Bihar News: “Evaluation in Government: Frameworks, Methods, and Reporting” विषय पर क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ

Bihar News: योजना एवं विकास विभाग के मूल्यांकन निदेशालय द्वारा “Evaluation in Government: Frameworks, Methods, and Reporting” विषय पर आयोजित एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह द्वारा किया गया।

Update: 2026-02-17 13:46 GMT

पटना|17 फरवरी 2026| योजना एवं विकास विभाग के मूल्यांकन निदेशालय द्वारा “Evaluation in Government: Frameworks, Methods, and Reporting” विषय पर आयोजित एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, योजना एवं विकास विभाग डॉ. एन. विजयलक्ष्मी, प्रधान सचिव मयंक बरबड़े तथा सचिव कंवल तनुज भी उपस्थित रहे।

यह प्रशिक्षण विशेष रूप से योजना एवं विकास विभाग के विभिन्न निदेशालयों के पदाधिकारियों एवं कर्मियों के लिए आयोजित किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य विभागीय योजनाओं के प्रभावी, पारदर्शी एवं साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन की प्रक्रिया को सुदृढ़ करना तथा अधिकारियों की विश्लेषणात्मक एवं प्रतिवेदन लेखन क्षमता का विकास करना है।

अपने उद्घाटन संबोधन में विकास आयुक्त ने कहा कि अक्सर योजनाओं के Intended Outcome (अपेक्षित परिणाम) और Final Outcome (वास्तविक अंतिम परिणाम) के बीच एक अंतर रह जाता है। इस अंतर को कम करने के लिए दो प्रमुख तत्वों की आवश्यकता है—पहला, सतत क्षमता निर्माण (Capacity Building) और दूसरा, नवाचार एवं सुधार के लिए आवश्यक जोखिम लेने का साहस (Taking Risk)। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी डेटा-आधारित निर्णय, निष्पक्ष मूल्यांकन और नवीन प्रयोगों को अपनाएँ, तो योजनाओं के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि योजना विभाग अन्य विभागों से इस दृष्टि से भिन्न है कि यह राज्य की सभी विकास योजनाओं का समेकित (Cumulative) दृष्टिकोण अपनाता है। विभाग विभिन्न विभागों की योजनाओं का समन्वय करता है तथा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (State GDP) का आकलन एवं प्रकाशन भी करता है। उन्होंने बताया कि मूल्यांकन निदेशालय की कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस पहल प्रारंभ की गई है।

इस कार्यक्रम में पूर्व विकास आयुक्त एस. सिद्धार्थ ने “Use of AI in Data Analysis, Interpretation & Reporting” विषय पर सत्र में विस्तृत संबोधन करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अधिकारियों को केवल तकनीकी रूप से दक्ष ही नहीं, बल्कि “AI Smart” भी होना आवश्यक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को समझना, उसे जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग मंि लाना तथा बड़े आंकड़ों के विश्लेषण, प्रवृत्तियों की पहचान, पूर्वानुमान आधारित योजना निर्माण तथा सटीक प्रतिवेदन तैयार करने में AI महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक तकनीक-सक्षम (Technology Enabled) बनाते हुए निर्णय प्रक्रिया को साक्ष्य-आधारित और परिणामोन्मुखी बनाएं।

कार्यक्रम के अन्य सत्रों में भी विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया गया। डॉ. हरेंद्र प्रसाद ने शासकीय मूल्यांकन की संकल्पना, उद्देश्य एवं ढांचे को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया। मनोज नारायण, स्टेट कंसल्टेंट, यूनिसेफ बिहार ने मूल्यांकन अध्ययन की योजना एवं डिज़ाइन तैयार करने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। डॉ. चंद्र सिंह ने सैम्पलिंग एवं डेटा संग्रहण की वैज्ञानिक विधियों को समझाया, जबकि डॉ. दिलीप कुमार ने डेटा विश्लेषण, निष्कर्षों की व्याख्या तथा प्रभावी प्रतिवेदन लेखन की तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम के अंत में दिनभर की प्रमुख सीखों का सार प्रस्तुत किया गया तथा प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए।

यह कार्यशाला विभाग के विभिन्न निदेशालयों के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करने, संस्थागत क्षमता को बढ़ाने तथा साक्ष्य-आधारित एवं तकनीक-सक्षम नीति निर्माण को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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