बाँदा : पति और पत्नी को फांसी की सजा : 47 देशों में बेचे मासूमों के वीडियो, रोंगटे खड़े कर देगी हैवानियत की ये कहानी...
Banda Child Abuse Case : उत्तर प्रदेश के बांदा में मासूम बच्चों के साथ दरिंदगी करने वाले महापापी जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. यह हैवान पिछले 10 साल से बच्चों का यौन शोषण कर उनके अश्लील वीडियो 47 देशों में बेच रहा था. इंटरपोल और सीबीआई की जांच में हुए इस खौफनाक खुलासे के बाद, पॉक्सो कोर्ट ने इसे अपराध मानते हुए दोनों दोषियों को मौत की सजा दी है.
बाँदा : पति और पत्नी को फांसी की सजा : 47 देशों में बेचे मासूमों के वीडियो, रोंगटे खड़े कर देगी हैवानियत की ये कहानी...
Banda JE Death Sentence : बांदा : उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड से एक ऐसा फैसला आया है जिसने इंसानियत पर भरोसा करने वालों को हिलाकर रख दिया है. करीब 10 साल तक मासूम बच्चों का यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो पूरी दुनिया में बेचने वाले जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को बांदा की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सजा-ए-मौत सुनाई है. जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने इसे संगीन अपराध मानते हुए आदेश दिया कि दोनों दोषियों को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उनकी मौत न हो जाए.
मासूमों को मोबाइल और खिलौनों का लालच
रामभवन की हैवानियत का तरीका बेहद शातिर था. वह बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर के गरीब और भोले-भाले बच्चों को अपना निशाना बनाता था.जिसकी खुद की कोई संतान नहीं थी, वह बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलने, यूट्यूब देखने और महंगे गिफ्ट्स का लालच देकर अपने घर बुलाता था. इस गंदे खेल में उसकी पत्नी दुर्गावती बराबर की हिस्सेदार थी. वह बच्चों को फुसलाकर घर लाती थी ताकि उसका पति उनके साथ दरिंदगी कर सके.
इंटरपोल की एक पेन ड्राइव ने खोला राज
यह मामला तब खुला जब इंटरपोल ने सीबीआई को एक पेन ड्राइव भेजी. इस पेन ड्राइव में 34 बच्चों के यौन शोषण के 79 वीडियो और करीब 679 अश्लील फोटो थे. जांच में पता चला कि रामभवन इन वीडियो को डार्क वेब के जरिए अमेरिका, ब्राजील, चीन और अफगानिस्तान समेत 47 देशों में बेचता था. एक वीडियो के बदले उसे लाखों रुपये मिलते थे और इस तरह उसने मासूमों का सौदा कर करोड़ों रुपये कमाए.
डॉक्टरों की गवाही
कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की गवाही सबसे अहम रही. डॉक्टरों ने बताया कि बच्चों के साथ इस कदर दरिंदगी की गई थी कि उनके नाजुक अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे. कई बच्चों की आंखों की रोशनी और मानसिक संतुलन तक प्रभावित हो गया था. बच्चों का दर्द बयां करते हुए डॉक्टरों की टीम भी विचलित हो गई थी. कोर्ट ने माना कि इस प्रताड़ना ने कई बच्चों का जीवन हमेशा के लिए नर्क बना दिया है.
दुनिया के सामने शरीफ बनने का ढोंग
हैरानी की बात यह है कि रामभवन दफ्तर में बेहद विनम्र और सीधा दिखता था. उसने कभी सरकारी आवास नहीं लिया और हमेशा किराए के घरों में रहा ताकि अपनी संदिग्ध गतिविधियों को छिपा सके. वह अक्सर अपना ठिकाना बदलता रहता था. 17 नवंबर 2020 को जब सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया, तब जाकर इस महापापी का असली चेहरा दुनिया के सामने आया.
कोर्ट ने न केवल फांसी की सजा सुनाई, बल्कि रामभवन पर 6.45 लाख और उसकी पत्नी पर 5.40 लाख का जुर्माना भी लगाया. जुर्माने की इस राशि से पीड़ित बच्चों को मुआवजा दिया जाएगा.
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड 2018
बिहार के मुजफ्फरपुर में साल 2018 में एक ऐसा दिल दहला देने वाला खुलासा हुआ था, जिसने पूरे देश की रूह कपा दी थी. यहाँ सरकार से मान्यता प्राप्त एक शेल्टर होम में रहने वाली 34 मासूम बच्चियों के साथ महीनों तक दरिंदगी और सामूहिक दुष्कर्म की बात सामने आई थी. इस काले धंधे का मुख्य मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर था, जो एक रसूखदार एनजीओ चलाता था और समाज में अपनी सफेदपोश छवि बनाए हुए था. जांच में पता चला कि इन बच्चियों को नशीली दवाएं दी जाती थीं और विरोध करने पर उनके साथ भयानक मारपीट की जाती थी.
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की एक ऑडिट रिपोर्ट के बाद जब पुलिस और सीबीआई ने जांच शुरू की, तो इस घिनौने खेल की एक-एक परत खुलती गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे दिल्ली की साकेत कोर्ट में ट्रांसफर किया गया, जहाँ 2020 में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत 19 दोषियों को उम्रकैद और सख्त सजा सुनाई गई थी. यह कांड आज भी सिस्टम की उन खामियों की याद दिलाता है, जहाँ रक्षक ही भक्षक बन गए थे.