इंसानियत की मिसाल: किसान को खेत में आसहाय पड़ा मिला दुर्लभ उल्लू का बच्चा, मिली नई जिंदगी

CG News: छत्तीसगढ़ के बिझरा गांव में उल्लू की दुर्लभ प्रजाति Mottled Wood Owl का शावक मिला है. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम नें पहुंंचकर रेस्कयू किया.

Update: 2026-03-01 13:32 GMT

1 मार्च 2026  छत्तीसगढ़ के बिझरा गांव से एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई. गांव के किसान मुकेश सोरी (छुरी पांडेय) जब अपने खेत में पहुंचे तो उन्हें महुआ पेड़ के नीचे एक छोटा सा उल्लू का बच्चा बैठा दिखा, जो उड़ नहीं पा रहा था. उल्लू के बच्चे की ऐसी हालत देखकर मुकेश ने उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय इंसानियत दिखाते हुए तुरंत वन विभाग को सूचना दी.

जानकारी मिलते ही वन मंडल अधिकारी कुमार निशांत के निर्देशन में टीम मौके पर पहुंची, सावधानी से बच्चे को उठाकर सुरक्षित संरक्षण में लिया गया. जांच में पता चला कि यह दुर्लभ प्रजाति Mottled Wood Owl का शावक है, जिसकी लंबाई करीब 45 सेंटीमीटर और वजन लगभग 700 ग्राम है. विशेषज्ञ का कहना हैं कि यह उल्लू रात में सक्रिय रहता है और खेतों में चूहों जैसे हानिकारक जीवों को खाकर किसानों की मदद करता है. यही कारण है कि यह प्रजाति कानून के तहत संरक्षित है.

इस रेस्क्यू में परिसर रक्षक रॉबिन भारद्वाज और परिक्षेत्र सहायक मोहन ठाकुर की सराहनीय भूमिका रही. वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि कोई वन्यजीव असहाय दिखे तो उसे छेड़ें नहीं, बल्कि तुरंत सूचना दें. 

जानिए क्यों खास है मोटल्ड वुड आउल

Mottled Wood Owl साधारण उल्लू नहीं है, ये उल्लू जंगलों की एक अनमोल धरोहर है. इसके भूरे-धब्बेदार पंख इसे पेड़ों की छाल में छिपा देते हैं. इनके शरीर में बने पंखो के इसी डिजाइन की वजह से इसे दिन में इसे पहचान पाना आसान नहीं होता. रात होते ही इसकी डरावनी गूंजती आवाज जंगल में अलग ही माहौल बना देती है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की 2016 से इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्सेर्वटिव ऑफ़  नेचर यानी (IUCN) ने इसे अपनी रेड लिस्ट में विलुप्तप्राय श्रेणी में रखा है, क्योंकि इसके रहने के स्थान कम हो रहे हैं और अवैध शिकार का खतरा बना रहता है. भारत में इसे भारतीय वन्य जीव अधिनियम, 1972 की अनुसूची-एक के तहत कड़ी कानूनी सुरक्षा मिली हुई है. अगर आपके आस-पास भी कोई इस प्रजाती के उल्लू का शिकार, तस्करी या इसे पालतू बनाता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, इसके लिए कम से कम 3 साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है. दुनिया भर में उल्लुओं की लगभग 225 प्रजातियां हैं, लेकिन यह प्रजाति अपनी दुर्लभता और संरक्षण की जरूरत के कारण खास मानी जाती है.

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