असली या फर्जी हस्ताक्षर? इस्तीफे पर नीतीश कुमार के सिग्नेचर संदेह के घेरे में, पहली बार इस अंदाज में लिखा नाम

Nitish Kumar News : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को अपना इस्तीफा पत्र विधान परिषद के सभापति को भेज चुके हैं। पत्र के नीचे में उनका सिग्नेचर है। यह पूरा सिग्नेचर हिंदी के अक्षरों में है।

Update: 2026-03-31 06:42 GMT

Nitish Kumar Signature News : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को अपना इस्तीफा पत्र विधान परिषद के सभापति को भेज चुके हैं। पत्र के नीचे में उनका सिग्नेचर है। यह पूरा सिग्नेचर हिंदी के अक्षरों में है। नीतीश कुमार ने अपने नाम को हू-ब-हू (नीतीश कुमार) हिंदी में लिखा है। ऐसा पहली बार है, जब उन्होंने अपना हस्ताक्षर हिंदी में ऐसे किया हो। सीएम बनने से पिछले कुछ साल तक उनकी लिखावट काफी अट्रैक्टिव होती थी। सीधा सपाट नहीं।

नीतीश कुमार की सोशल इंजीनियरिंग राजनीतिक और प्रशासनिक लेवल तक सीमित नहीं थी। उन्होंने अपने साइन में भी देवनागरी और फारसी (हिंदी और उर्दू) का तड़का रखा था। उनके नजदीकियों का कहना है कि नीतीश कुमार अपने सिग्नेचर में हिंदी और उर्दू शब्द इस्तेमाल करते थे। वे अपने नाम का पहला हिस्सा हिंदी (देवनागरी) में और सरनेम उर्दू में लिखते थे।

कब से बदला नीतीश कुमार का सिग्नेचर?

नीतीश कुमार के सिग्नेचर में बदलाव हाल में दिख रहा है। वह 2024 तक हिंदी और उर्दू मिलाकर साइन करते थे। संपत्ति के ब्योरा पर साइन और चुनावी हलफनामे के सिग्नेचर में बदलाव दिखा है। नीतीश कुमार ने 2025 से साइन बदला है। 22 दिसंबर 2025 को संपत्ति की घोषणा और राज्यसभा के नॉमिनेशन लेटर में सिर्फ हिंदी (देवनागरी) में सिग्नेचर था। इससे पहले वे सारे दस्तावेज पर हिंदी और उर्दू में साइन करते थे। मार्च 2024 में नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद के सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया था। उन्होंने अपने शपथ पत्र पर साइन किया था। इसमें नीतीश कुमार लिखने का तरीका अब से अलग था।

राजद ने उठाए सवाल

राजद एमएलसी सुनील कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि छोटे पद का भी इस्तीफा ऑथराइज्ड पर्सन के सामने देना होता है। जांच होनी चाहिए की हस्ताक्षर असली या फर्जी है।

नीतीश ने यात्रा का पैटर्न भी बदला

नीतीश कुमार यात्राओं के लिए प्रसिद्ध हैं। 2005 में न्याय यात्रा की थी। इसके बाद जनता ने उन्हें सीएम पद की जिम्मेदारी दी। वह लगातार यात्राएं कर रहे हैं। हाल में उनकी समृद्धि यात्रा पूरी हुई। यह उनकी 16वीं यात्रा रही। नीतीश कुमार ने वक्त के साथ अपनी यात्रा का पैटर्न भी बदला। पहले नीतीश गांव-गांव पैदल घूमते थे। आम लोगों के घर जाकर उनसे बातें करते थे। जिलों में रातभर रुकते। अब उनकी जनता से दूरी दिखती है। सीएम अधिकारियों से घिरे होते हैं। उन्हें पहले की तरह लोग सीधे रियल फीडबैक नहीं दे पाते।

कैसी थी नीतीश की तंबू वाली यात्रा?

2005 और उसके बाद के कुछ साल तक नीतीश कुमार की यात्रा लंबी चलती थी। सड़क मार्ग से गाड़ी में यात्रा करते थे। यात्रा के लिए दो टेंट लगाते थे। एक टेंट जहां यात्रा कर रहे और दूसरा टेंट जहां अगले दिन जाने वाले हैं, वहां लगता था। टेंट का पहला सेटअप नीतीश कुमार और उनके साथ मौजूद मंत्रियों के लिए होता था। सीएम और मंत्री इसमें रात में सोते थे। टेंट का दूसरा सेट अधिकारियों के लिए होता था।

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