CG Teacher News: पेंशन को लेकर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: शिक्षाकर्मियों में जगी उम्मीद, 'पुरानी सेवा' की गणना कर पेंशन देने की उठने लगी मांग

CG Teacher News: बिलासपुर हाई कोर्ट ने पेंशन की मांग को लेकर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पक्ष में सुनाए गए एक बड़े फैसले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

Update: 2026-03-25 14:54 GMT

CG Teacher News: ​बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने पेंशन की मांग को लेकर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पक्ष में सुनाए गए एक बड़े फैसले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है, यदि किसी कर्मचारी की सेवा नियमित हो जाती है, तो उसकी पेंशन गणना में दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई पिछली सेवा अवधि को भी जोड़ा जाएगा।

​इस फैसले के बाद अब पूर्व शिक्षाकर्मियों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका तर्क है, उनकी नियुक्ति भी रिक्त पदों के विरुद्ध हुई थी,लिहाजा उन्हें भी इस निर्णय के दायरे में लाकर पुरानी सेवा का लाभ मिलना चाहिए।

पढ़िए क्या है पूरा मामला?

​लोक निर्माण विभाग PWD के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के मामले में राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट के अनुसार, सेवा के नियमितीकरण के बाद पुरानी सेवा को शून्य नहीं माना जा सकता। इसे पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के लिए 'क्वालिफाइंग सर्विस' में गिना जाना अनिवार्य है।

शिक्षाकर्मियों का तर्क: "हमारी स्थिति भी समान

​सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय का कहना है, शिक्षाकर्मियों की भर्ती भी स्वीकृत और रिक्त शिक्षकों के पदों के विरुद्ध की गई थी। जब दैनिक वेतन भोगी सेवा को पेंशन योग्य माना जा सकता है, तो शिक्षाकर्मियों द्वारा की गई 10 से 20 वर्षों की सेवा को पेंशन निर्धारण और क्रमोन्नति में क्यों नहीं जोड़ा जा रहा? सरकार को इस कानूनी स्थिति को स्वीकार करते हुए स्वयं संज्ञान लेना चाहिए और शिक्षाकर्मियों के मामले में भी पुरानी सेवा की गणना के आदेश जारी करने चाहिए, ताकि उन्हें पूर्ण पेंशन एवं समयबद्ध क्रमोन्नति का लाभ मिल सके।

​निर्णय का संभावित प्रभाव

​यदि सरकार हाई कोर्ट के इस सिद्धांत को शिक्षाकर्मियों पर लागू करती है, तो ​पुरानी पेंशन OPS 2018 में संविलियन हुए शिक्षकों को 20-33 वर्ष की सेवा पूर्ण करने में आसानी होगी। साथ ही सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी और पेंशन राशि में भारी बढ़ोतरी होगी।पदोन्नति और क्रमोन्नति के रुके हुए मामलों का समाधान होगा।

प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि​"हाई कोर्ट के इस फैसले ने न्याय का नया मार्ग प्रशस्त किया है। जब दैनिक वेतन भोगियों की सेवा जुड़ सकती है, तो शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति तो विधिवत प्रक्रिया के तहत हुई थी। सरकार को बिना देरी किए शिक्षाकर्मियों की पुरानी सेवा की गणना का आदेश जारी करना चाहिए।

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