Bihar News: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में अहम भूमिका निभा रहीं बिहार की आर्द्रभूमियां, वर्तमान में 2.25 हेक्टेयर से बड़ी 4526 आर्द्रभूमियां चिन्हित

Bihar News: धरती की ‘किडनी’ कही जाने वाली आर्द्रभूमियां केवल दलदल, तालाब या झील तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि ये पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

Update: 2026-02-11 12:33 GMT

Bihar News: पटना, । धरती की ‘किडनी’ कही जाने वाली आर्द्रभूमियां केवल दलदल, तालाब या झील तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि ये पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये प्राकृतिक जल-क्षेत्र प्रदूषित पानी को छानकर उसे शुद्ध बनाते हैं और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक होते हैं। बिहार में मौजूद आर्द्र भूमियां न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं।

राज्य में वर्तमान में 2.25 हेक्टेयर से बड़ी कुल 4526 आर्द्र भूमियां चिन्हित की गई हैं, जिनमें से 4316 आर्द्रभूमियों का भू-सत्यापन पूरा किया जा चुका है। यह आंकड़ा राज्य में जल-पारिस्थितिकी तंत्र की व्यापकता और उसके संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।

आर्द्रभूमियां लाखों लोगों की आजीविका का सीधा साधन भी हैं। मछली पालन पर निर्भर बड़ी आबादी के लिए ये जीवनरेखा के समान हैं। इसके अतिरिक्त मखाना, जूट और सिंघाड़ा जैसी नकदी फसलों की खेती पूरी तरह इन्हीं जल-क्षेत्रों की पारिस्थितिकी पर आधारित है। इस प्रकार आर्द्रभूमियां पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती हैं।

ये जल-क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण में भी अहम योगदान देते हैं। देश-विदेश से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए बिहार की कई आर्द्रभूमियां हर वर्ष प्रमुख आश्रय स्थल बनती हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण इन क्षेत्रों का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

हाल ही में बिहार की तीन आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है, जिससे राज्य में कुल रामसर साइटों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। इनमें बेगूसराय की कांवर झील, जमुई की नागी–नकटी पक्षी आश्रयणी , कटिहार की गोगाबिल जलाशय, बक्सर का गोकुल जलाशय और पश्चिम चंपारण की उदयपुर झील शामिल हैं।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के सदस्य सचिव एस. चंद्रशेखर को तीन रामसर साइटों के लिए विशेष प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

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