CG Naxal: छत्तीसगढ़ की नक्सल हिंसा में शहीद 1425 जवानों में सर्वाधिक CG, UP, बिहार, MP और राजस्थान के, शहीद वाटिका में नाम लिखने दीवारें छोटी पड़ गई

CG Naxal: इस खबर में शहीद वाटिका की तस्वीर देखकर आप हिल जाएंगे। बस्तर को नक्सलियों के चंगुल से मुक्त कराने सैकड़ों जवानों ने अपना खून बहाया, 2006 में उनका नाम शहीद वाटिका के दीवारों पर लिखा जाना शुरू हुआ। मगर 2006 से 2021 तक छुपकर वार करने वाले नक्सलियों ने ऐसा तांडव मचाया कि वीर जवानों के लिए शहीद वाटिका की दीवारें छोटी पड़ने लगी। अब जब, दो दिन बाद छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त होने जा रहा है। खुशी और राहत के ऐसे मौके पर नक्सल हिंसा में अपने छत्तीसगढ़ राज्य के लिए जान गंवाने वाले शहीद जवानों को भी यादें करना चाहिए। नीचे पढ़िये छत्तीसगढ़ को लाल आतंक से मुक्ति दिलाने देश के 27 राज्यों और नेपाल के कितने जवानों ने शहादत दी...

Update: 2026-03-29 12:00 GMT

CG Naxal: रायपुर। छत्तीसगढ़ दो दिन बाद नक्सल मुक्त हो जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 का डेडलाइन दिया है। पिछले दो सालों में या तो अधिकांश नक्सली और उनके लीडर मुठभेड़ों में मार दिए गए या फिर सरेंडर कर दिए हैं। पुलिस अफसरों का दावा है, अब इक्का-दुक्का नक्सली ही बचे होंगे। लिहाजा, 31 मार्च को छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त घोषित कर दिया जाएगा।


छत्तीसगढ़़ के दिवंगत डीजीपी विश्वरंजन नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले वीर जवानों को लेकर बड़े संवेदनशील थे। 6 अप्रैल 2010 को उनके कार्यकाल में ही बस्तर के ताड़़मेटला में नक्सलियों ने एंबुश लगाकर सीआरपीएफ के 75 जवानों समेत 76 फोर्सेज को मार डाला था। विश्वरंजन ने 2011 में पहल कर राजधानी रायपुर के उर्जा पार्क में शहीद वाटिका का निर्माण कराया। जनवरी 2012 में इसका काम पूरा हुआ। मगर 2021 आते-आते देश के वीर जवानों के नामों से शहीद वाटिका की दीवारें छोटी पड़ने लगी।

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25 साल में 1425 जवान शहीद

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 2001 से 2025 तक 25 सालों में 1425 जवानों ने नक्सल हिंसा में अपनी शहादत दी। इनमें छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ ही सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, नगा बटालियन शामिल हैं। इन 1425 जवनों में सबसे बड़ी घटना ताड़मेटला की है, जहां ऑपरेशन से लौट रहे सीआरपीएफ के जवानों पर माओवादियों ने छुपकर वार किया।


इस घटना में थके-हारे आराम कर रहे सीआरपीएफ के 75 जवान शहीद हो गए थे। रानीबोदली में 55 जवाना शहीद हुए तो एर्राबोर कैंप में हमला कर नक्सलियों ने 35 जवानों को मार डाला था। इस घटना में कई सिविलयन की भी मौतें हुई थीं।

एसपी समेत कई पुलिस अफसरों को खोया छत्तीसगढ़ ने

नक्सल हिंसा में छत्तीसगढ़ के एक पुलिस अधीक्षक, दो एडिशनल एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर शहीद हो गए। 12 जुलाई 2012 में राजनांदगांव के एसपी विनोद चौबे नक्सलियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे।


विनोद चौबे ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने जख्मी ड्राईवर को अस्पताल पहुंचाया। फिर बाकी जवानों को बचाने फिर से मुठभेड़ स्थल पर लौट गए। उन्होंने कई नक्सलियों को अपने एके-47 से मार गिराया। मगर इस हिला देने वाली हिंसा में वे भी शहीद हो गए।


सबसे अधिक सीआरपीएफ के जवान शहीद

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर, सरगुजा में पैरा मिलिट्री फोर्सेज में सबसे अधिक सीआरपीएफ की करीब 40 बटालियन तैनात थी। पैरा मिलिट्री फोर्सेज में सबसे अधिक नुकसान सीआरपीएफ को उठाना पड़ा। 25 सालों में सीआरपीएफ के 457 जवान और अफसर शहीद हुए।


छत्तीसगढ़ के 861 जवान

छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त करने में छत्तीसगढ़ के वीर जवानों ने भी अदम्य साहस का परिचय दिया। नक्सलियों के साथ मुठभेड़ों में सबसे अधिक छत्तीसगढ़ के 861 जवानों ने अपनी माटी के लिए जान गंवाई। इनमें छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ ही छत्तीसगढ़ के विभिन्न पैरा मिलिट्री फोर्सेज में तैनात जवान शामिल हैं।


यूपी, बिहार, एमपी और राजस्थान के जवान

छत्तीसगढ़ को लाल आतंक से मुक्त कराने हुए संघर्षों में दूसरे प्रदेशों के जवानों ने भी अपनी कुर्बानियां दी। इनमें उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है। यूपी के सबसे अधिक 129 जवान नक्सल हिंसा में शहीद हुए। दूसरे नंबर पर बिहार है। बिहार के 57 जवानों ने अपना खून बहाया। एमपी के 47, राजस्थान के 34 जवानों ने अपनी शहादत दी।


किस राज्य के कितने जवानों ने दी शहादत

1. आंध्रप्रदेश-23

2. असम-27

3. बिहार-57

4. छत्तीसगढ़-824

5. गुजरात-5

6. हरियाणा-28

7. हिमाचल प्रदेश-9

8. जम्मू-कश्मीर-19

9. झारखंड-15

10. कर्नाटक-16

11. केरल-15

12. मध्यप्रदेश-47

13. महाराष्ट्र-25

14. मणिपुर-4

15. मेघालय-1

16. मिजोरम-9

17. नागालैंड-20

18. नेपाल-2

19. नई दिल्ली-2

20. ओड़िसा-27

21. पंजाब-13

22. राजस्थान-34

23. तमिलानाडू-26

24. तेलांगना-1

25. त्रिपुरा-3

26. उत्तर प्रदेश-129

27. उत्तराखंड-17

28. वेस्ट बंगाल-13

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