Bilaspur High Court: गजब का डीईओ कार्यालय: हाई कोर्ट में याचिका दायर होते ही बैक डेट में जारी कर दिया पोस्टिंग आदेश, नाराज हाई कोर्ट ने डीईओ काे किया तलब....

Bilaspur High Court: युक्तियुक्तकरण में फर्जीवाड़ा की कहानी अब भी जारी है। एक हेड मास्टर ने जब हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पदस्थापना की मांग की,तब आनन-फानन में डीईओ ने बैकडेट की फाइल चला दी।

Update: 2026-02-08 06:15 GMT

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8 February 2026|बिलासपुर। युक्तियुक्तकरण में फर्जीवाड़ा की कहानी अब भी जारी है। एक हेड मास्टर ने जब हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पदस्थापना की मांग की,तब आनन-फानन में डीईओ ने बैकडेट की फाइल चला दी। जिस दिन याचिका दायर हुई उसके एक दिन पहले की तारीख पर याचिकाकर्ता शिक्षिका के लिए पोस्टिंग आदेश जारी कर दिया। गड़बड़ी तो आखिर गड़बड़ी है, पकड़ में आ गई। इस तरह की गड़बड़ी को लेकर नाराज हाई कोर्ट ने डीईओ को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत उपस्थित होने और गड़बड़ी को लेकर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर डीईओ कार्यालय ने तो गजब ही कर दिया है। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया और पुरानी फाइल पर अब तक कार्रवाई ना होने की जानकारी देते हुए मिडिल स्कूल की हेड मास्टर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका दायर होने की जानकारी डीईओ सहित कार्यालयीन अधिकारियों को लगी। याचिकाकर्ता ने डीईओ को पक्षकार बनाया था। याचिका दायर होने की जानकारी मिलते ही डीईओ कार्यालय में शुरू हुआ अपना पुराना खेल। बैकडेट की फाइल चला दी। पदस्थापना आदेश जारी कर दिया। वह भी कब की तिथि, जिस दिन याचिका दायर हुई उसके ठीक एक दिन पहले की डेट में पोस्टिंग आर्डर जारी कर दिया। अब यही चालाकी डीईओ को भारी पड़ने वाली है। हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 11 फरवरी की तिथि तय कर दी है।

क्या है मामला

शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कन्या, तारबाहर में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ चित्ररेखा तिवारी को युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के तहत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गतौरा विकासखंड, मस्तूरी में पदस्थापना दी गई थी। इस स्कूल में हेड मास्टर पहले से ही पदस्थ थे। लिहाजा चित्ररेखा तिवारी तारबाहर मिडिल स्कूल में ही सेवाएं देने लगी। इस बात की जानकारी उन्होंने डीईओ सहित जिला स्तरीय समिति को दी और पदस्थापना की मांग की। आवेदन के बाद भी जब पदस्थापना आदेश जारी नहीं हुआ तब उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हेड मास्टर चित्ररेखा तिवारी की याचिका हाई कोर्ट में 31 जनवरी को रजिस्टर्ड की गई।

डीईओ कार्यालय ने कुछ ऐसे किया खेला

हाई कोर्ट में याचिका दायर होने की जानकारी मिलते ही डीईओ ने बैकडेट में याचिकाकर्ता हेड मास्टर का पोस्टिंग आर्डर जारी कर दिया। डीईओ कार्यालय ने 30 जनवरी के डेट में पदस्थापना आदेश जारी कर दिया। चालाकी काम नहीं आई और डीईओ कटघरे में खड़े हो गए।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने डीईओ कार्यालय की गड़बड़ी को लाया सामने

याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य शासन के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता हेड मास्टर की पदस्थापना आदेश डीईओ कार्यालय ने पहले ही जारी कर दिया है। पदस्थापना आदेश की कॉपी पेश करते हुए अधिवक्ता ने बताया कि 30 जनवरी को फरहदा मिडिल स्कूल के लिए पोस्टिंग आर्डर जारी किया गया है। आर्डर में जारी डेट को देखने के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कोर्ट को बताया, कोर्ट में याचिका 31 जनवरी को रजिस्टर्ड हुआ है। डीईओ को इस बात की जानकारी नहीं थी कि याचिका कब रजिस्टर्ड हुआ है,लिहाजा कोट को गुमराह करने के लिए बैकडेट में पोस्टिंग आर्डर जारी कर दिया गया है। यह सीधा-सीधा फर्जीवाड़ा का मामला है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के खुलासे के बाद नाराज कोर्ट ने डीईओ को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 11 फरवरी की तिथि तय कर दी है।

इधर जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे का कहना है, पदस्थापना आदेश 30 जनवरी को जारी किया गया है। 31 जनवरी एवं एक फरवरी को अवकाश होने के कारण एक दिन पहले आदेश जारी किया गया है।

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