आपत्ति दर्ज होने से सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिया जा सकता। प्रिंसिपल वर्मा की मृत्यु के पश्चात उनकी ओर से पत्नी मीरा वर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने पैरवी करते हुए कोर्ट से कहा, केवल ऑडिट आपत्ति के आधार पर सेवानिवृत्ति लाभ से वंचित नहीं किया जा सकत। रिटायर्ड प्रिंसिपल जीएस वर्मा के विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित नहीं की गई थी, विधिवत आरोप पत्र नहीं दिया गया और न ही उनके विरुद्ध दंडादेश जारी किया गया।

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, किसी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति लाभ से तब तक वंचित नहीं किया जा सकता जब तक उसे विधिवत संस्थित विभागीय जांच में दोषसिद्ध नहीं किया जाए। हाई कोर्ट ने पेंशन कमेटी के आदेश को रद्द कर समस्त सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने का आदेश दिया है।

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