6 हजार की नौकरी करने वाले को मिला 2 करोड़ का नोटिस... प्राइवेट टीचर बोला- मैं गरीब आदमी, मुझे फंसाया जा रहा

Siddharthnagar GST Fraud Case : महीने के 6 हजार रुपये कमाने वाले एक गरीब प्राइवेट टीचर के पैरों तले तब जमीन खिसक गई, जब जीएसटी विभाग ने उसे 2 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस थमा दिया. जांच में पता चला कि किसी जालसाज ने उनके पैन कार्ड का इस्तेमाल कर दिल्ली और फर्रुखाबाद में फर्जी कंपनियां खोलकर करोड़ों का कारोबार किया है. फिलहाल पीड़ित युवक न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है.

Update: 2026-02-21 08:04 GMT

6 हजार की नौकरी करने वाले को मिला 2 करोड़ का नोटिस... प्राइवेट टीचर बोला- मैं गरीब आदमी, मुझे फंसाया जा रहा

Siddharthnagar 2 crore income tax notice : सिद्धार्थनगर : उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर किसी का भी सिर चकरा जाए. सोचिए, एक शख्स जो महीने भर पसीना बहाकर बमुश्किल 6-7 हजार रुपये कमाता हो, अगर उसे अचानक सरकार की तरफ से 2 करोड़ रुपये का टैक्स भरने का फरमान मिल जाए, तो उस पर क्या बीतेगी. डुमरियागंज तहसील के ओम प्रकाश वर्मा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसे देखकर वह और उनका परिवार सदमे में है.

डाक से आया नोटिस

भरवाठिया मुस्तकहम गांव के रहने वाले ओम प्रकाश वर्मा पेशे से एक प्राइवेट टीचर हैं. 10 फरवरी की तारीख उनके लिए किसी बुरे सपने की तरह आई. डाक के जरिए जब उनके हाथ में जीएसटी विभाग का लिफाफा पहुंचा, तो उन्हें लगा शायद कोई सामान्य कागजी कार्रवाई होगी. लेकिन जैसे ही उन्होंने नोटिस खोला, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. विभाग ने उनसे 1,99,42,313 रुपये का टैक्स जमा करने को कहा था.

पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल

हैरान-परेशान ओम प्रकाश जब इसकी शिकायत लेकर सेल टैक्स दफ्तर और थाने पहुंचा, तब इस बड़ी साजिश का खुलासा हुआ. जांच में पता चला कि किसी जालसाज ने ओम प्रकाश के पैन कार्ड का इस्तेमाल करके उनके नाम पर दो फर्जी कंपनियां खड़ी कर दी थीं. इसमें से एक कंपनी दिल्ली में ओम ट्रेडर्स के नाम से चल रही थी और दूसरी फर्रुखाबाद में वर्मा इंटरप्राइजेज के नाम से थी. जालसाजों ने इन कंपनियों के जरिए करोड़ों का लेन-देन किया. अकेले दिल्ली वाली फर्म से पिछले साल 11 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार दिखाया गया, जिसका टैक्स अब विभाग असली पैन कार्ड धारक यानी ओम प्रकाश से मांग रहा है.

पीड़ित की गुहार साहब, मैं तो बस एक गरीब मास्टर हूं

ओम प्रकाश बताते हैं कि वह एक बेहद साधारण जीवन जीते हैं. प्राइवेट स्कूल में पढ़ाकर जैसे-तैसे घर का खर्चा चलाते हैं. उन्होंने कहा, साहब, मेरे पास न तो कोई बिजनेस है और न ही इतनी हैसियत. किसी ने मेरे कागजों का गलत फायदा उठाया और मुझे इस दलदल में फंसा दिया. अब मैं न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा हूं.

प्रशासन की जांच जारी

इस मामले ने एक बार फिर पैन कार्ड की सुरक्षा और जीएसटी पंजीकरण में होने वाली धांधली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस और जीएसटी विभाग अब इस बात की छानबीन कर रहे हैं कि आखिर वह कौन है जिसने ओम प्रकाश के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए और जीएसटी नंबर हासिल किया. फिलहाल, पीड़ित युवक ने डुमरियागंज थाने में लिखित आवेदन देकर अपनी जान-माल की सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है.

मेरठ के रिक्शा चालक को 76 करोड़ का नोटिस 2021

यह मामला साल 2021 का है. मेरठ के रहने वाले एक गरीब रिक्शा चालक, जिनका नाम प्रताप सिंह था, उनके होश तब उड़ गए जब उनके घर आयकर विभाग का नोटिस पहुंचा. उस नोटिस में लिखा था कि उन्हें 76 करोड़ रुपये का टैक्स भरना है.

क्या हुआ था : प्रताप सिंह दिन भर रिक्शा चलाकर मुश्किल से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाता था. जब वह डरते-सहजते अधिकारियों के पास पहुंचा, तो पता चला कि किसी जालसाज ने उनके आधार और पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल किया था. उस गरीब रिक्शा चालक के नाम पर जीएसटी नंबर लेकर करोड़ों का टर्नओवर दिखाया गया था. धोखेबाजों ने उनके नाम से फर्जी बैंक खाते खोले और बड़े पैमाने पर व्यापार किया, जिसकी भनक प्रताप सिंह को तब लगी जब विभाग ने उनके घर करोड़ों का बिल भेज दिया.

सिद्धार्थनगर के ओम प्रकाश और मेरठ के प्रताप सिंह, दोनों ही डॉक्यूमेंट फ्रॉड का शिकार हुए. इन दोनों मामलों में एक ही समानता थी गरीबों की लाचारी का फायदा उठाकर उनके नाम पर कागजी कंपनियां बनाना.

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